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नंदा तेरी जात कैलासु लिजौला सजी धजी की.. आदि गीतों ने किया दर्शकों को मंत्रमुग्ध
Updated Thu, 16 Nov 2017 10:30 PM IST
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गौचर। विक्टोरिया क्रॉस नायक स्व. दरबान सिंह नेगी को समर्पित औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में लखनऊ से आए कव्वाल दल ने अपने अंदाज और गायकी से कव्वालियां पेश कर रंगत जमा दी। जागर गायिका बसंती बिष्ट की शास्त्रीय प्रस्तुति देखने के लिए दर्शक देर रात तक पंडाल में जमे रहे। इस दौरान विश्व सांस्कृतिक धरोहर घोषित रम्माण का शानदार मंचन किया गया। दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, मेला अधिकारी एसडीएम केएन गोस्वामी ने किया।
मेला पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत अक्षय नाट्य संस्था की ओर से प्रस्तुत नाटिका से हुई। इसके बाद जय गोपीनाथ कला संगम के कलाकारों ने कोटद्वार बाजार गाड़ी वैह्गी सिलिप, रूक जा है अनिता तैरू छुटीगे किलीप..., बेडु पाको बारामासा ... की सुमधुर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कर्णभूमि कला मंच के लोकगायक दिनेश बुग्याली और साथी टीम ने नंदा तेरी जात कैलासु लिजौला सजी धजी की.. आदि लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी। रूपकुुंड गाइड एंड पोर्ट्स की टीम ने ठंडू माठू चौ मासू डाडंयू मां फूली गै...., लै भूजी जाला रै चूड़ा..., चल नदूला घूूमी हिवाली बूरांश डांडा... आदि लोकगीतों की मोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद मंच पर विश्व सांस्कृतिक धरोहर घोषित रम्माण मंचन का रंग जमा। इसमें कलाकारों ने मुखौटा नृत्य, रामायण नृत्य, बणिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। ढोलक वादक बैशाखू लाल, हुकुम लाल की थाप ने दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। पद्मश्री बसंती बिष्ट की न्यौातंण लग्यां हौ खोली का गणेश... और देव कन्याओं के आह्वान की शास्त्रीय प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरी। लखनऊ से आए मोहम्मद निसाद, मोहम्मद इरफान, अल्लाह रखे, तसलीम और नौमी लाल की कबाल टीम अलाप और छंदों के साथ जब मंदिर में शंख बजाती है और मस्जिद में अजान हमारा प्यारा हिंदुस्तान...., खून की होली खेलने वाले न जीते हैं और न मरते हैं.. तथा अपने वतन की करो हिफाजत अपना झंडा लहराओ... जैसी कव्वालियों से हिंदू मुसलिम एकता का ऐसा पैगाम दिया। कार्यक्रम में केदारनाथ विधायक मनोज रावत, प्रकाश शैली, गजेंद्र नयाल, रमेश सिदोला, अर्जुन नेगी, कलाकार सुरेंद्र कमांडर, निशा, हीना और दीप्ति आदि मौजूद थे।
मेला पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत अक्षय नाट्य संस्था की ओर से प्रस्तुत नाटिका से हुई। इसके बाद जय गोपीनाथ कला संगम के कलाकारों ने कोटद्वार बाजार गाड़ी वैह्गी सिलिप, रूक जा है अनिता तैरू छुटीगे किलीप..., बेडु पाको बारामासा ... की सुमधुर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कर्णभूमि कला मंच के लोकगायक दिनेश बुग्याली और साथी टीम ने नंदा तेरी जात कैलासु लिजौला सजी धजी की.. आदि लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी। रूपकुुंड गाइड एंड पोर्ट्स की टीम ने ठंडू माठू चौ मासू डाडंयू मां फूली गै...., लै भूजी जाला रै चूड़ा..., चल नदूला घूूमी हिवाली बूरांश डांडा... आदि लोकगीतों की मोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद मंच पर विश्व सांस्कृतिक धरोहर घोषित रम्माण मंचन का रंग जमा। इसमें कलाकारों ने मुखौटा नृत्य, रामायण नृत्य, बणिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। ढोलक वादक बैशाखू लाल, हुकुम लाल की थाप ने दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। पद्मश्री बसंती बिष्ट की न्यौातंण लग्यां हौ खोली का गणेश... और देव कन्याओं के आह्वान की शास्त्रीय प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरी। लखनऊ से आए मोहम्मद निसाद, मोहम्मद इरफान, अल्लाह रखे, तसलीम और नौमी लाल की कबाल टीम अलाप और छंदों के साथ जब मंदिर में शंख बजाती है और मस्जिद में अजान हमारा प्यारा हिंदुस्तान...., खून की होली खेलने वाले न जीते हैं और न मरते हैं.. तथा अपने वतन की करो हिफाजत अपना झंडा लहराओ... जैसी कव्वालियों से हिंदू मुसलिम एकता का ऐसा पैगाम दिया। कार्यक्रम में केदारनाथ विधायक मनोज रावत, प्रकाश शैली, गजेंद्र नयाल, रमेश सिदोला, अर्जुन नेगी, कलाकार सुरेंद्र कमांडर, निशा, हीना और दीप्ति आदि मौजूद थे।
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