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डीएम की सख्ती के खिलाफ कर्मचारियों ने खोला मोर्चा
Updated Fri, 11 Aug 2017 10:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने जिलाधिकारी दीपक रावत की ओर से दिखाई जा रही सख्ती पर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिलाधिकारी की ओर से बार-बार मारे जा रहे छापों के दौरान अनियमितता पाने पर कर्मचारियों का वेतन रोकने और टाइपिंग टेस्ट कराने के जिलाधिकारी के निर्णय का विरोध करते हुए एक सप्ताह में मांगे पूरी नहीं होने पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।
कलेक्ट्रेट परिसर में मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष दीपक राजपूत की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिलाधिकारी दीपक रावत की ओर से हाल ही में लिए गए कई आदेशों को कर्मचारियों ने उत्पीड़नात्मक बताया। बैठक के बाद जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में कहा गया कि सभी कर्मचारियों का टाइपिंग टेस्ट लेने का आदेश अप्रासंगिक है। इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। इसके अलावा छापे मारने के दौरान गैरहाजिर कर्मचारियों का वेतन रोकने के आदेश का भी विरोध किया गया। कर्मचारियों ने पवन सिंह और कुंदन सिंह के निलंबन आदेश पर भी सवाल उठाए और उन्हें बिना नोटिस दिए निलंबित करने का विरोध जताया है। तबादला रोस्टर पर भी नाराजगी जताई गई। जिलाध्यक्ष दीपक राजपूत ने बताया कि जिलाधिकारी से एक सप्ताह में अपने आदेशों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया। ऐसा नहीं करने पर दोबारा बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
बैठक को जिला मंत्री संजय नारायण खाती, पूर्व अध्यक्ष विनोद कुमार, संजय त्रिपाठी, विमल प्रताप सिंह, प्रमोद पंत, जयकुमार त्यागी, सौराज सैनी, संगीता सैनी, खुशाल सिंह रावत, अनिल कुमार, चंद्रमोहन आर्य, गौतम शर्मा आदि पदाधिकारियों ने भाग लिया।
हरिद्वार।
कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने जिलाधिकारी दीपक रावत की ओर से दिखाई जा रही सख्ती पर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिलाधिकारी की ओर से बार-बार मारे जा रहे छापों के दौरान अनियमितता पाने पर कर्मचारियों का वेतन रोकने और टाइपिंग टेस्ट कराने के जिलाधिकारी के निर्णय का विरोध करते हुए एक सप्ताह में मांगे पूरी नहीं होने पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।
कलेक्ट्रेट परिसर में मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष दीपक राजपूत की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिलाधिकारी दीपक रावत की ओर से हाल ही में लिए गए कई आदेशों को कर्मचारियों ने उत्पीड़नात्मक बताया। बैठक के बाद जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में कहा गया कि सभी कर्मचारियों का टाइपिंग टेस्ट लेने का आदेश अप्रासंगिक है। इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। इसके अलावा छापे मारने के दौरान गैरहाजिर कर्मचारियों का वेतन रोकने के आदेश का भी विरोध किया गया। कर्मचारियों ने पवन सिंह और कुंदन सिंह के निलंबन आदेश पर भी सवाल उठाए और उन्हें बिना नोटिस दिए निलंबित करने का विरोध जताया है। तबादला रोस्टर पर भी नाराजगी जताई गई। जिलाध्यक्ष दीपक राजपूत ने बताया कि जिलाधिकारी से एक सप्ताह में अपने आदेशों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया। ऐसा नहीं करने पर दोबारा बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
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बैठक को जिला मंत्री संजय नारायण खाती, पूर्व अध्यक्ष विनोद कुमार, संजय त्रिपाठी, विमल प्रताप सिंह, प्रमोद पंत, जयकुमार त्यागी, सौराज सैनी, संगीता सैनी, खुशाल सिंह रावत, अनिल कुमार, चंद्रमोहन आर्य, गौतम शर्मा आदि पदाधिकारियों ने भाग लिया।
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