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मानदेय न मिलने पर ओपीडी पर तालाबंदी कर भूख हड़ताल पर बैठे प्रशिक्षु
Updated Fri, 06 Oct 2017 11:07 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
दस महीने से मानदेय नहीं मिलने पर ऋषिकुल और गुरुकुल परिसर के स्ववित्त पोषित सीटों के एमडी प्रशिक्षुओं ने दस दिनों की हड़ताल के बाद अब क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। पहले दिन क्रमिक अनशन पर दो डाक्टर बैठे।
ऋषिकुल परिसर में भूख हड़ताल शुरू करते हुए छात्रों ने प्रेसवार्ता की। एमडी के प्रशिक्षु डा. प्रशांत मिन्हास ने बताया कि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के ऋषिकुल और गुरुकुल परिसर में एमडी की 17 स्ववित्त पोषित सीटों पर एडमिशन है। इन स्ववित्त पोषित सीटों के छात्रों की फीस अन्य सीटों पर प्रवेश पाए छात्रों की फीस 1.65 लाख के मुकाबले में 2.65 लाख रुपये है और प्रवेश विवरणिका में ऐसा कोई उल्लेख नहीं था कि उन्हें मानदेय नहीं मिलेगा। डा. प्रशांत मिन्हास ने बताया कि उत्तराखंड सरकार के नियमानुसार सभी पीजी प्रशिक्षुओं को मानदेय दिया जाता है। प्रवेश के समय भी बताया गया था कि उन्हें मानदेय मिलेगा और मानदेय का बांड भी भरवाया गया। सीसीआईएम के अनुसार भी 15 बिंदु के अनुसार मानदेय दिया जाना अनिवार्य है। एक जून 2017 को धरने के दौरान तत्कालीन कलसचिव प्रो. एके त्रिपाठी ने शासन को पत्र लिखने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि शासन के पास उनका मानदेय रोकने का कोई तर्क नहीं है। कुलपति से कई बार मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन नहीं मिल रहे। पहले दिन क्रमिक अनशन पर डा. मुकेश रानी और डा. लिंकन कुमार सेठी बैठे। इस मौके पर डा. विशाल गांधी, डा. इस्पिता पांडा, डा. निशात अफजल, चेतन मंगवाल, डा. इंद्रजीत कौर, डा. निधि सोनी, डा. स्वीटी राणा, डा. ज्योत्सना अवस्थी, डा. रौनक, डा. यशपाल, डा. प्रशांत, डा. भानुप्रिया कौशिक, डा. ऋतु गोठवाल, वैष्णो गुप्ता, डा. सीमा आदि शामिल हुए।
तालाबंदी से मरीज बिना जांच कराएं लौटे
हरिद्वार। मानदेय की मांग कर रहे एमडी प्रशिक्षुओं ने ऋषिकुल अस्पताल की ओपीडी पर तालाबंदी करते हुए इलाज की व्यवस्था ठप कर दी। मरीजों के पर्चे तक नहीं बन सके। दूर दराज से आए मरीजों को बिना मर्ज दिखाए लौटना पड़ा। बिजनौर से आईं राकेश एवं सुनीता ने बताया कि अस्पताल में दिखाने के लिए वह सुबह तड़के चले थे और यहां पर दस बजे पहुंच गए, लेकिन हड़ताल होने की बात कहते हुए ओपीडी बंद होना बताया। इससे बिना जांच कराए जाने को मजबूर है। ज्वालापुर, रोशनाबाद, बहादराबाद, पथरी आदि क्षेत्रों से आए मरीज भी परेशान रहे।
हरिद्वार।
दस महीने से मानदेय नहीं मिलने पर ऋषिकुल और गुरुकुल परिसर के स्ववित्त पोषित सीटों के एमडी प्रशिक्षुओं ने दस दिनों की हड़ताल के बाद अब क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। पहले दिन क्रमिक अनशन पर दो डाक्टर बैठे।
ऋषिकुल परिसर में भूख हड़ताल शुरू करते हुए छात्रों ने प्रेसवार्ता की। एमडी के प्रशिक्षु डा. प्रशांत मिन्हास ने बताया कि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के ऋषिकुल और गुरुकुल परिसर में एमडी की 17 स्ववित्त पोषित सीटों पर एडमिशन है। इन स्ववित्त पोषित सीटों के छात्रों की फीस अन्य सीटों पर प्रवेश पाए छात्रों की फीस 1.65 लाख के मुकाबले में 2.65 लाख रुपये है और प्रवेश विवरणिका में ऐसा कोई उल्लेख नहीं था कि उन्हें मानदेय नहीं मिलेगा। डा. प्रशांत मिन्हास ने बताया कि उत्तराखंड सरकार के नियमानुसार सभी पीजी प्रशिक्षुओं को मानदेय दिया जाता है। प्रवेश के समय भी बताया गया था कि उन्हें मानदेय मिलेगा और मानदेय का बांड भी भरवाया गया। सीसीआईएम के अनुसार भी 15 बिंदु के अनुसार मानदेय दिया जाना अनिवार्य है। एक जून 2017 को धरने के दौरान तत्कालीन कलसचिव प्रो. एके त्रिपाठी ने शासन को पत्र लिखने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि शासन के पास उनका मानदेय रोकने का कोई तर्क नहीं है। कुलपति से कई बार मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन नहीं मिल रहे। पहले दिन क्रमिक अनशन पर डा. मुकेश रानी और डा. लिंकन कुमार सेठी बैठे। इस मौके पर डा. विशाल गांधी, डा. इस्पिता पांडा, डा. निशात अफजल, चेतन मंगवाल, डा. इंद्रजीत कौर, डा. निधि सोनी, डा. स्वीटी राणा, डा. ज्योत्सना अवस्थी, डा. रौनक, डा. यशपाल, डा. प्रशांत, डा. भानुप्रिया कौशिक, डा. ऋतु गोठवाल, वैष्णो गुप्ता, डा. सीमा आदि शामिल हुए।
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तालाबंदी से मरीज बिना जांच कराएं लौटे
हरिद्वार। मानदेय की मांग कर रहे एमडी प्रशिक्षुओं ने ऋषिकुल अस्पताल की ओपीडी पर तालाबंदी करते हुए इलाज की व्यवस्था ठप कर दी। मरीजों के पर्चे तक नहीं बन सके। दूर दराज से आए मरीजों को बिना मर्ज दिखाए लौटना पड़ा। बिजनौर से आईं राकेश एवं सुनीता ने बताया कि अस्पताल में दिखाने के लिए वह सुबह तड़के चले थे और यहां पर दस बजे पहुंच गए, लेकिन हड़ताल होने की बात कहते हुए ओपीडी बंद होना बताया। इससे बिना जांच कराए जाने को मजबूर है। ज्वालापुर, रोशनाबाद, बहादराबाद, पथरी आदि क्षेत्रों से आए मरीज भी परेशान रहे।
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