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पत्रकारिता के इच्छुक छात्रों में गंभीरता-संवेदनशीलता
Updated Mon, 13 Nov 2017 10:55 PM IST
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श्रीनगर। वरिष्ठ पत्रकार दिनेश जुयाल का कहना है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में जाने वाले नौजवानों में गंभीरता और संवेदनशीलता होनी जरूरी है। अपने आसपास की घटनाओं को देखने-परखने के बाद ही वह किसी घटना पर प्रतिक्रिया करें।
जुयाल एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार केंद्र में आयोजित फिल्म रसास्वाद कार्यशाला (फिल्म एप्रेसिएशन वर्कशॉप) को संबोधित कर रहे थे। सोमवार को वह समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिसमें सीखने की ललक होगी, वह पत्रकारिता के क्षेत्र में कभी फेल नहीं हो सकता। उन्होंने किसना बगोट का उदारहण देते हुए कहा कि पत्रकारिता के माध्यम से युवा वर्ग जरुरतमंदों की बेहतर मदद कर सकते हैं। उन्होंने स्पॉट रिपोर्टिंग का महत्व बताया।
विवि के आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. ओपी गुसाईं ने कहा कि छात्र काफी जागरूक हैं। विवि के पास कार्यशालाओं के आयोजन के लिए पर्याप्त बजट है। फिल्म मेकर एंड टेलीविजन प्रोग्रामर पंकज सक्सेना ने पांच दिन तक चली कार्यशाला का फीडबैक लिया।
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प्रशिक्षणार्थी सुबोध नेगी, राजेंद्र नेगी, हरेंद्र नौटियाल, काजल बहुगुणा, आर्यन त्यागी, अरूण प्रताप, अमर रावत व अनुराग जगवाण ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्यशाला को उपयोगी बताया।
केंद्र के निदेशक प्रो. एआर डंगवाल ने सभी अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि के विजिलेंस अफसर प्रो. आरसी शर्मा ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने 111 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यशाला के लिए 119 ने पंजीकरण करवाया था। 8 आवेदकों के कार्यशाला में सभी दिन अनुपस्थित रहने पर प्रमाण पत्र नहीं दिए गए।
कार्यशाला में डॉ. मनोज सुंद्रियाल, डॉ. दिनेश भट्ट, डॉ. वंदना डबराल, डॉ. देवेंद्र फर्स्वाण, डॉ. राजेंद्र नेगी, सुनील बलूनी और अरविंद रावत मौजूद थे। संचालन नयन कोठियाल और प्रिया अधिकारी ने किया।
जुयाल एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार केंद्र में आयोजित फिल्म रसास्वाद कार्यशाला (फिल्म एप्रेसिएशन वर्कशॉप) को संबोधित कर रहे थे। सोमवार को वह समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिसमें सीखने की ललक होगी, वह पत्रकारिता के क्षेत्र में कभी फेल नहीं हो सकता। उन्होंने किसना बगोट का उदारहण देते हुए कहा कि पत्रकारिता के माध्यम से युवा वर्ग जरुरतमंदों की बेहतर मदद कर सकते हैं। उन्होंने स्पॉट रिपोर्टिंग का महत्व बताया।
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विवि के आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. ओपी गुसाईं ने कहा कि छात्र काफी जागरूक हैं। विवि के पास कार्यशालाओं के आयोजन के लिए पर्याप्त बजट है। फिल्म मेकर एंड टेलीविजन प्रोग्रामर पंकज सक्सेना ने पांच दिन तक चली कार्यशाला का फीडबैक लिया।
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प्रशिक्षणार्थी सुबोध नेगी, राजेंद्र नेगी, हरेंद्र नौटियाल, काजल बहुगुणा, आर्यन त्यागी, अरूण प्रताप, अमर रावत व अनुराग जगवाण ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्यशाला को उपयोगी बताया।
केंद्र के निदेशक प्रो. एआर डंगवाल ने सभी अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि के विजिलेंस अफसर प्रो. आरसी शर्मा ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने 111 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यशाला के लिए 119 ने पंजीकरण करवाया था। 8 आवेदकों के कार्यशाला में सभी दिन अनुपस्थित रहने पर प्रमाण पत्र नहीं दिए गए।
कार्यशाला में डॉ. मनोज सुंद्रियाल, डॉ. दिनेश भट्ट, डॉ. वंदना डबराल, डॉ. देवेंद्र फर्स्वाण, डॉ. राजेंद्र नेगी, सुनील बलूनी और अरविंद रावत मौजूद थे। संचालन नयन कोठियाल और प्रिया अधिकारी ने किया।