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मुकदमों की संख्या कम करेगा शिक्षा विभाग
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मुकदमों की संख्या कम करेगा शिक्षा विभाग
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। शिक्षा विभाग विभिन्न न्यायालयों में चल रहे मुकदमों की संख्या कम करेगा। इसके लिए मामलों की प्रभावी पैरवी करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही बातचीत के जरिये जिन मामलों में आपसी समझौते की गुंजाइश हो, उनमें अनावश्यक अपील से भी बचा जाएगा।
मौजूदा समय में विभिन्न न्यायालयों में शिक्षा विभाग के करीब पांच हजार मामले चल रहे हैं। इसमें से करीब 400 मामले ऐसे हैं, जिसमें शासन को पार्टी बनाया गया है। आए दिन इन मामलों की पैरवी, कोर्ट में पक्ष रखने, अपडेट करने और जवाब तैयार करने में अधिकारी व्यस्त रहते हैं। इसके चलते उनका ज्यादातर समय इसी में बीत जाता है। इसके चलते अन्य काम प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में विभाग अब मुकदमों की संख्या कम करने की दिशा में काम करेगा।
सचिव शिक्षा डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य भुगतान से संबंधित मामले भी लंबित हैं। इसके अलावा कई अन्य ऐसे मामले हैं, जिनमें विभाग लगातार अपील पर अपील कर रहा है। जबकि ऐसे मामले बहुत जल्द निस्तारित हो सकते हैं। विभाग ऐसे मामलों को निस्तारित करने पर फोकस करेगा। मुकदमों की संख्या कम होने से अधिकारियों पर बोझ कम होगा और वह विभागीय कार्यों पर फोकस कर सकेंगे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। शिक्षा विभाग विभिन्न न्यायालयों में चल रहे मुकदमों की संख्या कम करेगा। इसके लिए मामलों की प्रभावी पैरवी करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही बातचीत के जरिये जिन मामलों में आपसी समझौते की गुंजाइश हो, उनमें अनावश्यक अपील से भी बचा जाएगा।
मौजूदा समय में विभिन्न न्यायालयों में शिक्षा विभाग के करीब पांच हजार मामले चल रहे हैं। इसमें से करीब 400 मामले ऐसे हैं, जिसमें शासन को पार्टी बनाया गया है। आए दिन इन मामलों की पैरवी, कोर्ट में पक्ष रखने, अपडेट करने और जवाब तैयार करने में अधिकारी व्यस्त रहते हैं। इसके चलते उनका ज्यादातर समय इसी में बीत जाता है। इसके चलते अन्य काम प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में विभाग अब मुकदमों की संख्या कम करने की दिशा में काम करेगा।
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सचिव शिक्षा डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य भुगतान से संबंधित मामले भी लंबित हैं। इसके अलावा कई अन्य ऐसे मामले हैं, जिनमें विभाग लगातार अपील पर अपील कर रहा है। जबकि ऐसे मामले बहुत जल्द निस्तारित हो सकते हैं। विभाग ऐसे मामलों को निस्तारित करने पर फोकस करेगा। मुकदमों की संख्या कम होने से अधिकारियों पर बोझ कम होगा और वह विभागीय कार्यों पर फोकस कर सकेंगे।
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