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उतराखंड बोर्ड लागू नहीं तो मदरसों को नहीं मिलेगी मदद
Updated Thu, 09 Aug 2018 02:00 AM IST
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उत्तराखंड बोर्ड लागू नहीं तो मदरसों को नहीं मिलेगी मदद
उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाने वाले मदरसों और अल्पसंख्यक संस्थाओं को अब केंद्रीय योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की मदरसों में अच्छी शिक्षा देना (एसपीक्यूईएम) और अल्पसंख्यक संस्थानों में अवसंरचना विकास (आईडीएमआई) योजना को एकीकृत कर इसके क्रियान्वयन का जिम्मा शिक्षा विभाग को सौंपा है।
दोनों योजनाओं एसपीक्यूईएम और आईडीएमआई का एकीककरण करने के बाद समग्र शिक्षा अभियान में शामिल कर मदरसों/अल्पसंख्यकों को शिक्षा प्रदान करने की योजना (एसपीईएमएम) तैयार की गई है। इसके तहत मदरसों में तैनात होने वाले शिक्षकों के मानदेय और ढांचागत सुविधाओं के लिए अनुदान की व्यवस्था की जानी है। मदरसों को योजना का लाभ देने के लिए विभाग को अपनी वार्षिक कार्ययोजना और बजट का ब्योरा अगस्त में ही वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। इसको लेकर विभाग की ओर से राज्य परियोजना कार्यालय में 17 अगस्त को विभागीय अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें मुख्य शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला समन्वयक और कंप्यूटर ऑपरेटर तक शामिल होंगे। इसके लिए सभी मदरसों से प्रस्ताव, प्रस्तावित गतिविधियों, मांगों और छात्र संख्या सहित अन्य जानकारियां मांगी गई हैं।
ये हैं योजनाएं
एसपीक्यूईएम : मदरसों के आधुनिकीकरण और शिक्षा में सुधार के लिए इस योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक मदरसे में गणित, अंग्रेजी और हिंदी या विज्ञान की पढ़ाई करवाई जाती है। इसके लिए तैनात शिक्षकों का मानदेय (शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अलग-अलग) केंद्र सरकार देती है।
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आईडीएमआई : इस योजना के तहत मदरसों में ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने के लिए अनुदान दिया जाता है। मदरसों में शौचालय, कक्ष, टेबल-कुर्सी समेत पठन-पाठन की अन्य सामग्री के लिए केंद्र सरकार 75 फीसदी अनुदान देती है। 25 फीसदी धनराशि संबंधित मदरसे को खुद खर्च करनी होती है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की इन योजनाओं का संचालन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग कर रहा था। अब दोनों योजनाओं को समग्र शिक्षा अभियान में शामिल कर शिक्षा विभाग को दिया गया है। इसके लिए मदरसों से सूचनाएं मांगी गई हैं।
-कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा
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उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाने वाले मदरसों और अल्पसंख्यक संस्थाओं को अब केंद्रीय योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की मदरसों में अच्छी शिक्षा देना (एसपीक्यूईएम) और अल्पसंख्यक संस्थानों में अवसंरचना विकास (आईडीएमआई) योजना को एकीकृत कर इसके क्रियान्वयन का जिम्मा शिक्षा विभाग को सौंपा है।
दोनों योजनाओं एसपीक्यूईएम और आईडीएमआई का एकीककरण करने के बाद समग्र शिक्षा अभियान में शामिल कर मदरसों/अल्पसंख्यकों को शिक्षा प्रदान करने की योजना (एसपीईएमएम) तैयार की गई है। इसके तहत मदरसों में तैनात होने वाले शिक्षकों के मानदेय और ढांचागत सुविधाओं के लिए अनुदान की व्यवस्था की जानी है। मदरसों को योजना का लाभ देने के लिए विभाग को अपनी वार्षिक कार्ययोजना और बजट का ब्योरा अगस्त में ही वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। इसको लेकर विभाग की ओर से राज्य परियोजना कार्यालय में 17 अगस्त को विभागीय अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें मुख्य शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला समन्वयक और कंप्यूटर ऑपरेटर तक शामिल होंगे। इसके लिए सभी मदरसों से प्रस्ताव, प्रस्तावित गतिविधियों, मांगों और छात्र संख्या सहित अन्य जानकारियां मांगी गई हैं।
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ये हैं योजनाएं
एसपीक्यूईएम : मदरसों के आधुनिकीकरण और शिक्षा में सुधार के लिए इस योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक मदरसे में गणित, अंग्रेजी और हिंदी या विज्ञान की पढ़ाई करवाई जाती है। इसके लिए तैनात शिक्षकों का मानदेय (शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अलग-अलग) केंद्र सरकार देती है।
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आईडीएमआई : इस योजना के तहत मदरसों में ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने के लिए अनुदान दिया जाता है। मदरसों में शौचालय, कक्ष, टेबल-कुर्सी समेत पठन-पाठन की अन्य सामग्री के लिए केंद्र सरकार 75 फीसदी अनुदान देती है। 25 फीसदी धनराशि संबंधित मदरसे को खुद खर्च करनी होती है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की इन योजनाओं का संचालन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग कर रहा था। अब दोनों योजनाओं को समग्र शिक्षा अभियान में शामिल कर शिक्षा विभाग को दिया गया है। इसके लिए मदरसों से सूचनाएं मांगी गई हैं।
-कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा