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...विष्णु घाट तक शताब्दियों से मौजूद नानकवाड़ा
Updated Wed, 13 Sep 2017 10:03 PM IST
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कौशल सिखौला
हरिद्वार।
हरकी पैड़ी पर ज्ञान गोदड़ी को लेकर काफी समय से सिख समाज आंदोलित है। जबकि हकीकत यह है कि असली ज्ञान गोदड़ी नानकबाड़ा नाम से आज भी हरिद्वार में मौजूद है। विष्णु घाट का नानकबाड़ा वह असली स्थल है, जहां गुरु नानक देव एक महीने तक ठहरे थे। उन्होंने स्वयं ज्ञान का पिटारा खोलकर इस स्थल पर ज्ञान का प्रकाश किया था। विश्व में इस ज्ञान गोदड़ी सहित ऐसे केवल तीन गुरु स्थान हैं, जहां नानकदेव की प्रतिमा विधि विधान से स्थापित की गई है। दूसरा स्थान गुरु महाराज के जन्मस्थल पाकिस्तान में रह गए नानकमत्ता तथा तीसरा स्थान नानकाना साहब में है।
सिखों के पहले गुरु नानकदेव का जन्म सन 1469 में नानकाना साहब (अब पाकिस्तान में)में हुआ था। गुरु महाराज 1507 में अपनी ज्ञान गोदड़ी लेकर प्रकाश करने हरिद्वार आए। तब उनकी आयु 38 वर्ष थी। उन्होंने हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान के बाद विष्णु घाट स्थित जिस भवन में एक महीने रहकर भक्तों के बीच ज्ञान का प्रकाश फैलाया, उसे तभी ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा कहा जाता है। इस भवन का नामकरण भी तब से नानकबाड़ा हो गया। यद्यपि वह कक्ष अब जीर्णशीर्ण है, जहां गुरु नानक देव ने गोष्ठियों के माध्यम से ज्ञान का आलोक फैलाया था। यही वह असली स्थल है जहां गुरुजी ने ज्ञान की गोदड़ी खोली। तब से इस स्थान का स्वामित्व उदासीन संप्रदाय के पास है। आज भी नानकबाड़ा उदासीन अखाड़े से जुड़ा है। इस स्थल पर गुुरुद्वारे की स्थापना करीब 300 वर्ष पहले की गई थी। विशेषता यह है कि इस स्थान पर भक्तों ने गुरु महाराज की प्रतिमा भी स्थापित की। बाद में दसवे गुरु गोविंद सिंह महाराज ने गुरु ग्रंथ साहब को ही गुरु मानने का आदेश दिया। तब से गुरु ग्रंथ साहब यहां विराजमान है, किंतु पाठ कभी-कभी किया जाता है। विश्व के तीन गुरुद्वारों को छोड़कर अन्यंत्र कहीं भी गुरु महाराज की प्रतिमा नहीं है।
इस स्थल का स्वामित्व उदासीन संप्रदाय के विवेकसर अखाड़े के पास है। इस अखाड़े का मुख्यालय अमृतसर में हैं। इस स्थल का स्वामित्व विवेक सर को श्रीमहंत गुुरुदेव मुनि संभालते हैं। वे प्राय: अमृतसर में रहते हैं और कभी-कभी हरिद्वार आते हैं। इस नानकबाड़े में गुरु पर्व पर यहां ग्रंथ साहब रखकर पाठ किया जाता है। नानकबाड़े के चारों ओर इस समय गृहस्थों का आवास है। यह आश्चर्य का विषय है कि जन्म साखी, गुरु वर्णन ग्रंथ तथा ग्रंथ साहब ने स्थान पाकर यह ज्ञान गोदड़ी वह सम्मान नहीं पा सकी जो गुरु महाराज से सीधे जुड़े इस स्थल को मिलना चाहिए था। कुछ संगठन पिछले वर्षों से हरकी पैड़ी पर ज्ञान गोदड़ी की मांग कर रहे हैं, किंतु जिस स्थान पर गुरु नानकदेव ने ज्ञान का प्रकाश किया उसे कोई देखने भी नहीं जाता।
