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पहली बार टर्फ मैदान में खेले चमोली के हाकी खिलाड़ी, राज्य में पाया तीसरा स्थान
Updated Tue, 05 Sep 2017 10:44 PM IST
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गोपेश्वर। चमोली जिले की विद्यालयी हाकी टीम देहरादून में नेहरू कप के लिए पहली बार टर्फ मैदान (हरा घास युक्त मैदान) में खेली और राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त किया। टीम ने दिखा दिया कि मौका मिले ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी किसी से कम नहीं हैं। हाकी टीम जब गोपेश्वर विद्यालय पहुंची तो विद्यालय प्रबंधन ने टीम का फूल-मालाओं से स्वागत किया।
एक सितंबर को गोपेश्वर से टीम प्रभारी विनोद रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड पब्लिक स्कूल गोपेश्वर की हाकी टीम देहरादून के लिए रवाना हुई थी। नेहरू कप के लिए आयोजित राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता के लिए टीम में ग्यारह छात्र आठवीं के मयंक भंडारी, विष्णु, तरुण, आशीष पुरोहित, प्रभाकरन, रोहित, अरुण दीक्षित, अनूप, शिवांश, गौरव और अभिषेक शामिल हुए। दो व तीन सितंबर को देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के टर्फ मैदान में हाकी की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हुई और चमोली की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। हाकी खिलाड़ी अरुण दीक्षित और अनूप का कहना है कि टर्फ मैदान में खेलने का यह पहला अवसर मिला है। पहले थोड़ा असहज थे लेकिन कुछ ही देर में टर्फ मैदान में अच्छा प्रदर्शन कर गए। पर्वतीय क्षेत्रों में भी ऐसे मैदान विकसित करने चाहिए। कहा कि गोपेश्वर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम बदहाली की मार झेल रहा है, जबकि अन्य जगहों पर स्थित खेल मैदान भी बदहाल हैं। अभिषेक ने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में एक सुविधा संपन्न खेल मैदान होना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं निखर सकें।
चंदा इकट्टा कर आने-जाने की व्यवस्था की
गोपेश्वर। सरकारों की ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने की बातें सिर्फ मंचों तक सीमित रहती हैं। हाकी खेलने के लिए जो टीम देहरादून भेजी गईं, उनके अभिभावकों ने स्वयं चंदा इकट्ठा कर टीम को आने-जाने और खाने का खर्चा दिया। ऐसे में कई गरीब तबके के छात्र-छात्राएं उच्च स्तर पर खेल मैदानों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने से रह जाते हैं।
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कोट
विद्यालयों में खेल प्रतिभाओं को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने का पूरा मौका दिया जा रहा है। खेल आयोजन के दौरान खिलाड़ियों को आने-जाने व रहने की व्यवस्था को लेकर शिक्षा महकमे से बात की जाएगी। खेल व खिलाड़ियों को सरकार पूरा प्रोत्साहन दे रही है। - अरविंद पांडे, खेल मंत्री, उत्तराखंड शासन।
जिले में शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन प्रतियोगिता के लिए ही हमारे पास सीमित पैसा रहता है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए कोई बजट नहीं मिलता है। - ललित मोहन चमोला, सीईओ, चमोली।
एक सितंबर को गोपेश्वर से टीम प्रभारी विनोद रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड पब्लिक स्कूल गोपेश्वर की हाकी टीम देहरादून के लिए रवाना हुई थी। नेहरू कप के लिए आयोजित राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता के लिए टीम में ग्यारह छात्र आठवीं के मयंक भंडारी, विष्णु, तरुण, आशीष पुरोहित, प्रभाकरन, रोहित, अरुण दीक्षित, अनूप, शिवांश, गौरव और अभिषेक शामिल हुए। दो व तीन सितंबर को देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के टर्फ मैदान में हाकी की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हुई और चमोली की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। हाकी खिलाड़ी अरुण दीक्षित और अनूप का कहना है कि टर्फ मैदान में खेलने का यह पहला अवसर मिला है। पहले थोड़ा असहज थे लेकिन कुछ ही देर में टर्फ मैदान में अच्छा प्रदर्शन कर गए। पर्वतीय क्षेत्रों में भी ऐसे मैदान विकसित करने चाहिए। कहा कि गोपेश्वर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम बदहाली की मार झेल रहा है, जबकि अन्य जगहों पर स्थित खेल मैदान भी बदहाल हैं। अभिषेक ने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में एक सुविधा संपन्न खेल मैदान होना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं निखर सकें।
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चंदा इकट्टा कर आने-जाने की व्यवस्था की
गोपेश्वर। सरकारों की ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने की बातें सिर्फ मंचों तक सीमित रहती हैं। हाकी खेलने के लिए जो टीम देहरादून भेजी गईं, उनके अभिभावकों ने स्वयं चंदा इकट्ठा कर टीम को आने-जाने और खाने का खर्चा दिया। ऐसे में कई गरीब तबके के छात्र-छात्राएं उच्च स्तर पर खेल मैदानों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने से रह जाते हैं।
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विद्यालयों में खेल प्रतिभाओं को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने का पूरा मौका दिया जा रहा है। खेल आयोजन के दौरान खिलाड़ियों को आने-जाने व रहने की व्यवस्था को लेकर शिक्षा महकमे से बात की जाएगी। खेल व खिलाड़ियों को सरकार पूरा प्रोत्साहन दे रही है। - अरविंद पांडे, खेल मंत्री, उत्तराखंड शासन।
जिले में शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन प्रतियोगिता के लिए ही हमारे पास सीमित पैसा रहता है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए कोई बजट नहीं मिलता है। - ललित मोहन चमोला, सीईओ, चमोली।