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विजय दिवस के उपलक्ष में गोष्ठी का आयोजन
Updated Sun, 17 Dec 2017 02:01 AM IST
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विजय दिवस के उपलक्ष्य में गोष्ठी का आयोजन
-- सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं ने दी देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति
अमर उजाला ब्यूरो
मुनिकीरेती । राजकीय इंटर कॉलेज गंगाभोगपुर, यमकेश्वर में विजय दिवस के उपलक्ष्य में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने देश भक्ति पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। शनिवार को यमकेश्वर स्थित विद्यालय परिसर में आयोजित गोष्ठी का विद्यालय के प्रधानाचार्य एचएम बडोनी ने शुभारंभ किया गया। इस मौके पर उन्होंने वीर जवानों का स्मरण किया। बताया कि तीन सितंबर 1971 से 16 दिसंबर 1971 के मध्य पाक सेना पर विजय हासिल कर अपने अदम्य साहस के बल पर नव राष्ट्र बांग्लादेश का निर्माण किया था। इस अवसर पर छात्र- छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत देश भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी।
डॉ. अभयमित्र आर्य ने कहा कि जंग के मैदान में जवानों के सामने गोली आती दिखाई पड़ती है, गोली यदि पांव में लगी तो विकलांग व सीने में लगी तो बलिदान होते हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों में जवानों ने विजय हासिल की है। इस अवसर पर वेद रामपाल, गुलशन शर्मा, विजयकुमार पालीवाल, रमेश रावत, जयकृत बिष्ट, अशरफ अली, अशोक चौहान, गिरीश उपाध्याय, सुरेंद्र पाल, चंद्रप्रकाश भारती, अमित बिष्ट, लक्ष्मी पोखरियाल, रेखा पुरोहित, अतुल बमराड़ा आदि मौजूद थे।
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-- सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं ने दी देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति
अमर उजाला ब्यूरो
मुनिकीरेती । राजकीय इंटर कॉलेज गंगाभोगपुर, यमकेश्वर में विजय दिवस के उपलक्ष्य में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने देश भक्ति पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। शनिवार को यमकेश्वर स्थित विद्यालय परिसर में आयोजित गोष्ठी का विद्यालय के प्रधानाचार्य एचएम बडोनी ने शुभारंभ किया गया। इस मौके पर उन्होंने वीर जवानों का स्मरण किया। बताया कि तीन सितंबर 1971 से 16 दिसंबर 1971 के मध्य पाक सेना पर विजय हासिल कर अपने अदम्य साहस के बल पर नव राष्ट्र बांग्लादेश का निर्माण किया था। इस अवसर पर छात्र- छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत देश भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी।
डॉ. अभयमित्र आर्य ने कहा कि जंग के मैदान में जवानों के सामने गोली आती दिखाई पड़ती है, गोली यदि पांव में लगी तो विकलांग व सीने में लगी तो बलिदान होते हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों में जवानों ने विजय हासिल की है। इस अवसर पर वेद रामपाल, गुलशन शर्मा, विजयकुमार पालीवाल, रमेश रावत, जयकृत बिष्ट, अशरफ अली, अशोक चौहान, गिरीश उपाध्याय, सुरेंद्र पाल, चंद्रप्रकाश भारती, अमित बिष्ट, लक्ष्मी पोखरियाल, रेखा पुरोहित, अतुल बमराड़ा आदि मौजूद थे।
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