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उतराखंड की राजधानी न होना दुर्भाग्य पूर्ण

Mon, 29 Jan 2018 01:53 AM IST
Updated Mon, 29 Jan 2018 01:53 AM IST
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उतराखंड की राजधानी न होना दुर्भाग्य पूर्ण
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जिसकी अपनी कोई राजधानी नहीं है यह दुर्भाग्य है, इससे राज्य का कैसा विकास होगा। यह बात स्थायी राजधानी पर चर्चा करते हुए पूर्व प्रमुख सचिव सुरेंद्र सिंह पांगती ने कही।

पांगती रविवार को प्रेस क्लब में उत्तराखंड शोध संस्थान नवाभिव्यक्ति के तत्वावधान में आयोजित विचार गोष्ठी व कवि सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्थाई राजधानी घोषित न होने के राज्य का विकास अधर में है। इस अवसर पर उत्तराखंड शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एमआर सकलानी द्वारा सम्पादित ‘उत्तराखंड शोध संस्थान: एक झलक और आपकी संस्कृति आपकी पहचान’ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। विशिष्ट अतिथि संरक्षक चमन लाल ने कहा कि उत्तराखंड शोध संस्थान एक अखिल भारतीय स्तर का संस्थान है इसके 3500 सदस्य हैं। इसके अलावा गोष्ठी को कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम में सोमवारी लाल उनियाल, मोहन लाल नेगी, हेमचंद्र सकलानी, रोशन धस्माना, डॉ. डीएन भटकोटी, एलआर कोठियाल, ज्ञानेंद्र कुमार, विनोद उनियाल, राकेश बहुगुणा, भारती पांडे मौजूद रहे।
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