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जल्द ही आपदा प्रभावित गणांई और दाड़मी गांवों का हो जाएगा पुनर्वास
Updated Mon, 04 Dec 2017 10:37 PM IST
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जोशीमठ। कनोल गांव के बाद अब शासन स्तर पर दो दशक से आपदा की मार झेल रहे गणांई और दाड़मी गांव के पुनर्वास की कार्ययोजना तैयार होने लगी है। शासन ने जिला प्रशासन से पुनर्वास के लिए शीर्ष प्राथमिकता में रखे गणांई और दाड़मी गांवों की भौगोलिक और भूगर्भीय रिपोर्ट तलब की है।
चमोली जिले में विस्थापन के लिए 78 गांव सूचीबद्ध हैं, जिनमें से कनोल गांव के पुनर्वास के लिए शासन से वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। वहीं, बीते वर्ष फरकंडे गांव के सात परिवारों को गांव के ही सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित कर दिया गया था, जबकि वर्ष 2015-16 तक जिले के 529 परिवारों को विश्व बैंक परियोजना के अंतर्गत सुरक्षित स्थलों पर पुनर्वासित किया जा चुका है। 29 मार्च 1999 में आए भूकंप से गणांई गांव के ऊपरी और बांयी ओर के हिस्से की चट्टानों से भूस्खलन शुरू हो गया था, जिसके बाद से बारिश होने पर चट्टानों से भूस्खलन होने लगता है। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से चट्टानों पर भूस्खलन का दायरा बढ़ गया है, जिससे गणांई और दाणमी गांवों को खतरा उत्पन्न हो गया है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजया रावत का कहना है कि विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक गांव के विस्थापन की गुहार लगाई, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है। जिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि गणांई गांव में 135 और दाड़मी गांव में 43 परिवार निवास करते हैं। दोनों गांवों के पुनर्वास की योजना तैयार की जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि गणांई व दाणमी गांव का भू-वैज्ञानिकों की टीम की ओर से भूगर्भीय सर्वेक्षण कार्य भी किया गया है। जल्द ही गांवों का पुनर्वास कर लिया जाएगा।
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चमोली जिले में विस्थापन के लिए 78 गांव सूचीबद्ध हैं, जिनमें से कनोल गांव के पुनर्वास के लिए शासन से वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। वहीं, बीते वर्ष फरकंडे गांव के सात परिवारों को गांव के ही सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित कर दिया गया था, जबकि वर्ष 2015-16 तक जिले के 529 परिवारों को विश्व बैंक परियोजना के अंतर्गत सुरक्षित स्थलों पर पुनर्वासित किया जा चुका है। 29 मार्च 1999 में आए भूकंप से गणांई गांव के ऊपरी और बांयी ओर के हिस्से की चट्टानों से भूस्खलन शुरू हो गया था, जिसके बाद से बारिश होने पर चट्टानों से भूस्खलन होने लगता है। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से चट्टानों पर भूस्खलन का दायरा बढ़ गया है, जिससे गणांई और दाणमी गांवों को खतरा उत्पन्न हो गया है।
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पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजया रावत का कहना है कि विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक गांव के विस्थापन की गुहार लगाई, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है। जिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि गणांई गांव में 135 और दाड़मी गांव में 43 परिवार निवास करते हैं। दोनों गांवों के पुनर्वास की योजना तैयार की जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि गणांई व दाणमी गांव का भू-वैज्ञानिकों की टीम की ओर से भूगर्भीय सर्वेक्षण कार्य भी किया गया है। जल्द ही गांवों का पुनर्वास कर लिया जाएगा।
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