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एसआईटी के निशाने पर जनपद के 351 शिक्षक
Updated Tue, 19 Sep 2017 10:59 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जनपद के राजकीय, अशासकीय और शासकीय इंटर कालेजों के 351 से शिक्षक एसआईटी के निशाने पर हैं। जिनमें से 300 शिक्षक हाल में 2014 और 2016 में भर्ती हुए थे। इनके शैक्षिक दस्तावेज एसआईटी को उपलब्ध करा दिए गए हैं। इनके अलावा सन 2002 से पहले भर्ती हुए 51 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज मांगे जाने पर 12 को छोड़कर अन्य ने दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। 12 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज न तो किसी कार्यालय में है और न ही उनके स्कूलों में। जिस पर उन्हें नोटिस जारी करते हुए 27 सितंबर का समय दिया है। जिस पर दस्तावेज न उपलब्ध कराने पर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया जाएगा।
उत्तराखंड बोर्ड में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में शिक्षकों की भर्ती में धांधली बड़े स्तर पर सामने आ रही है। शिकायत पर एसआईटी ने जनपद में 2014 में भर्ती हुए 12 शिक्षकों के साथ 2016 के 288 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज उपलब्ध कराने को पिछले महीने विभाग को नोटिस जारी किया। जिसको गंभीरता से लेते हुए विभाग ने 300 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज एसआईटी को उपलब्ध करा दिए हैं। लेकिन इन भर्तियों से पहले 2002 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों में से 51 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज मांगे जाने पर विभाग मात्र 38 शिक्षकों के दस्तावेज उपलब्ध करा सका है, जबकि इनमें शेष 12 शिक्षकों के किसी भी प्रकार का कोई दस्तावेज न तो स्कूल में है और न ही किसी सरकारी कार्यालय में इनका रिकार्ड मिल सका है। इनमें से 2 शिक्षक जयपाल और हरपाल यादव पहले ही बर्खास्त किए जा चुके हैं, जबकि एक शिक्षक महीपाल लापता है। जिसकी जानकारी विभाग को नहीं मिल पा रही है। अब इन 12 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज न मिलने पर प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किया गया है। जिसमें सीधे-सीधे निर्देश जारी किया गया है कि यदि 27 सितंबर तक यह शिक्षक अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते है तो इन पर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया जाएगा।
बहादराबाद और लक्सर के हैं मामले
शिक्षक भर्ती में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते हुए भर्ती शिक्षक बहादराबाद और लक्सर ब्लाक के हैं। इन्हें भर्ती कराने वाला गैंग भी बहादराबाद ब्लाक का ही निवासी है और सभी पर कार्रवाई शंकर आश्रम में एक होटल में की गई। गैंग का संचालन कर्ता पहले ही नौकरी से बर्खास्त हो चुका है, जबकि कई वीआरएस ले चुके हैं। विभाग के अधिकारी कई बार दावा कर चुके थे कि इन्हें मिले सेेवाकाल के दौरान वेतनमान के साथ लाभों की रिकवरी की जाएगी, लेकिन अधिकारी ऐसा नहीं कर सके।
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वर्जन
एसआईटी से मांगे गए शिक्षकों के दस्तावेजों में केवल 12 के दस्तावेज नहीं मिल पाए हैं। इन शिक्षकों को नोटिस जारी करते हुए 27 सितंबर का समय दिया है। अब एसआईटी उपलब्ध कराए गए शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराएंगे। उनके द्वारा जो दिशा निर्देश मिलेंगे आगे की कार्रवाई उसी के अनुसार की जाएगी।
- ब्रह्मपाल सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक।
सीईओ को हटाने का नहीं मिला निर्देश
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने देहरादून में बैठक करते हुए जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी डा. आरडी शर्मा को हरिद्वार से हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन यहां ऐसा कोई निर्देश या आदेश नहीं पहुंचा है। सीईओ डा. आरडी शर्मा ने बताया कि एसआईटी के जांच के संबंध में उन्हें कोई दिशा निर्देश नहीं थे, तो उन पर कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं था। हालांकि उन पर क्या कार्रवाई हुई इस संबंध में कोई निर्देश उन्हें प्राप्त नहीं हुए हैं। अब बुधवार के अवकाश के बाद बृहस्पतिवार को वह ड्यूटी पर आएंगे।
