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चमोली के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक लगा रहे सरकारों की साख पर बट्टा
Updated Thu, 12 Oct 2017 10:35 PM IST
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गोपेश्वर। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डा. स्वराज विद्वान की ओर से बृहस्पतिवार को योजनाओं की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में डीएम और एसपी नहीं पहुंचे। जिले के शीर्ष अधिकारियों के इस रवैये से क्षुब्ध हो डा. विद्वान बैठक छोड़कर बाहर आ गईं। फिर भाजपा नेताओं के पंद्रह मिनट तक मनाने के बाद ही वे दोबारा बैठक में पहुंची। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि वे अब तक देश के नौ राज्यों का दौरा कर चुकी हैं, लेकिन चमोली जिले के अफसरों जैसा हाल तो उन्होंने कहीं नहीं देखा। पूर्व सूचना होने के बावजूद बैठक की अनदेखी करना अत्यंत गंभीर मामला है। वे इस मामले को आयोग के स्तर से राज्य और केंद्र सरकार के सामने रखेंगी।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार की सदस्य डा. स्वराज विद्वान बृहस्पतिवार को जिले के दौरे पर पहुंची थीं। उन्होंने दोपहर एक बजे विकास भवन में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। बैठक में राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं की समीक्षा की जानी थी। अनुसूचित जाति छात्रावास का निरीक्षण करने के बाद डा. विद्वान दोपहर एक बजे विकास भवन पहुंची तो वहां सभागार में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी तो मौजूद थे, लेकिन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के बैठक में उपस्थित नहीं होने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की यही कार्यप्रणाली सरकारों की साख पर बट्टा लगाती है। बैठक में मौजूद मुख्य विकास अधिकारी विनोद गिरी से उन्होंने कहा कि जिले के दोनों शीर्ष अधिकारियों ने आयोग की अवहेलना की है, वे इस मामले को राज्य और केंद्र सरकार में उच्च स्तर पर उठाएंगी।
बैठक में उन्होंने अधिकारियों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए। समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने दशोली ब्लॉक के पगना गांव में वीरेंद्र लाल की हत्या के मामले में एसडीएम व समाज कल्याण अधिकारी को संयुक्त जांच टीम बनाकर पंद्रह दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही एससी एक्ट के तहत पीड़ित परिवार को साढ़े आठ लाख रुपये की धनराशि व तीन माह का राशन और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार की सदस्य डा. स्वराज विद्वान बृहस्पतिवार को जिले के दौरे पर पहुंची थीं। उन्होंने दोपहर एक बजे विकास भवन में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। बैठक में राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं की समीक्षा की जानी थी। अनुसूचित जाति छात्रावास का निरीक्षण करने के बाद डा. विद्वान दोपहर एक बजे विकास भवन पहुंची तो वहां सभागार में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी तो मौजूद थे, लेकिन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के बैठक में उपस्थित नहीं होने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की यही कार्यप्रणाली सरकारों की साख पर बट्टा लगाती है। बैठक में मौजूद मुख्य विकास अधिकारी विनोद गिरी से उन्होंने कहा कि जिले के दोनों शीर्ष अधिकारियों ने आयोग की अवहेलना की है, वे इस मामले को राज्य और केंद्र सरकार में उच्च स्तर पर उठाएंगी।
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बैठक में उन्होंने अधिकारियों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए। समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने दशोली ब्लॉक के पगना गांव में वीरेंद्र लाल की हत्या के मामले में एसडीएम व समाज कल्याण अधिकारी को संयुक्त जांच टीम बनाकर पंद्रह दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही एससी एक्ट के तहत पीड़ित परिवार को साढ़े आठ लाख रुपये की धनराशि व तीन माह का राशन और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही।
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