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स्वास्थ्य विभाग में नए सिरे से ढांचे के पुनर्गठन की तैयारी

Mon, 28 May 2018 01:40 AM IST
Updated Mon, 28 May 2018 01:40 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग में नए सिरे से ढांचे के पुनर्गठन की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग ने नए सिरे से ढांचे के पुनर्गठन की तैयारी की है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव की अगुवाई में अफसर विभागीय ढांचे के पुनर्गठन को लेकर अध्ययन कर रहे हैं। इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य में 18697 परिवार कल्याण केंद्र, 210 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 317 राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 95 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 15 संयुक्त चिकित्सालय, 13 जिला पुरुष चिकित्सालय, सात जिला महिला चिकित्सालय, एक मानसिक चिकित्सालय संचालित है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महानिदेशक से लेकर चिकित्सा अधिकारियों के रूप में 1081 अधिकारी और डॉक्टर हैं। इसके अलावा 9694 पैरा मेडिकल और कर्मचारी हैं। इसके बावजूद राज्य की चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं है। कई अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है और कई अस्पतालों में निर्धारित मानक से अधिक चिकित्सक हैं। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग नए सिरे से ढांचे की पुनर्गठन करने पर विचार कर रहा है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पतालों में इंडियन हेल्थ स्टैंडर्ड (आईएचएस) के अनुरूप डॉक्टरों और पैरा मेडिकल की तैनाती हो इसके लिए नए सिरे से ढांचे के पुनर्गठन की योजना बनाई गई है। ढांचे के पुनर्गठन के बाबत अफसरों की टीम विभन्न पहलुओं का मंथन कर रही है। इसके अलावा हरिद्वार समेत राज्य के जिन जिलों में एक ही परिसर में महिला व पुरुष अस्पताल संचालित हैं उनका एकीकरण किया जाएगा। अस्पतालों में मानकों से अधिक डॉक्टरों व अन्य स्टाफ को कमी वाले अस्पतालों में भेजा जाएगा।
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मैदानी इलाके वाले अस्तपालाें में अधिक हैं डॉक्टर
सूत्राें की मानें तो राज्य के कई अस्पतालों खासकर मैदानी इलाके में स्थित अस्पतालों में तमाम ऐसे डॉक्टर, पैरामेडिकल तैनात है जहां पहले से ही डॉक्टरों की संख्या ज्यादा है। सूत्रों की मानें तो इन डॉक्टरों ने जुगाड़ लगाकर तैैनाती कराई है। बहरहाल यदि आईएचएस मानकोें के अनुरूप डॉक्टरों की तैनाती हुई तो इनका बोरिया बिस्तर बंधना तय है।
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