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विस अध्यक्ष की विधानसभा पर गंगा का खतरा मंडरा रहा
Updated Fri, 04 Aug 2017 01:58 AM IST
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आपदा में क्षतिग्रस्त आस्था पथ की नहीं ली सुध
-- तीन साल से शासन में धूल फांक रही 10 करोड़ के प्रस्ताव की फाइल
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
वर्ष- 2013 में दैवीय आपदा में क्षतिग्रस्त तीर्थनगरी के आस्था पथ की मरम्मत का प्रस्ताव दो साल से शासन में धूल फांक रहा है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार के समय सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव पर गौर नहीं किया गया। इतना ही नहीं केंद्र व प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकार भी तीर्थ क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण हिस्सों की सुरक्षा और लाखों लोगों की आस्था के प्रतीक आस्था पथ के जीर्णोद्घार में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। दैवीय आपदा के दौरान तीर्थनगरी के करीब ढाई किमी. लंबे आस्था पथ के निचले हिस्से में कई स्थानों पर गंगा के पानी के उफान के चलते गहरे गड्ढे बन गए थे, जिसके कारण भविष्य में करोड़ों की लागत से बने पथ और इससे सटी कालोनियों को भी खतरा हो सकता है।
सिंचाई विभाग की ओर से आस्था पथ की बेस साइट मरम्मत के लिए 10 करोड़, 56 लाख, 83 हजार का प्रस्ताव अक्तूबर 2015 में तैयार कर आंकलन के लिए टेक्निकल ऑडिट सेल (टीएसी) को भेजा गया था। टीएसी ने आस्थापथ के क्षतिग्रस्त भाग का सर्वे किया था, जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। टीएसी रिपोर्ट में पाया गया कि आस्थापथ की सुरक्षा के लिए गंगा की ओर बनाई गई सुरक्षा दीवार पर बाढ़ से कटाव से गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिससे कई स्थानों पर आस्था पथ कमजोर हो चुका है। इसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया।
आस्थापथ से क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की विधानसभा के अंतर्गत गंगा विहार कॉलोनी, हरिद्वार हाईवे, वीरभद्र क्षेत्र आदि इलाकों को बरसात के समय गंगा में आने वाली बाढ़ से सुरक्षा मिलती है। इसके बावजूद इसके हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस जरूरी प्रस्ताव के प्रति सरकार उदासीन बनी बैठी है। यदि वर्षाकाल में नदियां उफान पर आई तो इससे आस्था पथ के साथ ही इससे सटी कालोनियों को भी खतरा हो सकता है।
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इनकी सुनिए
उपखंड की ओर से वर्ष 2015 में शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलते ही आस्था पथ की मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
पीएल नौटियाल, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग ऋषिकेश
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-- तीन साल से शासन में धूल फांक रही 10 करोड़ के प्रस्ताव की फाइल
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
वर्ष- 2013 में दैवीय आपदा में क्षतिग्रस्त तीर्थनगरी के आस्था पथ की मरम्मत का प्रस्ताव दो साल से शासन में धूल फांक रहा है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार के समय सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव पर गौर नहीं किया गया। इतना ही नहीं केंद्र व प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकार भी तीर्थ क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण हिस्सों की सुरक्षा और लाखों लोगों की आस्था के प्रतीक आस्था पथ के जीर्णोद्घार में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। दैवीय आपदा के दौरान तीर्थनगरी के करीब ढाई किमी. लंबे आस्था पथ के निचले हिस्से में कई स्थानों पर गंगा के पानी के उफान के चलते गहरे गड्ढे बन गए थे, जिसके कारण भविष्य में करोड़ों की लागत से बने पथ और इससे सटी कालोनियों को भी खतरा हो सकता है।
सिंचाई विभाग की ओर से आस्था पथ की बेस साइट मरम्मत के लिए 10 करोड़, 56 लाख, 83 हजार का प्रस्ताव अक्तूबर 2015 में तैयार कर आंकलन के लिए टेक्निकल ऑडिट सेल (टीएसी) को भेजा गया था। टीएसी ने आस्थापथ के क्षतिग्रस्त भाग का सर्वे किया था, जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। टीएसी रिपोर्ट में पाया गया कि आस्थापथ की सुरक्षा के लिए गंगा की ओर बनाई गई सुरक्षा दीवार पर बाढ़ से कटाव से गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिससे कई स्थानों पर आस्था पथ कमजोर हो चुका है। इसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया।
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आस्थापथ से क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की विधानसभा के अंतर्गत गंगा विहार कॉलोनी, हरिद्वार हाईवे, वीरभद्र क्षेत्र आदि इलाकों को बरसात के समय गंगा में आने वाली बाढ़ से सुरक्षा मिलती है। इसके बावजूद इसके हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस जरूरी प्रस्ताव के प्रति सरकार उदासीन बनी बैठी है। यदि वर्षाकाल में नदियां उफान पर आई तो इससे आस्था पथ के साथ ही इससे सटी कालोनियों को भी खतरा हो सकता है।
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इनकी सुनिए
उपखंड की ओर से वर्ष 2015 में शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलते ही आस्था पथ की मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
पीएल नौटियाल, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग ऋषिकेश