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129 मलिन बस्तियों को मिलेगा मालिकाना हक
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नगर निगम बोर्ड बैठक में पार्षदों की समस्याओं का समाधान करते मेयर सुनील उनियाल गामा।
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देहरादून। नगर निगम बोर्ड बैठक में 129 मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग गई है। नगर निगम की ओर से करीब 40 हजार घरों पर हाउस टैक्स लगाया गया है। इनसे पिछले महीने से हाउस टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है। ऐसे में अब इन्हें मालिकाना हक दे दिया है।
वर्ष 1992 जब नगर निगम, नगर पालिका थी, तब मलिन बस्तियों पर भवन कर लगाया गया था। धर्मपुर विधायक विनोद चमोली उस समय हाउस टैक्स असेसमेंट कमेटी के अध्यक्ष थे। उस समय मलिन बस्तियों में घरों की संख्या करीब 20 हजार थी। वर्ष 1998 में नगर निगम तो बन गया, लेकिन यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसकी वजह पालिका में रेंटल वैल्यू के आधार पर कर वसूला जाता था, जबकि निगम बनने पर कारपेट एरिया का नियम लागू हो गया। जिसके कारण मलिन बस्तियों के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी कर में संशोधन नहीं हो सका। जबकि हर पांच साल बाद संशोधन जरूरी है। वर्ष 2013 में तत्कालीन मेयर विनोद चमोली ने भवन कर में संशोधन किया था। लेकिन, मलिन बस्तियों का हाउस स्थगित ही रहा, जिसे नगर निगम के मौजूदा ने लागू कर दिया। वहीं, मलिन बस्ती को मालिकाना हक देने की मांग भी काफी समय से की जा रही है। जिस पर शुक्रवार को बोर्ड ने मुहर लगा दी। मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने पर पार्षदों ने मेयर गामा को बधाई दी।
मलिन बस्तियां नेता लोग बसाते हैं। इन्हें बिजली-पानी के कनेक्शन भी नेता उपलब्ध करवा देते हैं। लेकिन मालिकाना हक नहीं दे पाते। निगम ने 129 मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देकर बहुत बड़ा काम किया है। यह हजारों लोगों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। खजान दास, विधायक, राजपुर विधानसभा क्षेत्र
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वर्ष 1992 जब नगर निगम, नगर पालिका थी, तब मलिन बस्तियों पर भवन कर लगाया गया था। धर्मपुर विधायक विनोद चमोली उस समय हाउस टैक्स असेसमेंट कमेटी के अध्यक्ष थे। उस समय मलिन बस्तियों में घरों की संख्या करीब 20 हजार थी। वर्ष 1998 में नगर निगम तो बन गया, लेकिन यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसकी वजह पालिका में रेंटल वैल्यू के आधार पर कर वसूला जाता था, जबकि निगम बनने पर कारपेट एरिया का नियम लागू हो गया। जिसके कारण मलिन बस्तियों के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी कर में संशोधन नहीं हो सका। जबकि हर पांच साल बाद संशोधन जरूरी है। वर्ष 2013 में तत्कालीन मेयर विनोद चमोली ने भवन कर में संशोधन किया था। लेकिन, मलिन बस्तियों का हाउस स्थगित ही रहा, जिसे नगर निगम के मौजूदा ने लागू कर दिया। वहीं, मलिन बस्ती को मालिकाना हक देने की मांग भी काफी समय से की जा रही है। जिस पर शुक्रवार को बोर्ड ने मुहर लगा दी। मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने पर पार्षदों ने मेयर गामा को बधाई दी।
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मलिन बस्तियां नेता लोग बसाते हैं। इन्हें बिजली-पानी के कनेक्शन भी नेता उपलब्ध करवा देते हैं। लेकिन मालिकाना हक नहीं दे पाते। निगम ने 129 मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देकर बहुत बड़ा काम किया है। यह हजारों लोगों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। खजान दास, विधायक, राजपुर विधानसभा क्षेत्र
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