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अब शुरू हो गए कंदूरी भोज
Updated Sat, 05 Aug 2017 10:48 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
धर्मनगरी में गुघाल पर्व की धमक शुरू हो गई है। कंदूरी भोजों की संख्या अब दिनों दिन बढ़ती जाएगी और गोगावीर के परंपरागत गीत पंचपुरी के घरों में गूजेंगे। ज्वालापुर का प्रसिद्ध गुघाल मेला तीन सितंबर को है, जबकि कनखल का गुघाल 31 अगस्त को होगा।
जाहरदिवान को हिंदू गोगावीर और मुसलमान जाहरदिवान के नाम से मानते हैं। गंगानगर के पास राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की सीमा पर गोगावीर की प्रसिद्ध म्हाड़ी स्थित है। इस स्थान पर समूचे उत्तर भारत से श्रद्धालु श्रावण के अंतिम सप्ताह और भाद्रपद मास में जाने लगते हैं। इस दिनों यह यात्रा चल रही है। घरों में परंपरागत जोगियों को गीतों से पर्व की शुरूआत होती है और गुघाल मेले में गीतों पर ही समाप्त। बहुत से श्रद्धालु बागड़ से पवित्र ईंट लेकर आते हैं। इस ईंट को घर के किसी पवित्र स्थान पर दर्शन म्हाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया जाता है। विशेष रूप से महिलाएं बागड़ जाती हैं और जगत में शांति की कामना से पंखा झलते हुए लौटती हैं। इन दिनों यह सिलसिला चल रहा है। बागड़ जाने वाले श्रद्धालु लौट कर घरों, धर्मशालाओं आदि में कंदूरी भोज कराते हैं। ये श्रद्धालु पंखा झलते हुए ज्वालापुर स्थित पांडेवाला स्थित गुघाल में गोगावीर के धर्मस्थल तक पहुंचते है।
गुघाल मेला नजदीक आते-आते कंदूरों भोजों और बागड़ से लौटने वालों की संख्या बढ़ती चली जाएगी। ये श्रद्धालु रात के समय अपने घरों में परंपरागत वाद्यों और शैली के गीतों का आयोजन भी करते हैं। गुघाल मेले से कुछ दिन पहले पवित्र छड़ी मुबारक की नगर यात्रा निकाली जाएगी। श्रद्धालु अपने घरों में छड़ी बुलाकर विशेष पूजा भी करेंगे। इन दिनों ज्वालापुर, कनखल और समीपवर्ती देहातों में यह पर्व शुरू हो चुका है। हरिद्वार नगर की अनेक बस्तियों में पर्व की धूम सुनाई पड़ रही है।
हरिद्वार।
धर्मनगरी में गुघाल पर्व की धमक शुरू हो गई है। कंदूरी भोजों की संख्या अब दिनों दिन बढ़ती जाएगी और गोगावीर के परंपरागत गीत पंचपुरी के घरों में गूजेंगे। ज्वालापुर का प्रसिद्ध गुघाल मेला तीन सितंबर को है, जबकि कनखल का गुघाल 31 अगस्त को होगा।
जाहरदिवान को हिंदू गोगावीर और मुसलमान जाहरदिवान के नाम से मानते हैं। गंगानगर के पास राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की सीमा पर गोगावीर की प्रसिद्ध म्हाड़ी स्थित है। इस स्थान पर समूचे उत्तर भारत से श्रद्धालु श्रावण के अंतिम सप्ताह और भाद्रपद मास में जाने लगते हैं। इस दिनों यह यात्रा चल रही है। घरों में परंपरागत जोगियों को गीतों से पर्व की शुरूआत होती है और गुघाल मेले में गीतों पर ही समाप्त। बहुत से श्रद्धालु बागड़ से पवित्र ईंट लेकर आते हैं। इस ईंट को घर के किसी पवित्र स्थान पर दर्शन म्हाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया जाता है। विशेष रूप से महिलाएं बागड़ जाती हैं और जगत में शांति की कामना से पंखा झलते हुए लौटती हैं। इन दिनों यह सिलसिला चल रहा है। बागड़ जाने वाले श्रद्धालु लौट कर घरों, धर्मशालाओं आदि में कंदूरी भोज कराते हैं। ये श्रद्धालु पंखा झलते हुए ज्वालापुर स्थित पांडेवाला स्थित गुघाल में गोगावीर के धर्मस्थल तक पहुंचते है।
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गुघाल मेला नजदीक आते-आते कंदूरों भोजों और बागड़ से लौटने वालों की संख्या बढ़ती चली जाएगी। ये श्रद्धालु रात के समय अपने घरों में परंपरागत वाद्यों और शैली के गीतों का आयोजन भी करते हैं। गुघाल मेले से कुछ दिन पहले पवित्र छड़ी मुबारक की नगर यात्रा निकाली जाएगी। श्रद्धालु अपने घरों में छड़ी बुलाकर विशेष पूजा भी करेंगे। इन दिनों ज्वालापुर, कनखल और समीपवर्ती देहातों में यह पर्व शुरू हो चुका है। हरिद्वार नगर की अनेक बस्तियों में पर्व की धूम सुनाई पड़ रही है।
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