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कुंभनगरी की सुरक्षा में छेद ही छेद
Updated Mon, 06 Nov 2017 10:34 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मुंबई में यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े संदिग्ध आईएस आतंकी अबू जैद के निशाने पर हरिद्वार होने के सनसनीखेल खुलासे के बाद भी कुंभनगरी की सुरक्षा को लेकर पुलिस चेती नहीं है। हरकी पैड़ी पर सुरक्षा व्यवस्था जीरो थी तो वॉच टावर भी खाली पड़े थे। रेलवे स्टेशन पर मेटल डिटेक्टर गेट तक ही नहीं हैं। पुलिस कर्मी टाइम पास करने की शैली में ड्यूटी दे रहे हैं। कहीं डॉग स्कवॉयड और बम निरोधक दस्ता भी नहीं दिखाई दिया।
ये आलम तब है जब हरिद्वार को दहलाने की साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है, लेकिन पुलिस इस खुलासे से बिल्कुल ही बेखबर है। संडे को यूपी एटीएस को बड़ी कामयाबी तब मिली थी जब यूपी के ही आजमगढ़ के पश्चिमी छाऊ के रहने वाले संदिग्ध आतंकी अबू जैद की गिरफ्तारी हुई थी। आतंकी ने कबूला था कि उसके निशाने पर हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थल थे, जिन्हें दहलाने की साजिश रची जा रही थी। संडे को ये बड़ा खुलासा हो चुका था। सोमवार को जब अमर उजाला संवाददाता ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तब हकीकत सामने आई। दोपहर बारह बजे का सीन है। रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट पर मेटल डिटेक्टर गेट तक नहीं था जबकि पूर्व में यह व्यवस्था थी। उसी टाइम हावडा एक्सप्रेस पहुंची। जीआरपी आरपीएफ के जवान प्लेटफार्म नंबर एक पर थे। मगर वे डंडा लेकर केवल टहलने के अंदाज में दिखाई दिए। मुख्य गेट पर डटकर चेकिंग की जहमत नहीं उठाई। डॉग स्कवॉयड एवं बीडीएस भी नदारद था। ये तो हुई रेलवे स्टेशन की बात अब हरकी पैड़ी पहुंचने पर जब सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तब नतीजा शून्य रहा। हरकी पैडी चौकी पर एक कांस्टेबल मौजूद था। पर चौकी के सामने एंट्री प्वाइंट पर एक भी पुलिसकर्मी नहीं था। चेकिंग की बात छोड़ ही दीजिए। संजय पुल से सटे दो वॉच टावर खाली पड़े थे। अनजान चेहरे गंगा घाटों पर खिलौने, खाद्य सामग्री बेच रहे थे तो फोटोग्राफर भी बड़ी संख्या में यहां से वहां टहल रहे थे। हरकी पैडी से बिलकुल सटे नाई घाट पर दोपहिया वाहन लंबी लाइन के साथ पार्क हो रखे थे। हरकी पैडी पर चेकिंग नाम की कोई चीज ही नहीं थी। पुल भी आवाजाही के लिए खुले थे। न डॉग स्कवॉयड तो न बम निरोधक दस्ता कही दूर दूर तक दिखाई दिया।
सैकड़ों अनजान चेहरे बने बड़ा सवाल
हरकी पैडी, प्रमुख मंदिरों के इर्दगिर्द अनजान चेहरों का पूरा जमावडा लगा हुआ है। हरिद्वार-ऋषिकेश हाईवे से सटी सैकड़ों झुग्गियां सवाल खड़े करती है। इन झुग्गियों में रह रहे लोगों के बारे में कोई रिकार्ड पुलिस महकमे के पास नहीं है। न ही पुलिस इनके बारे में कुछ जानने का प्रयास करती है।
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भिखारियों से नहीं मिल पाई मुक्ति
हरकी पैड़ी पर भिखारियों की लंबी चौड़ी फौज है। भिखारियों से हरकी पैड़ी को आज तक मुक्ति नहीं मिल पाई है। भिखारियों का नकाब ओढ़े कई जरायम पेशेवर भी कुंभनगरी केा अपना अड्डा बनाए बैठे हैं। वे कई मादक पदार्थों की तस्करी हरकी पैड़ी के इर्द गिर्द ही करते हैं।
