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अब रहेगी छठ पूजा की धूम
Updated Sat, 21 Oct 2017 10:06 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पूर्वोत्तर भारत का प्रसिद्ध छठ पूजा महोत्सव अब करीब आ गया है। 26 अक्तूबर को मुख्य पर्व मनाया जाएगा। उससे पहले शोभायात्रा के साथ धर्मनगरी में पर्व की शुरुआत हो जाएगी। 27 अक्तूबर को सवेरे उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद चार दिवसीय समारोह का समापन होगा।
छठ पूजा अब पूरे भारत का पर्व बन चुकी है। यह पर्व हरिद्वार में भी कई वर्षों से बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। पूर्वांचल जन जागृति परिषद के अध्यक्ष ब्रह्मा शंकर चौबे ने बताया कि पर्व की शुरुआत शोभायात्रा से होगी। नगर के कई भागों से शोभायात्रा निकाली जाएगी। 24 अक्तूबर को नहाय खाय से महिलाएं यह पवित्र पर्व मनाना प्रारंभ कर देंगी। अगले दिन खरना पर्व मनाया जाएगा। 26 अक्तूबर को मुख्य पर्व मनेगा। इस दिन सजीधजी महिलाएं सूप और डाले के साथ विभिन्न प्रकार के पदार्थ लेकर गंगा तटों में पहुंचेंगी। हरकी पैड़ी पर भारी भीड़ जुटेगी। सायंकाल अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पर्व का यह अति विशिष्ठ दिन है। अगले दिन व्रतघारी महिलाएं सवेरे एक बार फिर से गंगा के तटों पर एकत्रित होकर पर्व का समापन करेंगी। इस दिन प्रात: काल उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। यह पर्व चार दिन चलता है। महिलाओं का व्रत काफी कठिन है। पर्व की तैयारी घर घर शुरू हो चुकी है।
इस बार दीपावली पर धर्मनगरी में प्रचुर संख्या में गंगा जल उपलब्ध होगा। पिछले कई वर्षों से छठ पूजा गंगा क्लोजर के दौरान होती आई है। कई बार पूर्वोत्तर समाज और सिंचाई विभाग के बीच जल छोड़ने को लेकर कहासुनी भी हुई। इस बार चूंकि गंगाजी नगर प्रवेश कर चुकी है ऐसे में पूर्वांचली समाज बेहद प्रसन्न है। बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा की तैयारियां की जा रही हैं। यह पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा।
हरिद्वार।
पूर्वोत्तर भारत का प्रसिद्ध छठ पूजा महोत्सव अब करीब आ गया है। 26 अक्तूबर को मुख्य पर्व मनाया जाएगा। उससे पहले शोभायात्रा के साथ धर्मनगरी में पर्व की शुरुआत हो जाएगी। 27 अक्तूबर को सवेरे उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद चार दिवसीय समारोह का समापन होगा।
छठ पूजा अब पूरे भारत का पर्व बन चुकी है। यह पर्व हरिद्वार में भी कई वर्षों से बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। पूर्वांचल जन जागृति परिषद के अध्यक्ष ब्रह्मा शंकर चौबे ने बताया कि पर्व की शुरुआत शोभायात्रा से होगी। नगर के कई भागों से शोभायात्रा निकाली जाएगी। 24 अक्तूबर को नहाय खाय से महिलाएं यह पवित्र पर्व मनाना प्रारंभ कर देंगी। अगले दिन खरना पर्व मनाया जाएगा। 26 अक्तूबर को मुख्य पर्व मनेगा। इस दिन सजीधजी महिलाएं सूप और डाले के साथ विभिन्न प्रकार के पदार्थ लेकर गंगा तटों में पहुंचेंगी। हरकी पैड़ी पर भारी भीड़ जुटेगी। सायंकाल अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पर्व का यह अति विशिष्ठ दिन है। अगले दिन व्रतघारी महिलाएं सवेरे एक बार फिर से गंगा के तटों पर एकत्रित होकर पर्व का समापन करेंगी। इस दिन प्रात: काल उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। यह पर्व चार दिन चलता है। महिलाओं का व्रत काफी कठिन है। पर्व की तैयारी घर घर शुरू हो चुकी है।
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इस बार दीपावली पर धर्मनगरी में प्रचुर संख्या में गंगा जल उपलब्ध होगा। पिछले कई वर्षों से छठ पूजा गंगा क्लोजर के दौरान होती आई है। कई बार पूर्वोत्तर समाज और सिंचाई विभाग के बीच जल छोड़ने को लेकर कहासुनी भी हुई। इस बार चूंकि गंगाजी नगर प्रवेश कर चुकी है ऐसे में पूर्वांचली समाज बेहद प्रसन्न है। बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा की तैयारियां की जा रही हैं। यह पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा।
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