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विस अध्यक्ष के खिलाफ तहरीर

Thu, 17 Aug 2017 10:07 PM IST
Updated Thu, 17 Aug 2017 10:07 PM IST
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विस अध्यक्ष के खिलाफ तहरीर

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
यहां हुई अग्रवाल सम्मेलन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में आरक्षण को लेकर विभानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल के बयान का विरोध शुरू हो गया है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ नगर कोतवाली में तहरीर देने के साथ ही राज्यपाल को पत्र भेजकर एफआईआर करने की अनुमति देने की मांग की है।
12 और 13 अगस्त को जयराम आश्रम में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की कार्यसमिति की बैठक के समापन सत्र के विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने आरक्षण को लेकर टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप में एससी, एसटी और ओबीसी को संवैधानिक रूप से मिलने वाले जाति आधारित आरक्षण का विरोध किया है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने बृहस्पतिवार को शहर कोतवाली प्रभारी चंद्रभान सिंह अधिकारी को विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल के खिलाफ तहरीर दी है। समिति ने तहरीर में बताया कि अग्रवाल ने विधानसभा अध्यक्ष की संवैधानिक परंपराओं का उल्लंघन किया है। समिति ने अध्यक्ष के खिलाफ एससी, एसटी को प्रताड़ित करने, संविधान का उल्लंघन एवं पद का दुरुपयोग करने के संबंध में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। समिति के संयोजक भानपाल सिंह रवि ने राज्यपाल को पत्र भेजकर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। शिकायत देने वालों में मेहर सिंह, रूपचंद आजाद, सीपी सिंह, कुलदीप सिंह, कृष्ण गोपाल, अंरविंद कुमार, भंवर सिंह, जयपाल सिंह आदि शामिल रहे। उधर नगर कोतवाली प्रभारी चंद्रभान सिंह अधिकारी ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है।
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पूर्व विधायक अंबरीष ने किया अपना बचाव
हरिद्वार। अग्रवाल सम्मेलन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने अपना बचाव किया है। पूर्व विधायक का कहना है कि संविधान की प्रस्तावना में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक बराबरी का उल्लेख है तथा नीति निदेशक तत्वों में सामाजिक, शैक्षिक रूप से कमजोर वर्गों को सामाजिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर आरक्षण संवैधानिक व्यवस्था है। संविधान में धर्म और आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बाबा साहेब डा. भीम राव अंबेडकर द्वारा बनाए संविधान को विश्व के श्रेष्ठतम संविधानों में बताया।
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