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जमींदारों के नाम आवंटित पट्टे निरस्त
Updated Mon, 19 Jun 2017 11:28 PM IST
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ग्राम प्रधान की ओर से दो साल पहले अपात्र एवं मानकों की अनदेखी कर आवंटित किए गए करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि के पट्टे एसडीएम कोर्ट ने 17 जून को निरस्त कर दिए हैं। आवंटित जमीन को फिर से ग्राम समाज के नाम करने के भी आदेश दिए गए हैं।
भगवानपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिसौना के मजरा गांव लाव्वा में वर्ष 2015 में तत्कालीन ग्राम प्रधान मोहम्मद शहजाद ने ग्राम समाज की करीब 200 बीघा जमीन के पट्टे 11 लोगों के नाम कर दी थी। पट्टे आवंटन में प्रधान एवं भूमि प्रबंधन समिति की ओर से न केवल मानकों की धज्जियां उड़ाई गई, बल्कि अपात्र लोगों को भी पट्टे आवंटित कर दिए गए। इसके विरोध में ग्रामीणों ने जून 2016 में एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया था। जांच पड़ताल में ग्राम प्रधान मोहम्मद शहजाद एवं भूमि प्रबंधन समिति के सचिव एवं लेखपाल रूपचंद की पूरी पोल खुलकर सामने आ गई। जांच अधिकारी तत्कालीन नायब तहसीलदार की रिपोर्ट में सामने आया कि जमीन चहेतों को देने के लिए नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। पंचायत ने उन लोगों के नाम भी पट्टे आवंटित कर दिए हैं जिनके पास पहले से कई बीघा जमीन हैं। ऐसे एक व्यक्ति को दो-दो पट्टे आवंटित किए जिसके पास पहले से कई बीघा जमीन हैं। अन्य पट्टेधारक भी अधिकतर दो ही परिवारों के हैं। इसके अलावा महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से तीन महिलाओं के नाम पट्टे आवंटित न करके केवल दो के नाम किए गए हैं। नायब तहसीलदार की आख्या पर एसडीएम अनिल सिंह गर्ब्याल की कोर्ट ने सभी आवंटित पट्टों को निरस्त कर दिया है। साथ ही पट्टों की भूमि को पुन: ग्राम समाज के नाम करने के आदेश दिए हैं।
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ग्राम प्रधान की ओर से दो साल पहले अपात्र एवं मानकों की अनदेखी कर आवंटित किए गए करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि के पट्टे एसडीएम कोर्ट ने 17 जून को निरस्त कर दिए हैं। आवंटित जमीन को फिर से ग्राम समाज के नाम करने के भी आदेश दिए गए हैं।
भगवानपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिसौना के मजरा गांव लाव्वा में वर्ष 2015 में तत्कालीन ग्राम प्रधान मोहम्मद शहजाद ने ग्राम समाज की करीब 200 बीघा जमीन के पट्टे 11 लोगों के नाम कर दी थी। पट्टे आवंटन में प्रधान एवं भूमि प्रबंधन समिति की ओर से न केवल मानकों की धज्जियां उड़ाई गई, बल्कि अपात्र लोगों को भी पट्टे आवंटित कर दिए गए। इसके विरोध में ग्रामीणों ने जून 2016 में एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया था। जांच पड़ताल में ग्राम प्रधान मोहम्मद शहजाद एवं भूमि प्रबंधन समिति के सचिव एवं लेखपाल रूपचंद की पूरी पोल खुलकर सामने आ गई। जांच अधिकारी तत्कालीन नायब तहसीलदार की रिपोर्ट में सामने आया कि जमीन चहेतों को देने के लिए नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। पंचायत ने उन लोगों के नाम भी पट्टे आवंटित कर दिए हैं जिनके पास पहले से कई बीघा जमीन हैं। ऐसे एक व्यक्ति को दो-दो पट्टे आवंटित किए जिसके पास पहले से कई बीघा जमीन हैं। अन्य पट्टेधारक भी अधिकतर दो ही परिवारों के हैं। इसके अलावा महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से तीन महिलाओं के नाम पट्टे आवंटित न करके केवल दो के नाम किए गए हैं। नायब तहसीलदार की आख्या पर एसडीएम अनिल सिंह गर्ब्याल की कोर्ट ने सभी आवंटित पट्टों को निरस्त कर दिया है। साथ ही पट्टों की भूमि को पुन: ग्राम समाज के नाम करने के आदेश दिए हैं।
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