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देवगड्डी- पल्यापटाला सड़क से चार पट्टियों को मिलेगा यातायात का लाभ
Updated Sat, 08 Jul 2017 10:07 PM IST
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कीर्तिनगर। अगर पीएमजीएसवाई के तहत स्वीकृत देवगड्डी-पल्यापटाला मोटर मार्ग का निर्माण हो जाए, तो विकास खंड कीर्तिनगर की 4 पट्टियों के गांवों का सीधा यातायात संपर्क हो जाएगा। साथ ही यह सड़क रिंग रोड का काम करेगी, लेकिन दिक्कत यह है कि स्वीकृति के दो साल बाद भी कार्यदायी संस्था लोनिवि (पीएमजीएसवाई) कीर्तिनगर खंड वन भूमि हस्तांतरण की पत्रावलियों का निस्तारण नहीं करवा पाई है।
वर्ष 2015 में विकास खंड कीर्तिनगर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बडियारगढ़-घंडियालधार मोटर मार्ग पर स्थित देवगड्डी से पल्यापटाला गांव तक 11 किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत की गई। इस सड़क से परियापुंडोली, पल्यापटाला, डांडाखील, भडेंख़ील, मोलधार, सरमोली और पांडव गांवों को यातायात लाभ पहुंचाने का मकसद रखा गया। साथ ही यह मार्ग कीर्तिनगर-सिल्काखाल-चुन्नीखाल मार्ग और डांग-कांडी मार्ग से जुड़ रहा है। अगर यह मार्ग स्वीकृत पांडव-घंडियालधार मोटर मार्ग से जुड़ जाए, तो बडियारगढ़, लोस्तू, कड़ाकोट और ढुंढसिर पट्टियों के 200 गांवों का सीधा यातायात संपर्क हो जाएगा।
ग्रामीण राकेश बर्त्वाल, रमेश सिंह, धीरज सिंह और मदन सिंह ने बताया कि मार्ग बनने से ढुंढसिर व कड़कोट से लोस्तु व बडियारगढ़ पट्टी जाने के लिए कीर्तिनगर का फेरा नहीं काटना पड़ेगा। इससे लगभग 40 किलोमीटर की दूरी कम हो रही है।
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वन विभाग से हाल में वन भूमि पत्रावलियां वापस आई हैं। कुछ आपत्तियां लगाई गई हैं, जिनका निस्तारण नोडल ऑफिस भेज दिया जाएगा। जेएस रावत, अधिशासी अभियंता लोनिवि कीर्तिनगर
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वर्ष 2015 में विकास खंड कीर्तिनगर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बडियारगढ़-घंडियालधार मोटर मार्ग पर स्थित देवगड्डी से पल्यापटाला गांव तक 11 किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत की गई। इस सड़क से परियापुंडोली, पल्यापटाला, डांडाखील, भडेंख़ील, मोलधार, सरमोली और पांडव गांवों को यातायात लाभ पहुंचाने का मकसद रखा गया। साथ ही यह मार्ग कीर्तिनगर-सिल्काखाल-चुन्नीखाल मार्ग और डांग-कांडी मार्ग से जुड़ रहा है। अगर यह मार्ग स्वीकृत पांडव-घंडियालधार मोटर मार्ग से जुड़ जाए, तो बडियारगढ़, लोस्तू, कड़ाकोट और ढुंढसिर पट्टियों के 200 गांवों का सीधा यातायात संपर्क हो जाएगा।
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ग्रामीण राकेश बर्त्वाल, रमेश सिंह, धीरज सिंह और मदन सिंह ने बताया कि मार्ग बनने से ढुंढसिर व कड़कोट से लोस्तु व बडियारगढ़ पट्टी जाने के लिए कीर्तिनगर का फेरा नहीं काटना पड़ेगा। इससे लगभग 40 किलोमीटर की दूरी कम हो रही है।
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वन विभाग से हाल में वन भूमि पत्रावलियां वापस आई हैं। कुछ आपत्तियां लगाई गई हैं, जिनका निस्तारण नोडल ऑफिस भेज दिया जाएगा। जेएस रावत, अधिशासी अभियंता लोनिवि कीर्तिनगर