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देश की सीमाओं पर दुश्मनों से जीते लेकिन तंत्र से हारे
Updated Mon, 14 Aug 2017 09:59 PM IST
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कर्णप्रयाग। देवाल ब्लॉक के तीन सैनिक बहुल गांव आज भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। आजादी के सत्तर साल में गांव की चार पीढ़ियों ने सेना में अपनी सेवाएं देकर देश की सीमाओं पर देश के लिए जीत हासिल की, लेकिन गांवों तक सड़क लाने में तंत्र से हार गए। इससे गांव के पूर्व सैनिक ही नहीं बल्कि वर्तमान में कार्यरत जवानों में भी मायूसी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा के अभाव में नई पीढ़ी गांवों से पलायन करने के लिए मजबूर है।
देवाल विकासखंड के ओडर, लिंगड़ी और मोपाटा में ढाई सौ से अधिक परिवार रहते हैं। इन गांवों से हर तीसरा परिवार सेना से संबंध रखता है। भूतपूर्व सैनिक भवान सिंह, नंदन सिंह, धर्म सिंह, महेशानंद, केशरी प्रसाद, अजब सिंह और प्रताप सिंह का कहना है कि गांवों के रूप सिंह, धर्म सिंह, लक्ष्मी दत्त, हिम्मत सिंह, दरवान सिंह ने 1962 में चीन युद्ध हो या 71 का पाकिस्तान युद्ध दोनों में शरीक हुए। कारगिल युद्ध में भी सैनिकों ने भागीदारी की।
लिंगड़ी के क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र मेहरा, पाली की देवकी देवी और बोरागाड़ के कमल भंडारी कहते हैं कि एक दशक पूर्व गांव के देवसारी होते हुए मोपाटा तक सड़क स्वीकृत हुई, लेकिन आज तक निर्माण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। ग्रामीण बताते हैं कि अब भी इन गांवों से चालीस से अधिक जवान सेना में कार्यरत हैं, लेकिन गांव में सड़क नहीं होने पर गांव में मायूसी है।
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देवाल विकासखंड के ओडर, लिंगड़ी और मोपाटा में ढाई सौ से अधिक परिवार रहते हैं। इन गांवों से हर तीसरा परिवार सेना से संबंध रखता है। भूतपूर्व सैनिक भवान सिंह, नंदन सिंह, धर्म सिंह, महेशानंद, केशरी प्रसाद, अजब सिंह और प्रताप सिंह का कहना है कि गांवों के रूप सिंह, धर्म सिंह, लक्ष्मी दत्त, हिम्मत सिंह, दरवान सिंह ने 1962 में चीन युद्ध हो या 71 का पाकिस्तान युद्ध दोनों में शरीक हुए। कारगिल युद्ध में भी सैनिकों ने भागीदारी की।
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लिंगड़ी के क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र मेहरा, पाली की देवकी देवी और बोरागाड़ के कमल भंडारी कहते हैं कि एक दशक पूर्व गांव के देवसारी होते हुए मोपाटा तक सड़क स्वीकृत हुई, लेकिन आज तक निर्माण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। ग्रामीण बताते हैं कि अब भी इन गांवों से चालीस से अधिक जवान सेना में कार्यरत हैं, लेकिन गांव में सड़क नहीं होने पर गांव में मायूसी है।
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