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पैकेज राशि कम बताकर इलाज से पल्ला झाड़ रहे अस्पताल
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में इलाज की पैकेज राशि कम होने की वजह से निजी और सरकारी अस्पताल मरीजों के इलाज से पल्ला झाड़ रहे हैं। गोल्डन कार्ड होने के बावजूद मरीज अस्पताल से लौटाए जा रहे हैं।
बता दें, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत योजना के तहत 1350 बीमारियों के इलाज की व्यवस्था की है। मंत्रालय से इलाज की दरें भी तय कर दी गई हैं। इसके आधार पर मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों का भुगतान किया जाएगा, लेकिन अब तमाम निजी व सरकारी अस्पताल मरीजों को यह तर्क देकर लौटा रहे हैं कि संबंधित बीमारियों के लिए जो दरें तय की गई हैं वे बहुत कम हैं। सबसे अधिक दिक्कत सरकारी अस्पतालों में है। जहां मरीज के इलाज के मद में मिलने वाली धनराशि में से 50 फीसदी कोषागार में जमा कराया जाएगा। बाकी बचे 50 फीसदी बजट में से 15 फीसदी बजट मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टरों व पैरा मेडिकल को प्रोत्साहन राशि के तौर पर वितरित किया जाना है। इसके बाद मरीज के इलाज के लिए महज 25 फीसदी बजट बचता है। इस बजट में मरीज के इलाज में काम आने वाले उपकरणों व दवाइयों की खरीद संभव नहीं है। ऐसे में निजी के साथ सरकारी अस्पताल योजना में चयनित मरीजों के इलाज में आनाकानी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण से कई स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्वास्थ्य महानिदेशक को भी अवगत कराया है। बहरहाल अभीतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
इलाज दरों में संशोधन को लेकर गठित है समिति
आयुष्मान योजना के तहत इलाज की दरों को संशोधित किया जा सके, इसके लिए स्वास्थ्य महानिदेशक की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय समिति गठित है। यह समिति दरों के संशोधन के मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लेगी। हालांकि समिति ने अभी इस संबंध में कोई निर्णय नही लिया है।
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आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की दरें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तय की हैं। इलाज को लेकर जो दरें तय की गई हैं वे पर्याप्त हैं। सरकारी अस्पतालों में पहले से ही इलाज की मुफ्त सुविधा दी जा रही थी, लेकिन योजना के तहत मरीजों का इलाज करने पर बजट मुहैया कराया जा रहा है। फिलहाल इलाज की दरें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन यदि दिक्कतें आ रही है तो इस पर भविष्य में विचार किया जा सकता है।
-युगल किशोर पंत, अपर सचिव स्वास्थ्य, सीईओ आयुष्मान भारत योजना
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अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में इलाज की पैकेज राशि कम होने की वजह से निजी और सरकारी अस्पताल मरीजों के इलाज से पल्ला झाड़ रहे हैं। गोल्डन कार्ड होने के बावजूद मरीज अस्पताल से लौटाए जा रहे हैं।
बता दें, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत योजना के तहत 1350 बीमारियों के इलाज की व्यवस्था की है। मंत्रालय से इलाज की दरें भी तय कर दी गई हैं। इसके आधार पर मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों का भुगतान किया जाएगा, लेकिन अब तमाम निजी व सरकारी अस्पताल मरीजों को यह तर्क देकर लौटा रहे हैं कि संबंधित बीमारियों के लिए जो दरें तय की गई हैं वे बहुत कम हैं। सबसे अधिक दिक्कत सरकारी अस्पतालों में है। जहां मरीज के इलाज के मद में मिलने वाली धनराशि में से 50 फीसदी कोषागार में जमा कराया जाएगा। बाकी बचे 50 फीसदी बजट में से 15 फीसदी बजट मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टरों व पैरा मेडिकल को प्रोत्साहन राशि के तौर पर वितरित किया जाना है। इसके बाद मरीज के इलाज के लिए महज 25 फीसदी बजट बचता है। इस बजट में मरीज के इलाज में काम आने वाले उपकरणों व दवाइयों की खरीद संभव नहीं है। ऐसे में निजी के साथ सरकारी अस्पताल योजना में चयनित मरीजों के इलाज में आनाकानी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण से कई स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्वास्थ्य महानिदेशक को भी अवगत कराया है। बहरहाल अभीतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
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इलाज दरों में संशोधन को लेकर गठित है समिति
आयुष्मान योजना के तहत इलाज की दरों को संशोधित किया जा सके, इसके लिए स्वास्थ्य महानिदेशक की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय समिति गठित है। यह समिति दरों के संशोधन के मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लेगी। हालांकि समिति ने अभी इस संबंध में कोई निर्णय नही लिया है।
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आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की दरें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तय की हैं। इलाज को लेकर जो दरें तय की गई हैं वे पर्याप्त हैं। सरकारी अस्पतालों में पहले से ही इलाज की मुफ्त सुविधा दी जा रही थी, लेकिन योजना के तहत मरीजों का इलाज करने पर बजट मुहैया कराया जा रहा है। फिलहाल इलाज की दरें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन यदि दिक्कतें आ रही है तो इस पर भविष्य में विचार किया जा सकता है।
-युगल किशोर पंत, अपर सचिव स्वास्थ्य, सीईओ आयुष्मान भारत योजना