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एनजीटी के आदेश को ठेंगा, खुलेआम प्लास्टिक की बिक्री जारी
Updated Sun, 17 Dec 2017 12:05 AM IST
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हरिद्वार। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरिद्वार से लेकर उत्तरकाशी तक गंगा के किनारे प्लास्टिक की बिक्री को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया है। प्लास्टिक पाबंदी के आदेशों के बाद भी धर्मनगरी में हरकी पैड़ी सहित गंगा के प्रमुख घाटों को पहले की तरह प्लास्टिक की कैनियों की दुकानें सजी और बिक्री हुई। शनिवार को पाबंदी के आदेशों को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम हरकत में नजर नहीं आई।
एक बार फिर एनजीटी ने गंगा बेसिन क्षेत्रों के साथ उत्तरकाशी से हरिद्वार तक प्लास्टिक से बने सभी तरह के सामानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह पहला मौका नहीं जब एनजीटी ने धर्मनगरी में गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पॉलिथीन और प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने के आदेश दिए हों। इससे पहले भी एनजीटी पॉलिथीन पर पाबंदी लगाने के साथ गंगा में गिर रहे गंदे नालों को बंद करने के आदेश दे चुका है। इतना ही नहीं एनजीटी के कार्ट कमिश्नर ने कई बार हरिद्वार का दौरा करके अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश भी जारी किए थे। प्रशासन की तरफ से आदेशों के पालन के लिए कभी कभार अभियान चलाते रहे, लेकिन पूर्ण पाबंदी लागू करने को गंभीर प्रयास नहीं हुए।
शनिवार को एनजीटी के आदेश जारी हुए 24 घंटे बीत जाने के बाद भी प्लास्टिक और पॉलिथीन की बिक्री पर किसी तरह की रोक नजर नहीं आई। हरकी पैड़ी पर प्लास्टिक उत्पाद और पॉलीथिन की खुलेआम बिक्री होती रही। तीर्थनगरी में मुख्य बाजारों से लेकर गंगा के घाटों में पॉलीथिन व प्लास्टिक कैन, बोतल, प्लेट, थैलियों का क्रय-विक्रय जारी रहा। आसपास के दुकानदार खुलेआम इन सामानों को बेचते हुए मिले।
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यह है एनजीटी का आदेश
शुक्रवार को एनजीटी ने उत्तराखंड में हरिद्वार-ऋषिकेश से लेकर उत्तरकाशी तक गंगा किनारे बसें सभी शहरों एवं कस्बों में प्लास्टिक की थैलियों, प्लास्टिक से बने कप-गिलास, प्लेट, चम्मच पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया है। इन डिस्पोजेबल आइटमों के प्रयोग, उत्पादन, बिक्री एवं भंडारण को दंडनीय बनाया गया है। उल्लंघन करने वालों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
हाईकोर्ट भी दे चुका आदेश
अधिवक्ता ललित मिगलानी की जनहित याचिका पर दो दिसंबर को नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा में गंदा पानी गिरने 180 उद्योगों को नोटिस दिए थे। इसमें से 106 उद्योगों को बंद करने को कहा था। इसी के साथ ही 500 मीटर दायरे में मलमूत्र विसर्जन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना गलाने के आदेश दिए थे। गंगा किनारे पचास से अधिक अतिथियों के रहने की क्षमता वाले होटल और बडे़ आश्रम न खोलने के निर्देश दिए। नगर निगम हरिद्वार और नगर पालिका ऋषिकेश को पर्याप्त संख्या में शौचालय बनाने को कहा गया। इसी निर्णय के साथ एक जनवरी-2016 से प्लास्टिक बैग पर प्रतबिंध लगाया था। जिसमें गंगा में नहाने पर साबुन, शैंपू या तेल के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया। कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के साथ गंगा मे दो किलोमीटर के दायरे में चीनी मिल, पेपर, डिस्टलरी, टैक्सटाइल उद्योगों पर रोक लगाई थी।
कोट
अभी तक एनजीटी के आदेश जिला प्रशासन को नहीं मिले हैं, लेकिन खबरों के आधार आदेश के पालन के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। पहले के आदेशों में प्लास्टिक प्रतिबंध पर स्थिति स्पष्ट न होने से हिलाहवाली रही। अब आदेश मिलते ही विक्रेता और खरीदार दोनों पर कार्रवाई होगी। स्कूलों में बच्चों को जागरूक कराया जाएगा। एसएसपी को निर्देश जारी किए जा रहे है कि अन्य प्रदेशों से आने वाली प्लास्टिक सामग्री को जब्त करते हुए जुर्माना लगाएं। नगर निकायों के अधिकारियों को भी कार्रवाई को निर्देशित किया जाएगा।
- दीपक रावत, जिलाधिकारी हरिद्वार।
कोट
पूर्व आदेशों और डीएम के निर्देशों पर प्लास्टिक व पॉलिथीन प्रतिबंध कराने को समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है। अधीनस्थों को निर्देशित किया है कि वह सक्रियता के साथ प्लास्टिक व पॉलिथीन विक्रेताओं पर कार्रवाई करें। कार्रवाई को जिला प्रशासन के साथ बैठक कर सघन कार्रवाई चलाने को कार्ययोजना बनाई जाएगी। जिसमें पुलिस प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा। एनजीटी के आदेशों को पूरी तरह से लागू कराया जाएगा।
- नितिन भदौरिया, नगर आयुक्त।
कोट
गंगाजल के लिए कैनी बेचते हैं, यह प्रतिबंध नहीं है। अन्य प्रतिबंधित सामानों को हरिद्वार के व्यापारी पहले से ही प्रतिबंध कर चुके हैं। लंगरों में प्लास्टिक और थर्माकोल का प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें प्रतिबंधित और कार्रवाई कराने को प्रशासन के साथ हैं। फिलहाल जो एनजीटी ने आदेश जारी किए है उसे लागू कराने में व्यापारी सहयोग करेंगे।
कैलाश केशवानी, प्लास्टिक व्यापारी, राष्ट्रीय सचिव व्यापार मंडल।
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एक बार फिर एनजीटी ने गंगा बेसिन क्षेत्रों के साथ उत्तरकाशी से हरिद्वार तक प्लास्टिक से बने सभी तरह के सामानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह पहला मौका नहीं जब एनजीटी ने धर्मनगरी में गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पॉलिथीन और प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने के आदेश दिए हों। इससे पहले भी एनजीटी पॉलिथीन पर पाबंदी लगाने के साथ गंगा में गिर रहे गंदे नालों को बंद करने के आदेश दे चुका है। इतना ही नहीं एनजीटी के कार्ट कमिश्नर ने कई बार हरिद्वार का दौरा करके अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश भी जारी किए थे। प्रशासन की तरफ से आदेशों के पालन के लिए कभी कभार अभियान चलाते रहे, लेकिन पूर्ण पाबंदी लागू करने को गंभीर प्रयास नहीं हुए।
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शनिवार को एनजीटी के आदेश जारी हुए 24 घंटे बीत जाने के बाद भी प्लास्टिक और पॉलिथीन की बिक्री पर किसी तरह की रोक नजर नहीं आई। हरकी पैड़ी पर प्लास्टिक उत्पाद और पॉलीथिन की खुलेआम बिक्री होती रही। तीर्थनगरी में मुख्य बाजारों से लेकर गंगा के घाटों में पॉलीथिन व प्लास्टिक कैन, बोतल, प्लेट, थैलियों का क्रय-विक्रय जारी रहा। आसपास के दुकानदार खुलेआम इन सामानों को बेचते हुए मिले।
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यह है एनजीटी का आदेश
शुक्रवार को एनजीटी ने उत्तराखंड में हरिद्वार-ऋषिकेश से लेकर उत्तरकाशी तक गंगा किनारे बसें सभी शहरों एवं कस्बों में प्लास्टिक की थैलियों, प्लास्टिक से बने कप-गिलास, प्लेट, चम्मच पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया है। इन डिस्पोजेबल आइटमों के प्रयोग, उत्पादन, बिक्री एवं भंडारण को दंडनीय बनाया गया है। उल्लंघन करने वालों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
हाईकोर्ट भी दे चुका आदेश
अधिवक्ता ललित मिगलानी की जनहित याचिका पर दो दिसंबर को नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा में गंदा पानी गिरने 180 उद्योगों को नोटिस दिए थे। इसमें से 106 उद्योगों को बंद करने को कहा था। इसी के साथ ही 500 मीटर दायरे में मलमूत्र विसर्जन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना गलाने के आदेश दिए थे। गंगा किनारे पचास से अधिक अतिथियों के रहने की क्षमता वाले होटल और बडे़ आश्रम न खोलने के निर्देश दिए। नगर निगम हरिद्वार और नगर पालिका ऋषिकेश को पर्याप्त संख्या में शौचालय बनाने को कहा गया। इसी निर्णय के साथ एक जनवरी-2016 से प्लास्टिक बैग पर प्रतबिंध लगाया था। जिसमें गंगा में नहाने पर साबुन, शैंपू या तेल के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया। कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के साथ गंगा मे दो किलोमीटर के दायरे में चीनी मिल, पेपर, डिस्टलरी, टैक्सटाइल उद्योगों पर रोक लगाई थी।
कोट
अभी तक एनजीटी के आदेश जिला प्रशासन को नहीं मिले हैं, लेकिन खबरों के आधार आदेश के पालन के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। पहले के आदेशों में प्लास्टिक प्रतिबंध पर स्थिति स्पष्ट न होने से हिलाहवाली रही। अब आदेश मिलते ही विक्रेता और खरीदार दोनों पर कार्रवाई होगी। स्कूलों में बच्चों को जागरूक कराया जाएगा। एसएसपी को निर्देश जारी किए जा रहे है कि अन्य प्रदेशों से आने वाली प्लास्टिक सामग्री को जब्त करते हुए जुर्माना लगाएं। नगर निकायों के अधिकारियों को भी कार्रवाई को निर्देशित किया जाएगा।
- दीपक रावत, जिलाधिकारी हरिद्वार।
कोट
पूर्व आदेशों और डीएम के निर्देशों पर प्लास्टिक व पॉलिथीन प्रतिबंध कराने को समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है। अधीनस्थों को निर्देशित किया है कि वह सक्रियता के साथ प्लास्टिक व पॉलिथीन विक्रेताओं पर कार्रवाई करें। कार्रवाई को जिला प्रशासन के साथ बैठक कर सघन कार्रवाई चलाने को कार्ययोजना बनाई जाएगी। जिसमें पुलिस प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा। एनजीटी के आदेशों को पूरी तरह से लागू कराया जाएगा।
- नितिन भदौरिया, नगर आयुक्त।
कोट
गंगाजल के लिए कैनी बेचते हैं, यह प्रतिबंध नहीं है। अन्य प्रतिबंधित सामानों को हरिद्वार के व्यापारी पहले से ही प्रतिबंध कर चुके हैं। लंगरों में प्लास्टिक और थर्माकोल का प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें प्रतिबंधित और कार्रवाई कराने को प्रशासन के साथ हैं। फिलहाल जो एनजीटी ने आदेश जारी किए है उसे लागू कराने में व्यापारी सहयोग करेंगे।
कैलाश केशवानी, प्लास्टिक व्यापारी, राष्ट्रीय सचिव व्यापार मंडल।