हरिद्वार।
जनपद के राजकीय, अशासकीय और शासकीय इंटर कालेजों के 351 से शिक्षक एसआईटी के निशाने पर हैं। जिनमें से 300 शिक्षक हाल में 2014 और 2016 में भर्ती हुए थे। इनके शैक्षिक दस्तावेज एसआईटी को उपलब्ध करा दिए गए हैं। इनके अलावा सन 2002 से पहले भर्ती हुए 51 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज मांगे जाने पर 12 को छोड़कर अन्य ने दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। 12 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज न तो किसी कार्यालय में है और न ही उनके स्कूलों में। जिस पर उन्हें नोटिस जारी करते हुए 27 सितंबर का समय दिया है। जिस पर दस्तावेज न उपलब्ध कराने पर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया जाएगा।
उत्तराखंड बोर्ड में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में शिक्षकों की भर्ती में धांधली बड़े स्तर पर सामने आ रही है। शिकायत पर एसआईटी ने जनपद में 2014 में भर्ती हुए 12 शिक्षकों के साथ 2016 के 288 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज उपलब्ध कराने को पिछले महीने विभाग को नोटिस जारी किया। जिसको गंभीरता से लेते हुए विभाग ने 300 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज एसआईटी को उपलब्ध करा दिए हैं। लेकिन इन भर्तियों से पहले 2002 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों में से 51 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज मांगे जाने पर विभाग मात्र 38 शिक्षकों के दस्तावेज उपलब्ध करा सका है, जबकि इनमें शेष 12 शिक्षकों के किसी भी प्रकार का कोई दस्तावेज न तो स्कूल में है और न ही किसी सरकारी कार्यालय में इनका रिकार्ड मिल सका है। इनमें से 2 शिक्षक जयपाल और हरपाल यादव पहले ही बर्खास्त किए जा चुके हैं, जबकि एक शिक्षक महीपाल लापता है। जिसकी जानकारी विभाग को नहीं मिल पा रही है। अब इन 12 शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज न मिलने पर प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किया गया है। जिसमें सीधे-सीधे निर्देश जारी किया गया है कि यदि 27 सितंबर तक यह शिक्षक अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते है तो इन पर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया जाएगा।
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बहादराबाद और लक्सर के हैं मामले
शिक्षक भर्ती में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते हुए भर्ती शिक्षक बहादराबाद और लक्सर ब्लाक के हैं। इन्हें भर्ती कराने वाला गैंग भी बहादराबाद ब्लाक का ही निवासी है और सभी पर कार्रवाई शंकर आश्रम में एक होटल में की गई। गैंग का संचालन कर्ता पहले ही नौकरी से बर्खास्त हो चुका है, जबकि कई वीआरएस ले चुके हैं। विभाग के अधिकारी कई बार दावा कर चुके थे कि इन्हें मिले सेेवाकाल के दौरान वेतनमान के साथ लाभों की रिकवरी की जाएगी, लेकिन अधिकारी ऐसा नहीं कर सके।
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एसआईटी से मांगे गए शिक्षकों के दस्तावेजों में केवल 12 के दस्तावेज नहीं मिल पाए हैं। इन शिक्षकों को नोटिस जारी करते हुए 27 सितंबर का समय दिया है। अब एसआईटी उपलब्ध कराए गए शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराएंगे। उनके द्वारा जो दिशा निर्देश मिलेंगे आगे की कार्रवाई उसी के अनुसार की जाएगी।
- ब्रह्मपाल सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक।
सीईओ को हटाने का नहीं मिला निर्देश
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने देहरादून में बैठक करते हुए जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी डा. आरडी शर्मा को हरिद्वार से हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन यहां ऐसा कोई निर्देश या आदेश नहीं पहुंचा है। सीईओ डा. आरडी शर्मा ने बताया कि एसआईटी के जांच के संबंध में उन्हें कोई दिशा निर्देश नहीं थे, तो उन पर कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं था। हालांकि उन पर क्या कार्रवाई हुई इस संबंध में कोई निर्देश उन्हें प्राप्त नहीं हुए हैं। अब बुधवार के अवकाश के बाद बृहस्पतिवार को वह ड्यूटी पर आएंगे।