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वैसाख मास में हरिद्वार आए थे गुरु नानकदेव
गुरु नानकदेव महाराज ज्ञान का प्रकाश फैलाते हुए 29 मार्च 1507 में हरिद्वार आए थे। उनका मुख्य उद्देश्य 13 अप्रैल को वैसाखी स्नान करना था। गुरु नानकदेव को हरकी पैड़ी पर स्नान करते हुए जब श्रद्धालुओं ने पश्चिम दिशा की ओर जल देते देखा तो सभी आश्चर्य चकित हो गए। उस समय सूर्योदय हो रहा था और सभी पंडित उगते सूर्य की ओर पूरब में मुख कर गंगाजल दे रहे थे। पश्चिम की ओर जलांजलि देते हुए जब पुरोहितों ने गुरु महाराज को देखा तो आश्चर्य से उनके पास पहुंचे। पूछने पर गुरु नानकदेव ने कहा कि वे पंजाब के अपने खेतों को जल दे रहे हैं। पुरोहितों के आश्चर्य व्यक्त करने पर गुरु महाराज ने कहा कि जब तुम्हारा जल सूरज तक पहुंच रहा है तो मेरा जल मेरे खेतों तक क्यों नहीं पहुंच सकता। इस पर पुरोहित निरुत्तर हो गए और सैकड़ों भक्तों के साथ पुरोहित भी विष्णु घाट के उस भवन तक पहुंच गए जहां गुरु महाराज ने ज्ञान की गोदड़ी खोली। प्रतिदिन गुरु नानकदेव वैदिक रहस्यों पर प्रकाश डालते थे।
ज्ञान गोदड़ी को भव्य बनाने का मन
विष्णुघाट स्थित नानकबाड़ा ज्ञान गोदड़ी हिंदुओं और सिखों सबका तीर्थ है। यह पवित्र भूमि है जहां गुरु महाराज ने अपने चरण रखे और ज्ञान फैलाया। इस स्थल को भव्य बनाने के लिए उदासीन संप्रदाय और उदासीन अखाड़ा लंबे समय से विचार कर रहा है। आने वाले कुछ समय में इस ऐतिहासिक स्थल को भव्य रूप दिया जाएगा। गंगा तट स्थित विष्णु घाट का यह पावन स्थल सबके के लिए पूज्य है। - श्रीमहंत गुरुदेव मुनि, प्रबंधक, नानकबाड़ा, विवेकसर अमृतसर।
हरिद्वार।
हरकी पैड़ी पर ज्ञान गोदड़ी को लेकर काफी समय से सिख समाज आंदोलित है। जबकि हकीकत यह है कि असली ज्ञान गोदड़ी नानकबाड़ा नाम से आज भी हरिद्वार में मौजूद है। विष्णु घाट का नानकबाड़ा वह असली स्थल है, जहां गुरु नानक देव एक महीने तक ठहरे थे। उन्होंने स्वयं ज्ञान का पिटारा खोलकर इस स्थल पर ज्ञान का प्रकाश किया था। विश्व में इस ज्ञान गोदड़ी सहित ऐसे केवल तीन गुरु स्थान हैं, जहां नानकदेव की प्रतिमा विधि विधान से स्थापित की गई है। दूसरा स्थान गुरु महाराज के जन्मस्थल पाकिस्तान में रह गए नानकमत्ता तथा तीसरा स्थान नानकाना साहब में है।
सिखों के पहले गुरु नानकदेव का जन्म सन 1469 में नानकाना साहब (अब पाकिस्तान में)में हुआ था। गुरु महाराज 1507 में अपनी ज्ञान गोदड़ी लेकर प्रकाश करने हरिद्वार आए। तब उनकी आयु 38 वर्ष थी। उन्होंने हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान के बाद विष्णु घाट स्थित जिस भवन में एक महीने रहकर भक्तों के बीच ज्ञान का प्रकाश फैलाया, उसे तभी ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा कहा जाता है। इस भवन का नामकरण भी तब से नानकबाड़ा हो गया। यद्यपि वह कक्ष अब जीर्णशीर्ण है, जहां गुरु नानक देव ने गोष्ठियों के माध्यम से ज्ञान का आलोक फैलाया था। यही वह असली स्थल है जहां गुरुजी ने ज्ञान की गोदड़ी खोली। तब से इस स्थान का स्वामित्व उदासीन संप्रदाय के पास