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विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, बच्चे परेशान
Updated Thu, 05 Oct 2017 10:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
श्यामपुर।
सरकारी विद्यालय में सुविधाओं का आज भी टोटा है। स्थिति यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी सरकारी विद्यालयों में शौचालय तक की व्यवस्था नहीं हो पाई हैं। सरकार विद्यालयों में शौचालय, शुद्ध पेयजल और छात्रों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करने में असमर्थ नजर आ रही है।
श्यामपुर क्षेत्र के गैंडीखाता के गूर्जर बस्ती विद्यालय नंबर 3 में 110 से छात्र- छात्राएं पढ़ते है। जिनके अध्ययन के लिए मात्र दो कमरे ही है। मांग के बाद भी शिक्षा विभाग ने यहां अतिरिक्त कक्षा कक्ष बनाने कि जरूरत नहंी समझी है। वहीं स्वच्छत भारत कार्यक्रम के तहत शौचालय की भी व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में छात्र- छात्राओं को खुले मे शौच जाना पड़ता है। 2012 में बनाया गया शौचालय निप्रयोज्य हो गया है। बताते चलें कि 2012 में शुरू हुआ विद्यालय भवन का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका। पानी के लिए हैंडपंप पर हत्था नहीं होने से बच्चे जुगाड़ कर पानी का उपयोग कर रहे हैं। अभिभावक नूर भड़ाना, बाबू खटाना, गुलाम अली, मुस्तफा, शमशेर अली, रफी, शफी लोधा, युसुफ अली आदि का आरोप है कि बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में शिक्षा विभाग विफल नजर आ रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ब्रह्मपाल सैनी का कहना है कि शौचालय बनाने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र दिया गया है। जल्दी ही शिौचालय बना दिया जाएगा। अधूरे कार्य भी जल्द पूरे किए जाएंगे।
श्यामपुर।
सरकारी विद्यालय में सुविधाओं का आज भी टोटा है। स्थिति यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी सरकारी विद्यालयों में शौचालय तक की व्यवस्था नहीं हो पाई हैं। सरकार विद्यालयों में शौचालय, शुद्ध पेयजल और छात्रों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करने में असमर्थ नजर आ रही है।
श्यामपुर क्षेत्र के गैंडीखाता के गूर्जर बस्ती विद्यालय नंबर 3 में 110 से छात्र- छात्राएं पढ़ते है। जिनके अध्ययन के लिए मात्र दो कमरे ही है। मांग के बाद भी शिक्षा विभाग ने यहां अतिरिक्त कक्षा कक्ष बनाने कि जरूरत नहंी समझी है। वहीं स्वच्छत भारत कार्यक्रम के तहत शौचालय की भी व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में छात्र- छात्राओं को खुले मे शौच जाना पड़ता है। 2012 में बनाया गया शौचालय निप्रयोज्य हो गया है। बताते चलें कि 2012 में शुरू हुआ विद्यालय भवन का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका। पानी के लिए हैंडपंप पर हत्था नहीं होने से बच्चे जुगाड़ कर पानी का उपयोग कर रहे हैं। अभिभावक नूर भड़ाना, बाबू खटाना, गुलाम अली, मुस्तफा, शमशेर अली, रफी, शफी लोधा, युसुफ अली आदि का आरोप है कि बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में शिक्षा विभाग विफल नजर आ रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ब्रह्मपाल सैनी का कहना है कि शौचालय बनाने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र दिया गया है। जल्दी ही शिौचालय बना दिया जाएगा। अधूरे कार्य भी जल्द पूरे किए जाएंगे।
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