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सद्भावना के माहौल में यह जहर कैसा
Updated Sat, 07 Oct 2017 10:55 PM IST
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राजेश शर्मा
हरिद्वार।
कनखल भाईचारे की मिसाल रही है। यहां सद्भावना की मशाल सदा चलती रहती है। हाल ही में संपन्न हुई रामलीला में न केवल मुस्लिमों ने चंदा दिया था बल्कि जुलूस आदि की व्यवस्था में सक्रिय योगदान भी किया था। बावजूद इसके शुक्रवार शाम को हुई वारदात से हर कोई आहत है। सवाल उठ रहा है कि सद्भावना के इस माहौल में यह सांप्रदायिकता का जहर कैसा घोला गया है।
कनखल मठ मंदिरों की नगरी कही जाती है। यहां कुम्हारगढ़ा मोहल्ले में एक मजार भी है। यह मजार सद्भावना की बड़ी मिसाल है। यहां हर रोज हिंदू परिवार ही दीया जलाते हैं। कनखल में मुस्लिम परिवार निवास तो बहुत कम ही करते हैं लेकिन यहां कारोबार में उनका सक्रिय योगदान है। यहां मुस्लिम समुदाय की छोटी- बड़ी एक सौ से ज्यादा दुकानें हैं। आश्रमों में होने वाले भंडारों से लेकर अन्य आध्यात्मिक आयोजनों में मुस्लिम परिवार योगदान करते रहते हैं। कभी भी हिंदू- मुस्लिम एकता तार-तार नहीं हुई। पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रदीप चौधरी का कहना है कि कनखल की तो नस-नस में सांप्रदायिक सौहार्द बहता है। उनकी मानें तो कनखल का श्मशान घाट जिस जमीन पर बना है उसका कुछ हिस्सा मुस्लिम परिवारों का हुआ करता था। उसके मालिकों ने उसे श्मशान घाट बनाने के लिए दान दिया था। कनखल थाने के पास स्थित प्राइमरी स्कूल के पास भी मुस्लिम परिवारों के नाम हुआ करती थी जो बाद में ज्वालापुर जाकर बस गए। कनखल रामलीला समिति के सचिव प्रदीप गर्ग ने बताया कि हाल ही में हुई रामलीला में कई मुस्लिम दुकानदारों ने चंदा दिया था। पूर्व सभासद अशोक शर्मा ने कहा कि यह वारदात सोची समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को माहौल को सकारात्मक बनाना चाहिए।
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