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इन स्कूलों में पढ़कर कैसे बनेंगे कलेक्टर और जज

Mon, 28 Aug 2017 09:59 PM IST
Updated Mon, 28 Aug 2017 09:59 PM IST
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इन स्कूलों में पढ़कर कैसे बनेंगे कलेक्टर और जज

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जो विद्यालय डीएम दीपक रावत ने गोद लिया हुआ है, उसकी तस्वीर कुछ ऐसी है। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ा हुआ, चार से छह इंच तक की दीवार, खिड़कियों में सरिया तक नहीं, दीवार में पीपल का पेड़ उगा हुआ। परिसर में उगी घास और जंगली बेल। कक्षाओं का उखड़ा हुआ फर्श, गंदगी, एक कोने में एकत्रित कूड़ा। पानी के पीने की उचित व्यवस्था नहीं। बोर्ड पर लंबे समय से कुछ लिखा नहीं गया। शिक्षक भी अपने कार्यों में व्यस्त। यह हालत है टिबड़ी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर 25 की। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़कर बच्चे कैसे कलेक्टर और जज बन सकेंगे, इस सवाल का उत्तर किसी के पास नहीं है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर 25 टिबड़ी में बच्चों की संख्या अच्छी खासी है। दो शिक्षक भी हैं। लेकिन वहां पढ़ाई नहीं हो रही थी। कक्षा चार की दीवारों का प्लास्टर और फर्श जगह-जगह उखड़ा हुआ है। चारों कोनों में कूड़ा पड़ा है। कक्षा में शिक्षक भी नहीं। बच्चों से शिक्षक के बारे में पूछा तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए। यही हालात परिसर का भी है। विद्यालय भवन की दीवार पर पीपल का पेड़ उगा होने से पूरी दीवार दो भागों में बंटी हुई थी। विद्यालय के प्रभारी रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि विद्यालय की स्थिति से अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। यह विद्यालय जिलाधिकारी दीपक रावत ने भी गोद लिया हुआ है। सुधार की उम्मीद है।
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वर्जन
विद्यालय में शीघ्र निरीक्षण किया जाएगा और जरूरी सुधार के लिए निदेशालय से बजट की मांग की जाएगी। विद्यालय में साफ सफाई नहीं होने और शिक्षक के नहीं पढ़ाने पर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।- ब्रह्मपाल सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक।
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शाम होते ही मधुशाला बन जाती है पाठशला
सुबह को बच्चों से कराई जाती है बोतल एवं खाने की झूठन की सफाई
आसपास के लोग शौचालय भी कर जाते है विद्यालय परिसर में
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
टिबड़ी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक पाठशाला परिसर शाम होते ही मधुशाना बन जाती है। आसपास के असामाजिक तत्वों ने विद्यालय परिसर को सट्टा और शराब पीने का अड्डा बनाया हुआ है। इन शराब की बोतलों को सुबह छात्र-छात्राएं साफ करती हैं, लेकिन लोग हैं कि उन्हें गंदगी फैलाने में शर्म नहीं आती है। प्रधानाध्यापक की मानें तो पार्षद समेत अन्य लोगों से शिकायत के बाद भी कोई असर नहीं है।
हरिद्वार शहर के बीचोंबीच रिहायशी इलाके से टिबड़ी कालोनी है। टिबड़ी में शिक्षा के लिए एक ही परिसर में राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर 25 और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय है। इन दोनों का रास्ता एक ही है, लेकिन अंदर दोनों की बाउंड्री अलग-अलग है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का परिसर हरा भरा है, लेकिन असामाजिक लोगों ने इसे शराब पीने और सट्टा खेलने का अड्डा बनाया हुआ है। शाम को यहां सजी शराब की महफिल की बदबू सुबह तक परिसर में रहती है। सुबह स्कूल पहुंचे छात्र-छात्राएं इन बोतलों, गिलासों, सिगरेट के पैकेटों, नमकीन के पैकेट, खाने की प्लेट, मांस से निकली हड्ड़ियों की सफाई करते हैं। इन बोटियों पर आवारा कुत्ते भी स्कूल परिसर में मंडराते रहते हैं, जिन्हें देखकर बच्चों के साथ स्टाफ की भी रूह कांप जाती हैं।


असामाजिक तत्वों ने विद्यालय का गेट तोड़ रखा है। परिसर में कुछ लोग शराब पीकर बोतल फेंकने के साथ झूठन भी यहीं पर फेंक जाते हैं। पार्षद और विधायक के साथ पुलिस से भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से शराबियों के हौसले बुलंद हैं।

- दीपा रानी, प्रधानाध्यायक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय।


नगरीय विद्यालयों की मरम्मत आदि सुधार कार्यों के लिए बजट नहीं मिलता। इससे विद्यालयों की हालत बदतर होती जा रहीं हैं। पिछले महीने सिटी मजिस्ट्रेट से भी निरीक्षण कराया था, लेकिन कोई असर नहीं। टिबड़ी स्थित विद्यालय के संबंध में रानीपुर कोतवाली में तहरीर देंगे, साथ ही गेट की मरम्मत कराई जाएगी।
डा. आरडी शर्मा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी।
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