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तीन बार निकाली निविदा, दो बार हुआ शिलान्यास, फिर भी नहीं बना मोटर मार्ग
Updated Sat, 23 Sep 2017 11:05 PM IST
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कीर्तिनगर। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को सालों से इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को एक बार फिर स्थिति ऐसी आई, कि एक ग्रामीण का स्वास्थ्य बिगड़ा, तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ा। तेज बारिश में भीगते हुए ग्रामीण बीमार को डंडी -कंडी से सड़क तक लाए और फिर अस्पताल ले गए।
तीन बार निविदा और दो बार शिलान्यास किए जाने के बावजूद बीरखाल- राड़ागाड़ मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अगर मार्ग बन जाता तो डागर पट्टी का ग्वाड़ टोला क्षेत्र के पांच गांव के ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए 8 किमी का सफर तय नहीं करना पड़ता। गांव में किसी व्यक्ति के बीमार होने पर उसे अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसा ही वाकया राड़ागाड निवासी सुरेश सिंह (22 साल) के साथ हुआ। सुरेश पिछले कई दिनों से पेट दर्द की परेशान था। शनिवार को स्थिति खराब होने पर तेज बारिश में ही परिजन व ग्रामीण उसे डंडी के सहारे सड़क तक लाए। ग्रामीण सुरजन सिंह, रमेश सिंह व राजबीर सिंह ने बताया कि वह मरीज को लेकर सुबह 7 बजे घर से निकले थे और 11 बजे करीब सड़क तक पहुंचे। इसके बाद मरीज को वाहन से उपचार के लिए देहरादून भेजा गया। ग्रामीण प्रमोद ने बताया कि तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण उन्हें रास्ते में खासी परेशानी उठानी पड़ी। पैदल मार्ग कई जगहों पर बहुत ही तंग व क्षतिग्रस्त भी है। ऐसे में मरीज को डंडी में लाना कई बार खतरनाक साबित हो जाता है। कहना है कि उनके सामने यह स्थिति आती रहती है। कई बार गंभीर रूप से बीमार व चोटिल होने पर सड़क मार्ग का अभाव जान पर बन पड़ता है।
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मार्ग के लिए ग्रामीणों ने नहीं जलाए थे तीन दिन चूल्हें
कीर्तिनगर। मोटर मार्ग निमार्ण की मांग के लिए वर्ष 2014 में राड़ागाड, टोला, ग्वाड़, सेल और अखरवाड़ी के ग्रामीणों ने आंदोलन किया था। इस दौरान विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने तीन दिनों तक घरों में चूल्हें नहीं जलाए थे।
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तीन बार हो चुकी है टेंडर प्रक्रिया
कीर्तिनगर। विकासखंड कीर्तिनगर के टोला गांव को मोटर मार्ग से जोड़ने के लिए वर्ष 2005 में बीरखाल- राड़ागाड़ मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली थी। 2006 और 2016 में दो बार मार्ग का शिलान्यास हुआ। मार्ग से करीब 6 गांवों को सड़क सुविधा मिलनी थी, लेकिन कुछ गांवों में आपसी विवाद होने से विभाग ने 4 गांवों के लिए करीब साढे़ पांच किमी मार्ग की डीपीआर तैयार की। फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया।
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एक माह पूर्व इस मार्ग के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अन्य औपचारिकताएं भी पूरी की जा चुकी हैं। एक माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जीएस रावत, अधिशासी अभियंता, पीएमजीएसवाई
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तीन बार निविदा और दो बार शिलान्यास किए जाने के बावजूद बीरखाल- राड़ागाड़ मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अगर मार्ग बन जाता तो डागर पट्टी का ग्वाड़ टोला क्षेत्र के पांच गांव के ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए 8 किमी का सफर तय नहीं करना पड़ता। गांव में किसी व्यक्ति के बीमार होने पर उसे अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसा ही वाकया राड़ागाड निवासी सुरेश सिंह (22 साल) के साथ हुआ। सुरेश पिछले कई दिनों से पेट दर्द की परेशान था। शनिवार को स्थिति खराब होने पर तेज बारिश में ही परिजन व ग्रामीण उसे डंडी के सहारे सड़क तक लाए। ग्रामीण सुरजन सिंह, रमेश सिंह व राजबीर सिंह ने बताया कि वह मरीज को लेकर सुबह 7 बजे घर से निकले थे और 11 बजे करीब सड़क तक पहुंचे। इसके बाद मरीज को वाहन से उपचार के लिए देहरादून भेजा गया। ग्रामीण प्रमोद ने बताया कि तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण उन्हें रास्ते में खासी परेशानी उठानी पड़ी। पैदल मार्ग कई जगहों पर बहुत ही तंग व क्षतिग्रस्त भी है। ऐसे में मरीज को डंडी में लाना कई बार खतरनाक साबित हो जाता है। कहना है कि उनके सामने यह स्थिति आती रहती है। कई बार गंभीर रूप से बीमार व चोटिल होने पर सड़क मार्ग का अभाव जान पर बन पड़ता है।
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मार्ग के लिए ग्रामीणों ने नहीं जलाए थे तीन दिन चूल्हें
कीर्तिनगर। मोटर मार्ग निमार्ण की मांग के लिए वर्ष 2014 में राड़ागाड, टोला, ग्वाड़, सेल और अखरवाड़ी के ग्रामीणों ने आंदोलन किया था। इस दौरान विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने तीन दिनों तक घरों में चूल्हें नहीं जलाए थे।
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तीन बार हो चुकी है टेंडर प्रक्रिया
कीर्तिनगर। विकासखंड कीर्तिनगर के टोला गांव को मोटर मार्ग से जोड़ने के लिए वर्ष 2005 में बीरखाल- राड़ागाड़ मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली थी। 2006 और 2016 में दो बार मार्ग का शिलान्यास हुआ। मार्ग से करीब 6 गांवों को सड़क सुविधा मिलनी थी, लेकिन कुछ गांवों में आपसी विवाद होने से विभाग ने 4 गांवों के लिए करीब साढे़ पांच किमी मार्ग की डीपीआर तैयार की। फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया।
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एक माह पूर्व इस मार्ग के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अन्य औपचारिकताएं भी पूरी की जा चुकी हैं। एक माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जीएस रावत, अधिशासी अभियंता, पीएमजीएसवाई