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कांवड़ मेले में हावी रही अव्यवस्था
Updated Wed, 19 Jul 2017 10:14 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
ध्वनि प्रदूषण, यातायात नियम, राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, प्रतिबंधित वस्तु आदि को लेकर इस बार अव्यवस्थाएं कांवड़ मेले में हावी रही। खुली आंखों से राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को होते देखने के बाद भी सिस्टम आंखें मूंदे रहा। पिछली कांवड़ यात्राओं पर निगाह डालें तो ऐसी बदइंतजामी के निशान नहीं दिखाई देते हैं।
इस बार कांवड़ मेले को लेकर पुलिस ने बड़े- बड़े दावे किए थे। सबसे बड़ा दावा गंनगहर पटरी संचालन, डीजे साउंड सिस्टम पर रोक, हाकी, बेसवॉल, त्रिशूल पर रोक जैसे कदम उठाने का था। बावजूद इसके पहले ही दिन से कांवड़ हाईवे पर अव्यवस्थाएं दिखती रहीं। गंगनहर पटरी का संचालन शत प्रतिशत नहीं हो सका था। हाईवे ही नहीं बल्कि शहर में भी कांवड़ ही कांवड़ नजर आ रही थी। यातायात नियम का माखौल तो हर बार उड़ाया जाता रहा। ठीक वैसे ही इस बार भी हुआ। दोपहिया वाहन की कानफोड़ू आवाज विचलित करती और डराती रही। डीजे को लेकर तो हद ही हो गई। बेरोकटोक डीजे बजता रहा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी हवा में उड़ा दिया गया। रात दस बजे के बाद हर डाक कांवड़ वाहन से डीजे का शोर दूर- दूर तक सुनाई देता रहा। हालांकि, पिछले कई वर्षों में हरिद्वार में डीजे की आवाज इक्का- दुक्का वाहन से ही सुनने को मिलती थी। इस बार पुलिस जैसे हाथ बांधे खड़ी थी। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान लगातार होता रहा और सूर्यास्त के बाद ध्वज को लहराया जाता रहा। आला अफसर हाईवे पर खड़े होकर ये सब देखत रहे। बावजूद इसके विरोध की हिम्मत किसी ने नहीं जुटाई। अव्यवस्था पूरी तरह से शहर को आगोश में ले चुकी थी। आम शहरी अपने-अपने घरों में कैद रहे। पुलिस केवल कांवड़ यात्रा पर ही ध्यान देती रही, मानो आमशहरी से कोई लेना देना ही न हो।
कोट-
कांवड़ पटरी का बेहतर संचालन हुआ है। बड़ी कांवड़ हाईवे से गई होगी। डीजे को लेकर मैं समीक्षा करूंगा, फिर कुछ कह सकूंगा। - पुष्पक ज्योति, डीआईजी गढ़वाल रेंज।
हरिद्वार।
ध्वनि प्रदूषण, यातायात नियम, राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, प्रतिबंधित वस्तु आदि को लेकर इस बार अव्यवस्थाएं कांवड़ मेले में हावी रही। खुली आंखों से राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को होते देखने के बाद भी सिस्टम आंखें मूंदे रहा। पिछली कांवड़ यात्राओं पर निगाह डालें तो ऐसी बदइंतजामी के निशान नहीं दिखाई देते हैं।
इस बार कांवड़ मेले को लेकर पुलिस ने बड़े- बड़े दावे किए थे। सबसे बड़ा दावा गंनगहर पटरी संचालन, डीजे साउंड सिस्टम पर रोक, हाकी, बेसवॉल, त्रिशूल पर रोक जैसे कदम उठाने का था। बावजूद इसके पहले ही दिन से कांवड़ हाईवे पर अव्यवस्थाएं दिखती रहीं। गंगनहर पटरी का संचालन शत प्रतिशत नहीं हो सका था। हाईवे ही नहीं बल्कि शहर में भी कांवड़ ही कांवड़ नजर आ रही थी। यातायात नियम का माखौल तो हर बार उड़ाया जाता रहा। ठीक वैसे ही इस बार भी हुआ। दोपहिया वाहन की कानफोड़ू आवाज विचलित करती और डराती रही। डीजे को लेकर तो हद ही हो गई। बेरोकटोक डीजे बजता रहा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी हवा में उड़ा दिया गया। रात दस बजे के बाद हर डाक कांवड़ वाहन से डीजे का शोर दूर- दूर तक सुनाई देता रहा। हालांकि, पिछले कई वर्षों में हरिद्वार में डीजे की आवाज इक्का- दुक्का वाहन से ही सुनने को मिलती थी। इस बार पुलिस जैसे हाथ बांधे खड़ी थी। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान लगातार होता रहा और सूर्यास्त के बाद ध्वज को लहराया जाता रहा। आला अफसर हाईवे पर खड़े होकर ये सब देखत रहे। बावजूद इसके विरोध की हिम्मत किसी ने नहीं जुटाई। अव्यवस्था पूरी तरह से शहर को आगोश में ले चुकी थी। आम शहरी अपने-अपने घरों में कैद रहे। पुलिस केवल कांवड़ यात्रा पर ही ध्यान देती रही, मानो आमशहरी से कोई लेना देना ही न हो।
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कोट-
कांवड़ पटरी का बेहतर संचालन हुआ है। बड़ी कांवड़ हाईवे से गई होगी। डीजे को लेकर मैं समीक्षा करूंगा, फिर कुछ कह सकूंगा। - पुष्पक ज्योति, डीआईजी गढ़वाल रेंज।
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