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कांवड़ पटरी पर कांवड़ियों की फिर होगी फजीहत
Updated Mon, 05 Jun 2017 11:32 PM IST
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हरिद्वार से लेकर नारसन तक करीब 50 किलोमीटर कांवड़ पटरी मार्ग बदहाल है। हर साल कांवड़ से पहले मरम्मतीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन कांवड़ खत्म होने से पहले ही सड़कें फिर से जवाब दे जाती हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान आनन फानन में किए गए कार्यों से जहां सरकार को राजस्व की चपत लगती हैं, वहीं कांवड़ियों और आमजन को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्थिति यह है कि कांवड़ पटरी मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं, वहीं नहर पटरी भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। ऐसे में एकबार फिर से लाखों कांवड़ियों को फजीहत झेलनी पड़ेगी।
कांवड़ को लेकर हरिद्वार जिले में तैयारियां शुरू हो गई है। दो दिन पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी अधिकारियों संग बैठक कर कांवड़ की तैयारियों के निर्देश दिए हैं, लेकिन धरातल पर अभी कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। कांवड़ पटरी गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जबकि जगह-जगह से क्षतिग्रस्त नहर पटरी भी हादसों का सबब बन सकती है, लेकिन 50 किलोमीटर मार्ग को दुरुस्त करने के लिए अभी कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हो सकी है। भले ही सावन की महाशिवरात्रि 21 जुलाई को है, लेकिन इससे एक पखवाड़ा पहले ही कांवड़िए जल लेने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से हरिद्वार पहुंचते हैं। यही नहीं बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगोत्री से भी जल लेकर आते हैं। इस दौरान कांवड़ पटरी शिवभक्तों के रंग में सराबोर हो जाती है। पटरी पर श्रद्धालु नंगे पांव ही यात्रा करते हैं। ऐसे में बदहाल कांवड़ पटरी के कारण भोले के भक्तों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
कांवड़ पटरी को दुरुस्त करने के अलावा बिजली और पानी सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसका सही लाभ कांवड़ियों को नहीं मिल पाता है। दरअसल यात्रा शुरू होने के बाद आनन-फानन में कांवड़ पटरी पर गड्ढों का जैसे-तैसे मरम्मतीकरण कर दिया जाता है। वहीं बिजली और पानी के इंतजाम भी नाकाफी साबित होते रहे हैं। कांवड़ पटरी पर भी श्रद्धालुओं को तकनीकी खामी के कारण कई बार अंधेरे में ही लंबी दूरी तक यात्रा करनी पड़ती है। दूसरी ओर कांवड़ पटरी के साथ ही नहर पटरी भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जो कांवडिय़ों और अन्य लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
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कांवड़ को लेकर हरिद्वार जिले में तैयारियां शुरू हो गई है। दो दिन पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी अधिकारियों संग बैठक कर कांवड़ की तैयारियों के निर्देश दिए हैं, लेकिन धरातल पर अभी कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। कांवड़ पटरी गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जबकि जगह-जगह से क्षतिग्रस्त नहर पटरी भी हादसों का सबब बन सकती है, लेकिन 50 किलोमीटर मार्ग को दुरुस्त करने के लिए अभी कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हो सकी है। भले ही सावन की महाशिवरात्रि 21 जुलाई को है, लेकिन इससे एक पखवाड़ा पहले ही कांवड़िए जल लेने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से हरिद्वार पहुंचते हैं। यही नहीं बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगोत्री से भी जल लेकर आते हैं। इस दौरान कांवड़ पटरी शिवभक्तों के रंग में सराबोर हो जाती है। पटरी पर श्रद्धालु नंगे पांव ही यात्रा करते हैं। ऐसे में बदहाल कांवड़ पटरी के कारण भोले के भक्तों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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कांवड़ पटरी को दुरुस्त करने के अलावा बिजली और पानी सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसका सही लाभ कांवड़ियों को नहीं मिल पाता है। दरअसल यात्रा शुरू होने के बाद आनन-फानन में कांवड़ पटरी पर गड्ढों का जैसे-तैसे मरम्मतीकरण कर दिया जाता है। वहीं बिजली और पानी के इंतजाम भी नाकाफी साबित होते रहे हैं। कांवड़ पटरी पर भी श्रद्धालुओं को तकनीकी खामी के कारण कई बार अंधेरे में ही लंबी दूरी तक यात्रा करनी पड़ती है। दूसरी ओर कांवड़ पटरी के साथ ही नहर पटरी भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जो कांवडिय़ों और अन्य लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
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