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डीएनए रिपोर्ट पर नहीं विश्वास
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डीएनए रिपोर्ट पर नहीं विश्वास
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दून महिला अस्पताल में बच्चा बदले जाने में मामले में नया मोड़ गया है। बृहस्पतिवार को आई डीएनए रिपोर्ट को एक दंपति ने मानने से इंकार कर दिया है। उनका तर्क है कि उनके सामने रिपोर्ट को खोला नहीं गया। उन्हें आशंका है कि रिपोर्ट को उन्हें दिखाने से पहले ही बदल दिया गया। उन्होंने दोबारा डीएनए जांच कराने की भी बात कही है।
उल्लेखनीय है कि दून महिला अस्पताल में पांच मार्च की सुबह एक ही नाम की दो महिलाओं का प्रसव हुआ था। जिनमें अनिल की पत्नी आरती ने सुबह 9.20 बजे पुत्र को जन्म दिया था। वहीं डोभालवाला निवासी उमेश शाह की पत्नी आरती ने 9.50 बजे लड़की को जन्म दिया था। बच्ची की हालत नाजुक होने के चलते नर्स ने उसे निक्कूू वार्ड में भर्ती करा दिया था। शाम को शाह दंपति बच्चा लेने पहुंची तो उन्हाेंने लड़की देखकर हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि अस्पताल कर्मियों ने साठगांठ कर उनका बच्चा बदल दिया है। सुबह उन्हें बेटा होना बताया गया था। शाह दंपति ने धारा चौकी पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ तहरीर भी दे दी। विवाद ज्यादा बढ़ने पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने हस्तक्षेप कर पुलिस को न्यायोचित कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद डीएनए टेस्ट कराने के लिए दोनों नवजातों और उनके माता-पिता के सैंपल जांच के लिए फॉरेंसिक जांच लैब (एफएएल) भेजे गए थे।
बृहस्पतिवार को आई डीएनए रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि डोभालवाला निवासी उमेश शाह पत्नी आरती ने ही बच्ची को जन्म दिया था। वहीं शुक्रवार को अमर उजाला ने जब उमेश से बात की तो उन्होंने डीएनए रिपोर्ट पर विश्वास करने से मना कर दिया। उनका कहना है कि बाल अयोग की अध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन दिया था कि रिपोर्ट को उनके सामने खोला जाएगा लेकिन उन्हें बिना जानकारी दिए है रिपोर्ट का खुलासा कर दिया गया। उन्हें रिपोर्ट के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। अखबार में खबर पढ़कर उन्हें रिपोर्ट आने का पता चला है। कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनकी रिपोर्ट को बदल दिया गया है। इसके लिए अब वह चुप नहीं बैठेंगे। दोबारा डीएनए जांच कराएंगे।
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वहीं दून अस्पताल एमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि शुक्रवार को पुलिस से मामले की डीएनए जांच रिपोर्ट मिल गई है। शनिवार को दोनों बच्चों के परिजनों को बुलाकर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दून महिला अस्पताल में बच्चा बदले जाने में मामले में नया मोड़ गया है। बृहस्पतिवार को आई डीएनए रिपोर्ट को एक दंपति ने मानने से इंकार कर दिया है। उनका तर्क है कि उनके सामने रिपोर्ट को खोला नहीं गया। उन्हें आशंका है कि रिपोर्ट को उन्हें दिखाने से पहले ही बदल दिया गया। उन्होंने दोबारा डीएनए जांच कराने की भी बात कही है।
उल्लेखनीय है कि दून महिला अस्पताल में पांच मार्च की सुबह एक ही नाम की दो महिलाओं का प्रसव हुआ था। जिनमें अनिल की पत्नी आरती ने सुबह 9.20 बजे पुत्र को जन्म दिया था। वहीं डोभालवाला निवासी उमेश शाह की पत्नी आरती ने 9.50 बजे लड़की को जन्म दिया था। बच्ची की हालत नाजुक होने के चलते नर्स ने उसे निक्कूू वार्ड में भर्ती करा दिया था। शाम को शाह दंपति बच्चा लेने पहुंची तो उन्हाेंने लड़की देखकर हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि अस्पताल कर्मियों ने साठगांठ कर उनका बच्चा बदल दिया है। सुबह उन्हें बेटा होना बताया गया था। शाह दंपति ने धारा चौकी पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ तहरीर भी दे दी। विवाद ज्यादा बढ़ने पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने हस्तक्षेप कर पुलिस को न्यायोचित कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद डीएनए टेस्ट कराने के लिए दोनों नवजातों और उनके माता-पिता के सैंपल जांच के लिए फॉरेंसिक जांच लैब (एफएएल) भेजे गए थे।
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बृहस्पतिवार को आई डीएनए रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि डोभालवाला निवासी उमेश शाह पत्नी आरती ने ही बच्ची को जन्म दिया था। वहीं शुक्रवार को अमर उजाला ने जब उमेश से बात की तो उन्होंने डीएनए रिपोर्ट पर विश्वास करने से मना कर दिया। उनका कहना है कि बाल अयोग की अध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन दिया था कि रिपोर्ट को उनके सामने खोला जाएगा लेकिन उन्हें बिना जानकारी दिए है रिपोर्ट का खुलासा कर दिया गया। उन्हें रिपोर्ट के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। अखबार में खबर पढ़कर उन्हें रिपोर्ट आने का पता चला है। कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनकी रिपोर्ट को बदल दिया गया है। इसके लिए अब वह चुप नहीं बैठेंगे। दोबारा डीएनए जांच कराएंगे।
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वहीं दून अस्पताल एमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि शुक्रवार को पुलिस से मामले की डीएनए जांच रिपोर्ट मिल गई है। शनिवार को दोनों बच्चों के परिजनों को बुलाकर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।