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हरिद्वार रेंजर और वन दारोगा समेत तीन कर्मचारी हटाए
Updated Wed, 22 Aug 2018 02:16 AM IST
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हरिद्वार रेंजर और वन दारोगा समेत तीन कर्मचारी हटाए
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में मार्च में तेंदुए की खाल बरामद होने के मामले में आखिरकार रेंजर समेत तीन कर्मचारियाें पर कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन की रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख वन संरक्षक ने टाइगर रिजर्व पार्क की हरिद्वार रेंज के रेंजर, वन दारोगा व वनकर्मी समेत तीन कर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए अलग अलग कार्यालयों से संबद्ध कर दिया है। इस संवेदनशील प्रकरण में प्रमुख वन संरक्षक ने टाइगर रिजर्व के निदेशक व वार्डेन समेत सभी अधिकारियों, कर्मचारियों ने स्पष्टीकरण तलब किया था।
प्रमुख वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष जयराज ने बताया कि टाइगर रिजर्व के हरिद्वार रेंजर अनूप सिंह गुसाईं को उनके पद से हटाते हुए वन संरक्षक यमुना वृत्त कार्यालय से संबद्ध किया गया है। जबकि वन दारोगा अशोक सिंह व वनकर्मी प्रवेश कुमार को मुख्य वन संरक्षक अनुश्रवण एवं मूल्यांकन, आडिट कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
बता दें कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में 22 मार्च को तेंदुए की खाल के साथ ही मांस और हड्डियां बरामद की गईं थीं। जिन्हें पार्क के निदेशक सनातन सोनकर की मौजूदगी में मोतीचूर बंगले में सील कर दिया गया था। इसके बाद जांच पड़ताल के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजा गया था। बाद में प्रकरण की जांच कर रहे तत्कालीन जांच अधिकारी वार्डेन कोमल सिंह को हटा दिया गया था और जांच मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन को सौंपी गई थी।
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मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन ने प्रमुख वन संरक्षक को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि प्रकरण से जुड़े स्टाफ से हुई पूछताछ में बयानों में काफी विरोधाभास है। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के हरिद्वार क्षेत्राधिकारी अनूप सिंह गुसाईं, वन दारोगा अशोक सिंह, आरक्षी प्रवेश कुमार का तत्काल प्रभाव ने निलंबित करने की संस्तुति की थी। दूसरी ओर इस प्रकरण में राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के निदेशक सनातन सोनकर व वार्डेन कोमल सिंह से भी स्पष्टीकरण तलब मांगा गया था। जिस पर दोनों अफसरों ने अपना स्पष्टीकरण प्रमुख वन संरक्षक को दे दिया है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में मार्च में तेंदुए की खाल बरामद होने के मामले में आखिरकार रेंजर समेत तीन कर्मचारियाें पर कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन की रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख वन संरक्षक ने टाइगर रिजर्व पार्क की हरिद्वार रेंज के रेंजर, वन दारोगा व वनकर्मी समेत तीन कर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए अलग अलग कार्यालयों से संबद्ध कर दिया है। इस संवेदनशील प्रकरण में प्रमुख वन संरक्षक ने टाइगर रिजर्व के निदेशक व वार्डेन समेत सभी अधिकारियों, कर्मचारियों ने स्पष्टीकरण तलब किया था।
प्रमुख वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष जयराज ने बताया कि टाइगर रिजर्व के हरिद्वार रेंजर अनूप सिंह गुसाईं को उनके पद से हटाते हुए वन संरक्षक यमुना वृत्त कार्यालय से संबद्ध किया गया है। जबकि वन दारोगा अशोक सिंह व वनकर्मी प्रवेश कुमार को मुख्य वन संरक्षक अनुश्रवण एवं मूल्यांकन, आडिट कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
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बता दें कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में 22 मार्च को तेंदुए की खाल के साथ ही मांस और हड्डियां बरामद की गईं थीं। जिन्हें पार्क के निदेशक सनातन सोनकर की मौजूदगी में मोतीचूर बंगले में सील कर दिया गया था। इसके बाद जांच पड़ताल के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजा गया था। बाद में प्रकरण की जांच कर रहे तत्कालीन जांच अधिकारी वार्डेन कोमल सिंह को हटा दिया गया था और जांच मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन को सौंपी गई थी।
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मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन ने प्रमुख वन संरक्षक को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि प्रकरण से जुड़े स्टाफ से हुई पूछताछ में बयानों में काफी विरोधाभास है। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के हरिद्वार क्षेत्राधिकारी अनूप सिंह गुसाईं, वन दारोगा अशोक सिंह, आरक्षी प्रवेश कुमार का तत्काल प्रभाव ने निलंबित करने की संस्तुति की थी। दूसरी ओर इस प्रकरण में राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के निदेशक सनातन सोनकर व वार्डेन कोमल सिंह से भी स्पष्टीकरण तलब मांगा गया था। जिस पर दोनों अफसरों ने अपना स्पष्टीकरण प्रमुख वन संरक्षक को दे दिया है।