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सरकारी अस्पताल में रामभरोसे इमरजेंसी सेवा
Updated Sat, 02 Dec 2017 01:06 AM IST
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फाइल फोटो नेम-
इधर, स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे
-- कुर्सी पर बैठने को तैयार नहीं डॉक्टर और फार्मासिस्ट
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। नगर के एकमात्र राजकीय चिकित्सालय में डॉक्टरों की कमी से पहले ही लोग परेशान हैं और जो हैं भी वह भी ड्यूटी करने को तैयार नहीं हैं। इमरजेंसी कक्ष में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते रहते हैं जबकि डॉक्टर और फार्मासिस्ट कुर्सी से अक्सर गायब रहते हैं। एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों के अभाव में ओपीडी में मरीज पहले ही परेशान हैं। इमरजेंसी सेवा पर भी इसका असर पड़ रहा है। फार्मासिस्ट भी इमरजेंसी में कुर्सी पर बैठने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं में घायल होकर इलाज को अस्पताल आने वाले मरीज भी बेहाल हैं। बदइंतजामी की जानकारी होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन इसकी अनदेखी करने में लगा है।
दूसरी ओर राजकीय चिकित्सालय में ओपीडी सेवा में मरीजों से पंजीकरण शुल्क के लिए निर्धारित धनराशि से अधिक की वसूली की जा रही है। अस्पताल में ओपीडी में उपचार को आने वाले मरीजों से पंजीकरण शुल्क 19 रुपए निर्धारित है। जबकि वसूली 20 रुपए की जा रही है। औसतन अस्पताल में रोजाना चार से पांच सौ रोगी पहुंचते हैं। लिहाजा प्रत्येक पंजीकरण पर्ची पर एक रुपये की अतिरिक्त वसूली से अस्पताल के कर्मचारी प्रतिदिन चार से पांच सौ रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। लिहाजा ओपीडी और इमरजेंसी में एक ही डॉक्टर दोनों स्थानों पर ड्यूटी दे रहे हैं। पंजीकरण शुल्क में मरीजों से अतिरिक्त रकम की वसूली का मामला संज्ञान में है। जल्द ही इसकी जांच कराकर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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डा. एनएस तोमर, सीएमएस, राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश।
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इधर, स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे
-- कुर्सी पर बैठने को तैयार नहीं डॉक्टर और फार्मासिस्ट
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। नगर के एकमात्र राजकीय चिकित्सालय में डॉक्टरों की कमी से पहले ही लोग परेशान हैं और जो हैं भी वह भी ड्यूटी करने को तैयार नहीं हैं। इमरजेंसी कक्ष में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते रहते हैं जबकि डॉक्टर और फार्मासिस्ट कुर्सी से अक्सर गायब रहते हैं। एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों के अभाव में ओपीडी में मरीज पहले ही परेशान हैं। इमरजेंसी सेवा पर भी इसका असर पड़ रहा है। फार्मासिस्ट भी इमरजेंसी में कुर्सी पर बैठने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं में घायल होकर इलाज को अस्पताल आने वाले मरीज भी बेहाल हैं। बदइंतजामी की जानकारी होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन इसकी अनदेखी करने में लगा है।
दूसरी ओर राजकीय चिकित्सालय में ओपीडी सेवा में मरीजों से पंजीकरण शुल्क के लिए निर्धारित धनराशि से अधिक की वसूली की जा रही है। अस्पताल में ओपीडी में उपचार को आने वाले मरीजों से पंजीकरण शुल्क 19 रुपए निर्धारित है। जबकि वसूली 20 रुपए की जा रही है। औसतन अस्पताल में रोजाना चार से पांच सौ रोगी पहुंचते हैं। लिहाजा प्रत्येक पंजीकरण पर्ची पर एक रुपये की अतिरिक्त वसूली से अस्पताल के कर्मचारी प्रतिदिन चार से पांच सौ रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। लिहाजा ओपीडी और इमरजेंसी में एक ही डॉक्टर दोनों स्थानों पर ड्यूटी दे रहे हैं। पंजीकरण शुल्क में मरीजों से अतिरिक्त रकम की वसूली का मामला संज्ञान में है। जल्द ही इसकी जांच कराकर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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डा. एनएस तोमर, सीएमएस, राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश।