{"_id":"5a048a9d4f1c1b9e678ba854","slug":"151024716710-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध, बावजूद बाहर से मंगाया गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध, बावजूद बाहर से मंगाया गया
Updated Thu, 09 Nov 2017 10:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। अस्पताल में इंजेक्शन होने के बावजूद प्रसूता के लिए बाहर से इंजेक्शन मंगाया गया जिसके चलते समय पर इंजेक्शन नहीं लगने से प्रसूता की मौत हो गई। विभागीय जांच में इसका खुलासा हुआ है। अस्पताल में प्रसव के बाद हुई प्रसूता की मौत की जांच रिपोर्ट विभाग ने 37 दिन बाद उसके परिजनों को दे दी। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य महानिदेशक को भी भेजी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 3 अक्तूबर को प्रसूता के लिए डोपमिन इंजेक्शन बाहर से मंगाया गया, जबकि अस्पताल में यह इंजेक्शन उपलब्ध था, लेकिन इंजेक्शन समय पर नहीं लगने से महिला की मौत हो गई। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिला चिकित्सक नहीं होने की जानकारी देने के बावजूद महिला के परिजनों ने खुद की जिम्मेदारी पर उसे अस्पताल में भर्ती करवाया।
दो अक्तूबर को ग्वाड़ गांव की गर्भवती लक्ष्मी देवी को सीएचसी कर्णप्रयाग में भर्ती कराया गया था। तीन अक्तूबर की शाम को प्रसव के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी तो अस्पताल कर्मियों ने डोपमिन इंजेक्शन मंगाया। महिला का पति जब तक इंजेक्शन लेकर आया तब तक प्रसूता की जान चली गई। ग्रामीणों की मांग पर सीएमओ डॉ. भागीरथी जंगपांगी ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मयंक बडोला, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सर्जन डॉ. केपी सिंह, जिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी डिमरी को शामिल करते हुए जांच कमेटी बनाई। एक माह बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार संघर्ष समिति का गठन कर दो नवंबर से डॉक्टरों की तैनाती, प्रसूता की मौत की जांच सार्वजनिक करने और मुआवजा देने सहित ट्रॉमा सेंटर को शुरू कराने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन शुरू किया।
विज्ञापन
विभागीय अधिकारी ने बृहस्पतिवार को जांच रिपोर्ट अनशनकारी समिति और परिजनों को सौंपी। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन अक्तूबर को अस्पताल की दवा स्टॉक पंजिका में एक इंजेक्शन डोपमिन का था। प्रसूता के पति मनवर सिंह का कहना है कि यदि अस्पताल से समय पर इंजेक्शन मिल जाता तो उसकी पत्नी की जान बच जाती। वहीं सीएमओ डा. भागीरथी जंगपांगी ने बताया कि जांच रिपोर्ट को महानिदेशक के लिए प्रेषित किया गया है। अग्रिम निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इंसेट
अनशन रहा जारी, पूर्व विधायक ने भी दिया धरना
कर्णप्रयाग/नारायणबगड़। डॉक्टरों की मांग सहित अन्य मांगों को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार समिति का क्रमिक अनशन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। इस दौरान पूर्व विधायक डॉ. एपी मैखुरी ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए धरना दिया। अनशन पर बैठने वालों में वीरेंद्र मिंगवाल, बीपी थपलियाल, गोविंद सिंह, वीरेंद्र सिंह, मनोरमा देवली, अनीता नेगी, हरीश सती, देवराज रावत, महेश खंडूड़ी आदि शामिल थे। दूसरी ओर नारायणबगड़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कर्णप्रयाग के आंदोलन को समर्थन देते हुए अनशनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। मुकदमें वापस नहीं होने पर उग्र आंदोलन दिए जाने का ज्ञापन बीडीओ के माध्यम से जिलाधिकारी को दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 3 अक्तूबर को प्रसूता के लिए डोपमिन इंजेक्शन बाहर से मंगाया गया, जबकि अस्पताल में यह इंजेक्शन उपलब्ध था, लेकिन इंजेक्शन समय पर नहीं लगने से महिला की मौत हो गई। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिला चिकित्सक नहीं होने की जानकारी देने के बावजूद महिला के परिजनों ने खुद की जिम्मेदारी पर उसे अस्पताल में भर्ती करवाया।
विज्ञापन
दो अक्तूबर को ग्वाड़ गांव की गर्भवती लक्ष्मी देवी को सीएचसी कर्णप्रयाग में भर्ती कराया गया था। तीन अक्तूबर की शाम को प्रसव के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी तो अस्पताल कर्मियों ने डोपमिन इंजेक्शन मंगाया। महिला का पति जब तक इंजेक्शन लेकर आया तब तक प्रसूता की जान चली गई। ग्रामीणों की मांग पर सीएमओ डॉ. भागीरथी जंगपांगी ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मयंक बडोला, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सर्जन डॉ. केपी सिंह, जिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी डिमरी को शामिल करते हुए जांच कमेटी बनाई। एक माह बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार संघर्ष समिति का गठन कर दो नवंबर से डॉक्टरों की तैनाती, प्रसूता की मौत की जांच सार्वजनिक करने और मुआवजा देने सहित ट्रॉमा सेंटर को शुरू कराने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन शुरू किया।
विज्ञापन
विभागीय अधिकारी ने बृहस्पतिवार को जांच रिपोर्ट अनशनकारी समिति और परिजनों को सौंपी। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन अक्तूबर को अस्पताल की दवा स्टॉक पंजिका में एक इंजेक्शन डोपमिन का था। प्रसूता के पति मनवर सिंह का कहना है कि यदि अस्पताल से समय पर इंजेक्शन मिल जाता तो उसकी पत्नी की जान बच जाती। वहीं सीएमओ डा. भागीरथी जंगपांगी ने बताया कि जांच रिपोर्ट को महानिदेशक के लिए प्रेषित किया गया है। अग्रिम निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इंसेट
अनशन रहा जारी, पूर्व विधायक ने भी दिया धरना
कर्णप्रयाग/नारायणबगड़। डॉक्टरों की मांग सहित अन्य मांगों को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार समिति का क्रमिक अनशन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। इस दौरान पूर्व विधायक डॉ. एपी मैखुरी ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए धरना दिया। अनशन पर बैठने वालों में वीरेंद्र मिंगवाल, बीपी थपलियाल, गोविंद सिंह, वीरेंद्र सिंह, मनोरमा देवली, अनीता नेगी, हरीश सती, देवराज रावत, महेश खंडूड़ी आदि शामिल थे। दूसरी ओर नारायणबगड़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कर्णप्रयाग के आंदोलन को समर्थन देते हुए अनशनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। मुकदमें वापस नहीं होने पर उग्र आंदोलन दिए जाने का ज्ञापन बीडीओ के माध्यम से जिलाधिकारी को दिया गया है।