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बच्चों को प्यार जरूरी पर गलती पर डांट भी जरूरी
Updated Tue, 06 Feb 2018 01:32 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐसे माता-पिता को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं, जो बिना हेलमेट पहने बच्चों को दो पहिया वाहन चलाने से रोकते हैं। साथ ही बिना हेलमेट के पकड़े जाने पर उनको डांट भी लगाते हैं। सीएम ने कहा कि बच्चों के लिए प्यार जरूरी है, लेकिन गलती पर उनको डांट भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा संबंधी विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराए जा सकें, इसका पूरा प्रयास करेंगे। वह बाल अधिकार संरक्षण आयोग और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
सोमवार को सर्वे चौक के समीप स्थित आईआरडीटी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पहले तो अभिभावक बच्चों को हेलमेट लगाने के लिए टोकते नहीं और अगर पुलिस वाले उन्हें पकड़ लेते हैं तो तुरंत विधायक के फोन पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस ने नियमों का पालन करे या विधायक की बात सुने। एक वाकया सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक बार पुलिस ने कुछ युवाओं को पकड़ा तो उनके अभिभावकों ने आकर पुलिस वालों से कहा कि इन्हें खड़ा क्यों किया है, मुर्गा बनाइए। सीएम ने कहा कि बच्चों का शिक्षित होना बेहद जरूरी है। लिहाजा अभिभावक इस पर जोर दें।
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नीति निर्धारक बच्चों का व्यवहार समझें
बाल आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूरी ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा को लेकर सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। आज बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य सबसे कमजोर है। इसी कारण वे आत्महत्या और ड्रग्स लेने जैसे कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए बनाई जाने वाली पॉलिसी में नीति निर्धारक बच्चों के व्यवहार को समझें। नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायाधीश बीके बिष्ट ने कहा कि लंबे समय तक बच्चों से जुड़ी संस्थाओं से जुड़ा रहा हूं। बच्चों के क्राइम से जुड़े जो केस आते हैं, उनमें पहाड़ों की संख्या कम है। इस मौके पर आयोग के सदस्यों ने वाहन आदि की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। कार्यशाला में आईजी लॉ एंड ऑर्डर दीपम सेठ, बाल संरक्षण आयोग सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी, सदस्य शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, वाचस्पति सेमवाल, ललित सिंह, चंद्रशेखर करगेती, रमिंद्री मंद्रवाल, तृप्ता शर्मा, गीता खन्ना, मीना बिष्ट अन्य लोग आदि उपस्थित थे।
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प्रदेश में बच्चों के खिलाफ बड़ रहा अपराध
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने वर्ष 2016 की रिपोर्ट में प्रदेश को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक माना था। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन के डायरेक्टर ओम प्रकाश ने बताया कि पिछले छह वर्षों में यहां बच्चों के खिलाफ अपराधों में सात गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है, जो अन्य हिमालयी राज्यों के मुकाबले गंभीर है। वहीं, बच्चों से जुड़े अपराधों की सुनवाई के मामलों में राज्य की अदालतों में 90 फीसदी मामलों की सुनवाई लंबित है। बाल सुरक्षा नीति को साकार कर इसके क्रियान्वयन के लिए ठोस पहल की जरूरत है।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐसे माता-पिता को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं, जो बिना हेलमेट पहने बच्चों को दो पहिया वाहन चलाने से रोकते हैं। साथ ही बिना हेलमेट के पकड़े जाने पर उनको डांट भी लगाते हैं। सीएम ने कहा कि बच्चों के लिए प्यार जरूरी है, लेकिन गलती पर उनको डांट भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा संबंधी विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराए जा सकें, इसका पूरा प्रयास करेंगे। वह बाल अधिकार संरक्षण आयोग और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
सोमवार को सर्वे चौक के समीप स्थित आईआरडीटी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पहले तो अभिभावक बच्चों को हेलमेट लगाने के लिए टोकते नहीं और अगर पुलिस वाले उन्हें पकड़ लेते हैं तो तुरंत विधायक के फोन पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस ने नियमों का पालन करे या विधायक की बात सुने। एक वाकया सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक बार पुलिस ने कुछ युवाओं को पकड़ा तो उनके अभिभावकों ने आकर पुलिस वालों से कहा कि इन्हें खड़ा क्यों किया है, मुर्गा बनाइए। सीएम ने कहा कि बच्चों का शिक्षित होना बेहद जरूरी है। लिहाजा अभिभावक इस पर जोर दें।
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नीति निर्धारक बच्चों का व्यवहार समझें
बाल आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूरी ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा को लेकर सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। आज बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य सबसे कमजोर है। इसी कारण वे आत्महत्या और ड्रग्स लेने जैसे कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए बनाई जाने वाली पॉलिसी में नीति निर्धारक बच्चों के व्यवहार को समझें। नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायाधीश बीके बिष्ट ने कहा कि लंबे समय तक बच्चों से जुड़ी संस्थाओं से जुड़ा रहा हूं। बच्चों के क्राइम से जुड़े जो केस आते हैं, उनमें पहाड़ों की संख्या कम है। इस मौके पर आयोग के सदस्यों ने वाहन आदि की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। कार्यशाला में आईजी लॉ एंड ऑर्डर दीपम सेठ, बाल संरक्षण आयोग सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी, सदस्य शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, वाचस्पति सेमवाल, ललित सिंह, चंद्रशेखर करगेती, रमिंद्री मंद्रवाल, तृप्ता शर्मा, गीता खन्ना, मीना बिष्ट अन्य लोग आदि उपस्थित थे।
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प्रदेश में बच्चों के खिलाफ बड़ रहा अपराध
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने वर्ष 2016 की रिपोर्ट में प्रदेश को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक माना था। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन के डायरेक्टर ओम प्रकाश ने बताया कि पिछले छह वर्षों में यहां बच्चों के खिलाफ अपराधों में सात गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है, जो अन्य हिमालयी राज्यों के मुकाबले गंभीर है। वहीं, बच्चों से जुड़े अपराधों की सुनवाई के मामलों में राज्य की अदालतों में 90 फीसदी मामलों की सुनवाई लंबित है। बाल सुरक्षा नीति को साकार कर इसके क्रियान्वयन के लिए ठोस पहल की जरूरत है।