है। आज भी नानकबाड़ा उदासीन अखाड़े से जुड़ा है। इस स्थल पर गुुरुद्वारे की स्थापना करीब 300 वर्ष पहले की गई थी। विशेषता यह है कि इस स्थान पर भक्तों ने गुरु महाराज की प्रतिमा भी स्थापित की। बाद में दसवे गुरु गोविंद सिंह महाराज ने गुरु ग्रंथ साहब को ही गुरु मानने का आदेश दिया। तब से गुरु ग्रंथ साहब यहां विराजमान है, किंतु पाठ कभी-कभी किया जाता है। विश्व के तीन गुरुद्वारों को छोड़कर अन्यंत्र कहीं भी गुरु महाराज की प्रतिमा नहीं है।
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इस स्थल का स्वामित्व उदासीन संप्रदाय के विवेकसर अखाड़े के पास है। इस अखाड़े का मुख्यालय अमृतसर में हैं। इस स्थल का स्वामित्व विवेक सर को श्रीमहंत गुुरुदेव मुनि संभालते हैं। वे प्राय: अमृतसर में रहते हैं और कभी-कभी हरिद्वार आते हैं। इस नानकबाड़े में गुरु पर्व पर यहां ग्रंथ साहब रखकर पाठ किया जाता है। नानकबाड़े के चारों ओर इस समय गृहस्थों का आवास है। यह आश्चर्य का विषय है कि जन्म साखी, गुरु वर्णन ग्रंथ तथा ग्रंथ साहब ने स्थान पाकर यह ज्ञान गोदड़ी वह सम्मान नहीं पा सकी जो गुरु महाराज से सीधे जुड़े इस स्थल को मिलना चाहिए था। कुछ संगठन पिछले वर्षों से हरकी पैड़ी पर ज्ञान गोदड़ी की मांग कर रहे हैं, किंतु जिस स्थान पर गुरु नानकदेव ने ज्ञान का प्रकाश किया उसे कोई देखने भी नहीं जाता।
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वैसाख मास में हरिद्वार आए थे गुरु नानकदेव
गुरु नानकदेव महाराज ज्ञान का प्रकाश फैलाते हुए 29 मार्च 1507 में हरिद्वार आए थे। उनका मुख्य उद्देश्य 13 अप्रैल को वैसाखी स्नान करना था। गुरु नानकदेव को हरकी पैड़ी पर स्नान करते हुए जब श्रद्धालुओं ने पश्चिम दिशा की ओर जल देते देखा तो सभी आश्चर्य चकित हो गए। उस समय सूर्योदय हो रहा था और सभी पंडित उगते सूर्य की ओर पूरब में मुख कर गंगाजल दे रहे थे। पश्चिम की ओर जलांजलि देते हुए जब पुरोहितों ने गुरु महाराज को देखा तो आश्चर्य से उनके पास पहुंचे। पूछने पर गुरु नानकदेव ने कहा कि वे पंजाब के अपने खेतों को जल दे रहे हैं। पुरोहितों के आश्चर्य व्यक्त करने पर गुरु महाराज ने कहा कि जब तुम्हारा जल सूरज तक पहुंच रहा है तो मेरा जल मेरे खेतों तक क्यों नहीं पहुंच सकता। इस पर पुरोहित निरुत्तर हो गए और सैकड़ों भक्तों के साथ पुरोहित भी विष्णु घाट के उस भवन तक पहुंच गए जहां गुरु महाराज ने ज्ञान की गोदड़ी खोली। प्रतिदिन गुरु नानकदेव वैदिक रहस्यों पर प्रकाश डालते थे।
ज्ञान गोदड़ी को भव्य बनाने का मन
विष्णुघाट स्थित नानकबाड़ा ज्ञान गोदड़ी हिंदुओं और सिखों सबका तीर्थ है। यह पवित्र भूमि है जहां गुरु महाराज ने अपने चरण रखे और ज्ञान फैलाया। इस स्थल को भव्य बनाने के लिए उदासीन संप्रदाय और उदासीन अखाड़ा लंबे समय से विचार कर रहा है। आने वाले कुछ समय में इस ऐतिहासिक स्थल को भव्य रूप दिया जाएगा। गंगा तट स्थित विष्णु घाट का यह पावन स्थल सबके के लिए पूज्य है। - श्रीमहंत गुरुदेव मुनि, प्रबंधक, नानकबाड़ा, विवेकसर अमृतसर।