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मुंडा देवता मंदिर में भी पशुबलि प्रथा हुई खत्म, श्रीफल से संतुष्ट हुए मुंडा देवता
Updated Wed, 06 Dec 2017 10:50 PM IST
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गोपेश्वर। देवर-खडोरा गांव के आराध्य देव मुंडा देवता के मंदिर में पिछले पांच दिनों से चल रहा धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो गया है। इस वर्ष मुंडा देवता मंदिर में पशु बलि नहीं हुई। आचार्यों ने श्रीफल से ही देवताओं की पूजा-अर्चना संपन्न की।
मुंडा देवता को देवर-खडोरा क्षेत्र के क्षेत्रपाल के रुप में पूजा जाता है। मुंडा देवता मंदिर में लंबे समय से पशु बलि की प्रथा चली आ रही थी। ग्रामीण मुंडा देवता को प्रसन्न करने के लिए मंदिर में भैंसे और बकरियों की बलि देते थे। बदलते परिवेश और अनुष्ठान पर प्रशासन की पैनी नजर होने से इस वर्ष ग्रामीणों ने मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान शुरू करने से पहले बैठक आयोजित कर पशु बलि न करने का निर्णय लिया और मुंडा देवता से इसकी अनुमति मांगी। देवता ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर अपने भक्तों के आग्रह को स्वीकार कर लिया। एक से पांच दिसंबर तक मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। प्रत्येक दिन मुंडा देवता के साथ ही अन्य देवगणों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ ढोल की थाप पर नृत्य किया। पांच दिसंबर को भक्तगणों ने मुंडा देवता की भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया। मुंडा देवता ने पश्वा पर अवतरित होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया। धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए गांव की ध्याणियां भी अपने मायके पहुंची हुई थी। गांव के उपप्रधान सैन सिंह रावत ने बताया कि मुंडा देवता के मंदिर में अब भविष्य में भी पशुबलि नहीं दी जाएगी।
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मुंडा देवता को देवर-खडोरा क्षेत्र के क्षेत्रपाल के रुप में पूजा जाता है। मुंडा देवता मंदिर में लंबे समय से पशु बलि की प्रथा चली आ रही थी। ग्रामीण मुंडा देवता को प्रसन्न करने के लिए मंदिर में भैंसे और बकरियों की बलि देते थे। बदलते परिवेश और अनुष्ठान पर प्रशासन की पैनी नजर होने से इस वर्ष ग्रामीणों ने मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान शुरू करने से पहले बैठक आयोजित कर पशु बलि न करने का निर्णय लिया और मुंडा देवता से इसकी अनुमति मांगी। देवता ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर अपने भक्तों के आग्रह को स्वीकार कर लिया। एक से पांच दिसंबर तक मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। प्रत्येक दिन मुंडा देवता के साथ ही अन्य देवगणों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ ढोल की थाप पर नृत्य किया। पांच दिसंबर को भक्तगणों ने मुंडा देवता की भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया। मुंडा देवता ने पश्वा पर अवतरित होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया। धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए गांव की ध्याणियां भी अपने मायके पहुंची हुई थी। गांव के उपप्रधान सैन सिंह रावत ने बताया कि मुंडा देवता के मंदिर में अब भविष्य में भी पशुबलि नहीं दी जाएगी।
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