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सरकारी अस्पताल में ऐंटी रैबीज इंजेक्शन का अभाव, लोग परेशान

Sun, 10 Sep 2017 12:35 AM IST
Updated Sun, 10 Sep 2017 12:35 AM IST
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सरकारी अस्पताल में ऐंटी रैबीज इंजेक्शन का अभाव, लोग परेशान
सीएम के निर्वाचन क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा
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-- सीएचसी डोईवाला में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं, बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं इंजेक्शन

अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) डोईवाला को निजी हाथों में सौंपने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। सरकार की ओर से बढ़िया स्वास्थ्य सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे थे, लेकिन कुत्ता यदि किसी को काट रहा है तो स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रैबीज इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरन लोगों को प्राइवेट अस्पतालों से जेब ढीली करके इंजेक्शन खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्वास्थ्य केंद्र में पिछले दो महीनों से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। यह हाल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्वाचन क्षेत्र का है, जिसे मॉर्डन बनाने के लिए कहा जा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन पांच से आठ मरीज कुत्ते व बंदरों के काटने के पहुंच रहे हैं। लेकिन इलाज के लिए जब वह अस्पताल पहुंच रहे हैं तो मरीजों को बाहर से इंजेक्शन लाने को कहा जा रहा है। अस्पताल में यह इंजेक्शन निशुल्क लगाए जाते हैं जबकि बाहर से मरीजों को 325 रुपये का प्रति इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है। जबकि यदि कुत्ता या बंदर के काटने के बाद यदि समय पर इलाज शुरू नहीं किया तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इससे रेबीज का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है।
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कुत्ते के काटने पर टीका लगवाना जरूरी
- कुत्ते के काटते ही तुरंत छह से आठ घंटे या अधिक से अधिक 24 घंटों में एंटी बॉयोटिक का टीका लगवाएं।
- 3,5 या 7 इंजेक्शन लगवाएं।
- यदि कुत्ता काटने के 10 दिन के बाद तक भी स्वस्थ है तो सावधानी के लिए तीन इंजेक्शन ही पर्याप्त हैं।
- निश्चित रूप से रैबिज कुत्ते ने काटा हो तो एंटीबॉडिज की अतिरिक्त चिकित्सा लेनी चाहिए।
कुत्ते के काटने के बाद सावधानियां
- जितना हो सके घाव को गुनगुने पानी से धोना चाहिए
- घाव को कभी ढकें नहीं। इसकी पट्टी न करें और टांके न लगवाएं।
- नजदीकी दवाखाने में या सरकारी अस्पताल में जाएं जहां एआरवी उपलब्ध होती हैं।
- कुत्ता या पशु का निरीक्षण 10 दिन तक करें।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग
तेलीवाला निवासी जाहिद अंजुम ने कहा कि 24 घंटे अस्पताल में उपलब्ध होने वाला रैबीज का इंजेक्शन दो माह से उपलब्ध नहीं होना निंदनीय है। इससे विभाग की लचर कार्यशैली का पता चलता है।
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युकां प्रदेश सचिव विक्रम सिंह नेगी ने कहा कि सरकार अस्पताल के प्रति उदासीन रुख अपना रही है। महज घोषणाएं कर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का भरोसा दिया जा रहा है। कहा कि यदि जल्द एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नही हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

कोट्स
अस्पताल की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को रैबीज इंजेक्शन की मांग भेजी जा चुकी है। समस्या के दृष्टिगत जल्द इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। उम्मीद है कि शीघ्र इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध हो जाएंगे।
- डा. आरएस पाल, चिकित्सा अधीक्षक , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोईवाला।
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