हरिद्वार।
मुंबई में यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े संदिग्ध आईएस आतंकी अबू जैद के निशाने पर हरिद्वार होने के सनसनीखेल खुलासे के बाद भी कुंभनगरी की सुरक्षा को लेकर पुलिस चेती नहीं है। हरकी पैड़ी पर सुरक्षा व्यवस्था जीरो थी तो वॉच टावर भी खाली पड़े थे। रेलवे स्टेशन पर मेटल डिटेक्टर गेट तक ही नहीं हैं। पुलिस कर्मी टाइम पास करने की शैली में ड्यूटी दे रहे हैं। कहीं डॉग स्कवॉयड और बम निरोधक दस्ता भी नहीं दिखाई दिया।
ये आलम तब है जब हरिद्वार को दहलाने की साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है, लेकिन पुलिस इस खुलासे से बिल्कुल ही बेखबर है। संडे को यूपी एटीएस को बड़ी कामयाबी तब मिली थी जब यूपी के ही आजमगढ़ के पश्चिमी छाऊ के रहने वाले संदिग्ध आतंकी अबू जैद की गिरफ्तारी हुई थी। आतंकी ने कबूला था कि उसके निशाने पर हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थल थे, जिन्हें दहलाने की साजिश रची जा रही थी। संडे को ये बड़ा खुलासा हो चुका था। सोमवार को जब अमर उजाला संवाददाता ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तब हकीकत सामने आई। दोपहर बारह बजे का सीन है। रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट पर मेटल डिटेक्टर गेट तक नहीं था जबकि पूर्व में यह व्यवस्था थी। उसी टाइम हावडा एक्सप्रेस पहुंची। जीआरपी आरपीएफ के जवान प्लेटफार्म नंबर एक पर थे। मगर वे डंडा लेकर केवल टहलने के अंदाज में दिखाई दिए। मुख्य गेट पर डटकर चेकिंग की जहमत नहीं उठाई। डॉग स्कवॉयड एवं बीडीएस भी नदारद था। ये तो हुई रेलवे स्टेशन की बात अब हरकी पैड़ी पहुंचने पर जब सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तब नतीजा शून्य रहा। हरकी पैडी चौकी पर एक कांस्टेबल मौजूद था। पर चौकी के सामने एंट्री प्वाइंट पर एक भी पुलिसकर्मी नहीं था। चेकिंग की बात छोड़ ही दीजिए। संजय पुल से सटे दो वॉच टावर खाली पड़े थे। अनजान चेहरे गंगा घाटों पर खिलौने, खाद्य सामग्री बेच रहे थे तो फोटोग्राफर भी बड़ी संख्या में यहां से वहां टहल रहे थे। हरकी पैडी से बिलकुल सटे नाई घाट पर दोपहिया वाहन लंबी लाइन के साथ पार्क हो रखे थे। हरकी पैडी पर चेकिंग नाम की कोई चीज ही नहीं थी। पुल भी आवाजाही के लिए खुले थे। न डॉग स्कवॉयड तो न बम निरोधक दस्ता कही दूर दूर तक दिखाई दिया।
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सैकड़ों अनजान चेहरे बने बड़ा सवाल
हरकी पैडी, प्रमुख मंदिरों के इर्दगिर्द अनजान चेहरों का पूरा जमावडा लगा हुआ है। हरिद्वार-ऋषिकेश हाईवे से सटी सैकड़ों झुग्गियां सवाल खड़े करती है। इन झुग्गियों में रह रहे लोगों के बारे में कोई रिकार्ड पुलिस महकमे के पास नहीं है। न ही पुलिस इनके बारे में कुछ जानने का प्रयास करती है।
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भिखारियों से नहीं मिल पाई मुक्ति
हरकी पैड़ी पर भिखारियों की लंबी चौड़ी फौज है। भिखारियों से हरकी पैड़ी को आज तक मुक्ति नहीं मिल पाई है। भिखारियों का नकाब ओढ़े कई जरायम पेशेवर भी कुंभनगरी केा अपना अड्डा बनाए बैठे हैं। वे कई मादक पदार्थों की तस्करी हरकी पैड़ी के इर्द गिर्द ही करते हैं।