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कालाडांग के समीप पत्थर लगने से जेठानी-देवरानी की मौत
Updated Wed, 16 Aug 2017 10:28 PM IST
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देवप्रयाग। पौड़ी-सबदरखाल-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर काला डांग के समीप घास काटने गई देवरानी-जेठानी की पत्थर की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस ने मशक्कत कर शवों को खाई से निकाला। दोनों महिलाओं के शरीर पत्थर से बुरी तरह कुचल गए थे। बुधवार को दोनों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
खेड़ा गांव निवासी मकान सिंह रावत का परिवार बाह बाजार (रामकुंड) में रहता है। उनका बड़ा बेटा जगदीश सिंह डाककर्मी और सबसे छोटा बेटा प्रीतम सेना में है। मंगलवार सुबह जगदीश की पत्नी यशोदा (43) और प्रीतम की पत्नी चंद्रकला (37) घास लेने जंगल जा रही थी। घर से कुछ दूर दोनों सड़क के नीचे घास काटने उतरी, तभी पहाड़ी से एक भारी बोल्डर उनके ऊपर आ गिरा। दोनों महिलाएं पत्थर के साथ लुढ़कते हुए गंगा के किनारे पहुंच गई। गंभीर चोट आने से दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सौड़ गांव के लोगों ने हादसे की सूचना बाह बाजार पुलिस को दी। यहां पहुंची पुलिस रस्सों के सहारे खाई में उतरी, जहां से दोनों के क्षत-विक्षत शवों को सड़क तक लाया गया। सूचना मिलने पर एसडीएम पौड़ी किशन सिंह और सीओ धन सिंह तोमर भी मौके पर पहुंचे।
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पति नहीं पहुंच पाया
देवप्रयाग। जम्मू सेक्टर में तैनात प्रीतम सिंह अपनी पत्नी चंद्रकला के अंतिम दर्शन नहीं कर पाया। गढ़वाल राइफल में तैनात सैनिक प्रीतम मंगलवार को पत्नी की मौत की सूचना पर घर के लिए रवाना हो गया। जम्मू तक पहुंचे प्रीतम ने जब बुधवार तक न पहुंच पाने की बात कही, तब चंद्रकला का अंतिम संस्कार कर दिया गया। चंद्रकला अपने पीछे पांच वर्षीय बेटी और 8 वर्षीय बेटे को रोता-बिलखता छोड़ गई है। वहीं, 80 वर्षीय मकान सिंह अपनी दो बहुओं को खोने से पूरी तरह बदहवास स्थिति में है। होटल चलाने में दोनों बहुएं उनका हाथ बंटाती थी।
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बाल-बाल बचे टैक्सी में सवार लोग
देवप्रयाग। काला डांग के समीप जहां हादसा हुआ, उस स्थान पर लगभग एक मिनट पहले ही सवारियों से भरी टैक्सी गुजरी थी। अगर टैक्सी को गुजरने में थोड़ा भी देर होती, तो और बड़ा हादसा हो सकता था।
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खेड़ा गांव निवासी मकान सिंह रावत का परिवार बाह बाजार (रामकुंड) में रहता है। उनका बड़ा बेटा जगदीश सिंह डाककर्मी और सबसे छोटा बेटा प्रीतम सेना में है। मंगलवार सुबह जगदीश की पत्नी यशोदा (43) और प्रीतम की पत्नी चंद्रकला (37) घास लेने जंगल जा रही थी। घर से कुछ दूर दोनों सड़क के नीचे घास काटने उतरी, तभी पहाड़ी से एक भारी बोल्डर उनके ऊपर आ गिरा। दोनों महिलाएं पत्थर के साथ लुढ़कते हुए गंगा के किनारे पहुंच गई। गंभीर चोट आने से दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सौड़ गांव के लोगों ने हादसे की सूचना बाह बाजार पुलिस को दी। यहां पहुंची पुलिस रस्सों के सहारे खाई में उतरी, जहां से दोनों के क्षत-विक्षत शवों को सड़क तक लाया गया। सूचना मिलने पर एसडीएम पौड़ी किशन सिंह और सीओ धन सिंह तोमर भी मौके पर पहुंचे।
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पति नहीं पहुंच पाया
देवप्रयाग। जम्मू सेक्टर में तैनात प्रीतम सिंह अपनी पत्नी चंद्रकला के अंतिम दर्शन नहीं कर पाया। गढ़वाल राइफल में तैनात सैनिक प्रीतम मंगलवार को पत्नी की मौत की सूचना पर घर के लिए रवाना हो गया। जम्मू तक पहुंचे प्रीतम ने जब बुधवार तक न पहुंच पाने की बात कही, तब चंद्रकला का अंतिम संस्कार कर दिया गया। चंद्रकला अपने पीछे पांच वर्षीय बेटी और 8 वर्षीय बेटे को रोता-बिलखता छोड़ गई है। वहीं, 80 वर्षीय मकान सिंह अपनी दो बहुओं को खोने से पूरी तरह बदहवास स्थिति में है। होटल चलाने में दोनों बहुएं उनका हाथ बंटाती थी।
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बाल-बाल बचे टैक्सी में सवार लोग
देवप्रयाग। काला डांग के समीप जहां हादसा हुआ, उस स्थान पर लगभग एक मिनट पहले ही सवारियों से भरी टैक्सी गुजरी थी। अगर टैक्सी को गुजरने में थोड़ा भी देर होती, तो और बड़ा हादसा हो सकता था।