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अब प्रेमपाल की आंखों से देखेंगे दो दृष्टिहीन
Updated Sat, 19 Aug 2017 11:03 PM IST
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हरिद्वार। प्रेमपाल चौहान भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों की बदौलत दो दृष्टिहीन इस दुनिया को देख सकेंगे। मृत्यु उपरांत उनके परिजनों ने हरिद्वार में ही उनका नेत्रदान करा दिया।
प्रेमपाल देहरादून के रहने वाले हैं और ज्वालापुर निवासी भांजे जगदीश लूथरा के घर आए थे। वे स्नान के लिए ऋषिकुल घाट गए, जहां पैर फिसलने से वह गंगा के तेज बहाव में बह गए। घाट पर स्नान कर रहे कुछ युवकों ने उन्हें बाहर निकाला और उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए। डाक्टरों ने जांच कर उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह सूचना जगदीश लूथरा को मिली तो पूरा परिवार स्तंभ रह गया। प्रेमपाल के पुत्र अमित चौहान तत्काल हरिद्वार पहुंचे और नेत्रदान अभियान में लगे कार्यकर्ता रामशरण चावला की प्रेरणा पर उन्होंने अपने पिता का नेत्रदान कर दिया। इसके लिए जौलीग्रांट की टीम डाक्टर हेनव ढिल्लो, अशोक कालरा, सुरेंद्र भंडारी आदि के साथ पहुंचे और दोनों नेत्र सकुशल प्राप्त कर लिए। प्रत्यारोपण के लिए नेत्रों को जौलीग्रांट ले जाया गया। रामशरण चावला और उनकी टीम का नेत्रदान कराने के लिए यह 137 वां प्रयास था। अब तक उनके द्वारा कराए गए नेत्रदान से 274 व्यक्ति फिर से दृष्टि का उपहार प्राप्त कर चुके हैं।
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