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शोभायात्रा के बाद लावारिश अस्थियां गंगा में प्रवाहित
Updated Sat, 09 Sep 2017 10:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्री देवोत्थान सेवा समिति की ओर से देश के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित कर लाई गई 5450 लावारिस लोगों की अस्थियों के कलश शनिवार को भव्य शोभायात्रा के बाद कनखल स्थित सतीघट पर गंगा में विसर्जित कर दी गई।
अस्थि कलश विसर्जन यात्रा सुबह निष्काम सेवा ट्रस्ट भूपतवाला से शुरू होकर भूपतवाला, भीमगौड़ा,हरकी पौड़ी अपर रोड, तुलसी चौक से होते हुए बंगाली मोड़, चौक बाजार कनखल से सतीघाट पहुंची। जहां पं. जितेंद्र शास्त्री ने विधि विधान से लावारिस अस्थियों को मां गंगा में विसर्जित कराया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने कहा कि अस्थि कलश विसर्जन यात्रा का उद्देश्य युवा पीढ़ी में संस्कारों और पुरातन संस्कृति से अभाव हो गया है। सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं को पूरा करने के लिए उनके पास समय नहीं है। युवा पीढ़ी की इस उदासीनता से ही उनके पूर्वजों की अस्थियां लावारिस अवस्था में वर्षों से शमशान घाटों में पड़ी थी।
कालिका पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने कहा कि राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों को उद्धार के लिए कठोर तप किया था। लेकिन देवोत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र लावारिस हुतात्माओं की मोक्ष प्राप्ति के लिए लगातार 16 सालों से प्रयास कर रहे हैं। श्रद्धांजलि सभा में धर्मयात्रा महासंघ के प्रांतीय संरक्षक रविंद्र गोयल, कार्याध्यक्ष काशीनाथ, महामंत्री अशोक अग्रवाल, जानकी प्रसाद, सतेंद्र चैधरी, स्वामी कृष्णानंद, स्वामी रामस्वरूप, सांसद प्रतिनिधि प्रमोद शर्मा, पं लवनाथ आचार्य, शिवकुमार पालीवाल, नीरज गुप्ता, रामकृष्ण लोहिया, हरिओम अनेजा, डा. प्रमोद जोशी, सुषमा मिश्र आदि मौजूद रहें। सभा का संचालन डा. रजनीकांत शुक्ला ने किया।
हरिद्वार।
श्री देवोत्थान सेवा समिति की ओर से देश के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित कर लाई गई 5450 लावारिस लोगों की अस्थियों के कलश शनिवार को भव्य शोभायात्रा के बाद कनखल स्थित सतीघट पर गंगा में विसर्जित कर दी गई।
अस्थि कलश विसर्जन यात्रा सुबह निष्काम सेवा ट्रस्ट भूपतवाला से शुरू होकर भूपतवाला, भीमगौड़ा,हरकी पौड़ी अपर रोड, तुलसी चौक से होते हुए बंगाली मोड़, चौक बाजार कनखल से सतीघाट पहुंची। जहां पं. जितेंद्र शास्त्री ने विधि विधान से लावारिस अस्थियों को मां गंगा में विसर्जित कराया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने कहा कि अस्थि कलश विसर्जन यात्रा का उद्देश्य युवा पीढ़ी में संस्कारों और पुरातन संस्कृति से अभाव हो गया है। सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं को पूरा करने के लिए उनके पास समय नहीं है। युवा पीढ़ी की इस उदासीनता से ही उनके पूर्वजों की अस्थियां लावारिस अवस्था में वर्षों से शमशान घाटों में पड़ी थी।
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कालिका पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने कहा कि राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों को उद्धार के लिए कठोर तप किया था। लेकिन देवोत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र लावारिस हुतात्माओं की मोक्ष प्राप्ति के लिए लगातार 16 सालों से प्रयास कर रहे हैं। श्रद्धांजलि सभा में धर्मयात्रा महासंघ के प्रांतीय संरक्षक रविंद्र गोयल, कार्याध्यक्ष काशीनाथ, महामंत्री अशोक अग्रवाल, जानकी प्रसाद, सतेंद्र चैधरी, स्वामी कृष्णानंद, स्वामी रामस्वरूप, सांसद प्रतिनिधि प्रमोद शर्मा, पं लवनाथ आचार्य, शिवकुमार पालीवाल, नीरज गुप्ता, रामकृष्ण लोहिया, हरिओम अनेजा, डा. प्रमोद जोशी, सुषमा मिश्र आदि मौजूद रहें। सभा का संचालन डा. रजनीकांत शुक्ला ने किया।
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