{"_id":"5c9e787abdec2213fd299b92","slug":"121553889402-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फार्मेसिस्टों के दबाव में झुका निदेशालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फार्मेसिस्टों के दबाव में झुका निदेशालय
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। फार्मेसिस्टों के दबाव में आकर आखिरकार निदेशालय ने एरियर भुगतान के लिए लगाई शर्त वापस ले ली है। फार्मेसिस्टों को अब एरियर लेते समय शपथपत्र नहीं देना होगा। इस संबंध में फार्मेसिस्ट एसोसिएशन की शासन से भी वार्ता हो चुकी है।
शासन ने 31 मार्च तक सभी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके स्वास्थ्य महानिदेशालय ने फार्मेसिस्टों के एरियर भुगतान पर रोक लगा दी थी। इस संबंध में तीन दिन पहले फार्मेसिस्टों का एक प्रतिनिधिमंडल शासन के अधिकारियों से मिला था। उसके बाद वित्त निदेशक से मुलाकात की। यहां आकर पता चला कि यह रोक वित्त विभाग को विश्वास में लिए बिना ही लगाई गई है। ऐसे में जब महानिदेशक से वार्ता हुई तो उन्होंने एरियर भुगतान देने में हामी भर दी। साथ ही शर्त भी थोप दी कि सभी फार्मेसिस्टों को एक शपथपत्र देना होगा जब एरियर भुगतान की रिकवरी आदि का बात आएगी तो उन्हें जमा कराना होगा। इस पर फार्मेसिस्ट राजी नहीं हुए और बृहस्पतिवार को उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक का घेराव कर दिया। उसके बाद महानिदेशक ने समस्या का हल निकालने के लिए शुक्रवार को उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। शुक्रवार को फार्मेसिस्ट स्वास्थ्य महानिदेशक से मिले। इसके बाद स्वास्थ्य महानिदेशक ने गत 26 मार्च को दिए आदेश में लगी शर्त को वापस ले लिया। अब फार्मेसिस्टों को शपथपत्र नहीं देना होगा। उसके बाद फार्मेसिस्टों ने राहत की सांस ली है।
फार्मेसिस्टों से अब शपथपत्र नहीं लिया जाएगा। हालांकि, इसके अलावा सभी शर्तें पहले जैसी हैं। उम्मीद है वह सभी शर्तें फार्मेसिस्टों को मंजूर होगी।
डॉ रविंद्र थपलियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक
विज्ञापन
देहरादून। फार्मेसिस्टों के दबाव में आकर आखिरकार निदेशालय ने एरियर भुगतान के लिए लगाई शर्त वापस ले ली है। फार्मेसिस्टों को अब एरियर लेते समय शपथपत्र नहीं देना होगा। इस संबंध में फार्मेसिस्ट एसोसिएशन की शासन से भी वार्ता हो चुकी है।
शासन ने 31 मार्च तक सभी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके स्वास्थ्य महानिदेशालय ने फार्मेसिस्टों के एरियर भुगतान पर रोक लगा दी थी। इस संबंध में तीन दिन पहले फार्मेसिस्टों का एक प्रतिनिधिमंडल शासन के अधिकारियों से मिला था। उसके बाद वित्त निदेशक से मुलाकात की। यहां आकर पता चला कि यह रोक वित्त विभाग को विश्वास में लिए बिना ही लगाई गई है। ऐसे में जब महानिदेशक से वार्ता हुई तो उन्होंने एरियर भुगतान देने में हामी भर दी। साथ ही शर्त भी थोप दी कि सभी फार्मेसिस्टों को एक शपथपत्र देना होगा जब एरियर भुगतान की रिकवरी आदि का बात आएगी तो उन्हें जमा कराना होगा। इस पर फार्मेसिस्ट राजी नहीं हुए और बृहस्पतिवार को उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक का घेराव कर दिया। उसके बाद महानिदेशक ने समस्या का हल निकालने के लिए शुक्रवार को उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। शुक्रवार को फार्मेसिस्ट स्वास्थ्य महानिदेशक से मिले। इसके बाद स्वास्थ्य महानिदेशक ने गत 26 मार्च को दिए आदेश में लगी शर्त को वापस ले लिया। अब फार्मेसिस्टों को शपथपत्र नहीं देना होगा। उसके बाद फार्मेसिस्टों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
फार्मेसिस्टों से अब शपथपत्र नहीं लिया जाएगा। हालांकि, इसके अलावा सभी शर्तें पहले जैसी हैं। उम्मीद है वह सभी शर्तें फार्मेसिस्टों को मंजूर होगी।
डॉ रविंद्र थपलियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक