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बर्फवारी और कड़ाके की बीच छह माह के लिए बंद हुए बदरीनाथ धाम के कपाट
Updated Sun, 19 Nov 2017 10:34 PM IST
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बदरीनाथ। भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार शाम सात बजकर 28 मिनट पर बर्फवारी और कड़ाके की ठंड के बीच विधि-विधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान बदरीनाथ धाम तीर्थयात्रियों के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। धार्मिक परंपरानुसार बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और वेदपाठियों ने गुप्त मंत्रोच्चारण के साथ बदरीनाथ भगवान से छह माह तक के लिए विदा ली। कपाट बंद होने के मौके पर धाम में करीब पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री मौजूद थे।
रविवार तड़के से ही बदरीनाथ की महाभिषेक पूजा शुरू हो गई थी। धाम में वेद ऋचाओं का वाचन बंद होने से वेदपाठियों ने गुप्त मंत्रों से भगवान बदरीनाथ का आह्वान किया। धाम में धार्मिक प्रक्रियाएं दोपहर तक चलीं। बदरीनाथ के कपाट रविवार को दिन भर श्रद्धालुओं के लिए खुले रहे। शाम छह बजे से बदरीनाथ के मुख्य द्वार पर बदरीनाथ के वेदपाठी और संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया।
शाम साढ़े छह बजे धार्मिक परंपरा के अनुसार रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा। इसके बाद माणा गांव की कन्याओं द्वारा निर्मित कंबल पर घी का लेप लगाकर भगवान बदरीनाथ को ओढ़ाया गया। बदरीनाथ गर्भगृह से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाकर उत्सव डोली में रखा गया। सोमवार को आदि गुरु शंकराचार्य, कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की उत्सव डोलियां पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी।
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कपाट बंद होने के मौके पर बीकेटीसी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह, भूपेंद्र मैठाणी, राजेंद्र चौहान, आनंद रावत सहित धाम के सभी हक-हकूकधारी मौजूद रहे।
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रविवार तड़के से ही बदरीनाथ की महाभिषेक पूजा शुरू हो गई थी। धाम में वेद ऋचाओं का वाचन बंद होने से वेदपाठियों ने गुप्त मंत्रों से भगवान बदरीनाथ का आह्वान किया। धाम में धार्मिक प्रक्रियाएं दोपहर तक चलीं। बदरीनाथ के कपाट रविवार को दिन भर श्रद्धालुओं के लिए खुले रहे। शाम छह बजे से बदरीनाथ के मुख्य द्वार पर बदरीनाथ के वेदपाठी और संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया।
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शाम साढ़े छह बजे धार्मिक परंपरा के अनुसार रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा। इसके बाद माणा गांव की कन्याओं द्वारा निर्मित कंबल पर घी का लेप लगाकर भगवान बदरीनाथ को ओढ़ाया गया। बदरीनाथ गर्भगृह से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाकर उत्सव डोली में रखा गया। सोमवार को आदि गुरु शंकराचार्य, कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की उत्सव डोलियां पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी।
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कपाट बंद होने के मौके पर बीकेटीसी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह, भूपेंद्र मैठाणी, राजेंद्र चौहान, आनंद रावत सहित धाम के सभी हक-हकूकधारी मौजूद रहे।