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राज्य में प्राकृतिक जल स्रोतों के मानचित्रीकरण का कार्य हो शुरू
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:42 PM IST
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श्रीनगर। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने गढ़वाल विवि के प्रौढ़ सतत शिक्षा प्रसार विभाग व करियर काउंसिलिंग सेल के सहयोग से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने कहा कि पानी की उपलब्धता कम होने से सामाजिक संघर्ष बढ़ रहे हैं।
शनिवार को सीनेट हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य अतिथि प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि भूजल मानव जीवन के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। पानी की उपलब्धता कम होने से सामाजिक संघर्ष बढ रहे हैं। ये संघर्ष केवल समाजों तक सीमित नहीं है बल्कि अतंरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए हैं। पानी राष्ट्रों के बीच संघर्ष का प्रमुख कारण बनता जा रहा है। भूगर्भ विज्ञान के डा. एसपी सती ने कहा कि हिमालय के प्रचुर जन संसाधन हिमालय निवासियों के कभी काम नहीं आए। बड़ी नदियां हमारे काम नहीं आ रही हैं। हमें छोटे गदरों का प्रभावशाली प्रबंधन कर उनको स्थानीय जनता के लिए उपयोगी बनाना होगा। अंधा-धुंध निर्माण कार्यों से प्राकृतिक जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। राज्य के लगभग 4 हजार गांव गहरे जल संकट से गुजर रहे हैं। डा. मोहन पंवार ने देश के जल संसाधनों का खाका पावर प्वांइट के माध्यम से रखा। कहा कि उत्तराखंड में जल स्रोतों का समुचित डाटा उपलब्ध नहीं हैं। बड़े पैमाने पर जल स्रोतों के मानचित्रीककरण का कार्य शुरू होना चाहिए। कार्यशाला का संचालन डा. संजय ध्यानी ने किया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
शनिवार को सीनेट हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य अतिथि प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि भूजल मानव जीवन के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। पानी की उपलब्धता कम होने से सामाजिक संघर्ष बढ रहे हैं। ये संघर्ष केवल समाजों तक सीमित नहीं है बल्कि अतंरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए हैं। पानी राष्ट्रों के बीच संघर्ष का प्रमुख कारण बनता जा रहा है। भूगर्भ विज्ञान के डा. एसपी सती ने कहा कि हिमालय के प्रचुर जन संसाधन हिमालय निवासियों के कभी काम नहीं आए। बड़ी नदियां हमारे काम नहीं आ रही हैं। हमें छोटे गदरों का प्रभावशाली प्रबंधन कर उनको स्थानीय जनता के लिए उपयोगी बनाना होगा। अंधा-धुंध निर्माण कार्यों से प्राकृतिक जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। राज्य के लगभग 4 हजार गांव गहरे जल संकट से गुजर रहे हैं। डा. मोहन पंवार ने देश के जल संसाधनों का खाका पावर प्वांइट के माध्यम से रखा। कहा कि उत्तराखंड में जल स्रोतों का समुचित डाटा उपलब्ध नहीं हैं। बड़े पैमाने पर जल स्रोतों के मानचित्रीककरण का कार्य शुरू होना चाहिए। कार्यशाला का संचालन डा. संजय ध्यानी ने किया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
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