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कृषि विभाग में पानी टैंक खरीद में घपला सूचना के अधिकार अधिनियम में सामने

Sun, 04 Feb 2018 02:01 AM IST
Updated Sun, 04 Feb 2018 02:01 AM IST
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कृषि विभाग में पानी टैंक खरीद में घपला    सूचना के अधिकार अधिनियम में सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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कृषि विभाग में माइक्रो मोड योजना के तहत पीवीसी टैंक खरीद में घपला सामने आया है। विभाग ने बगैर गुणवत्ता सुनिश्चित किए 2871 रुपये प्रति टैंक के हिसाब से एक फर्म से 167 टैंक खरीद लिए। जबकि, विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि यह फर्म अपंजीकृत प्रतीत हो रही है। वहीं, कृषि निदेशक की ओर से मुख्य कृषि अधिकारी, रुद्रप्रयाग को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जिस फर्म से टैंक खरीदे गए वे अस्तित्व में ही नहीं है।
दून के चमन विहार निवासी एक व्यक्ति ने विभाग से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत रुद्रप्रयाग जनपद में किसानों को टैंक वितरण और वर्ष 2011 से 2015 तक इसके ऑडिट की रिपोर्ट मांगी थी। इसी रिपोर्ट से किसानों को टैंकों के वितरण में हुई गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग में माइक्रो मोड योजना के तहत 2011-12 में पीवीसी टैंकों की आपूर्ति के लिए निविदाएं आमंत्रित की गईं। इसमें मैसर्स सिद्धबली पालीमर्स, कोटद्वार की न्यूनतम निविदा स्वीकृत की गई, लेकिन तत्कालीन मुख्य कृषि अधिकारी ने फर्म की ओर से गुणवत्ता प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं कराने पर इसे निरस्त कर दिया। इसके बाद मुख्य कृषि अधिकारी ने 2871 रुपये प्रति टैंक के हिसाब से 167 टैंक देहरादून की एक फर्म से खरीदना दर्शाया।
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लेकिन इस फर्म से कोई गुणवत्ता प्रमाण-पत्र नहीं लिया गया और न ही इसके टिन नंबर की जांच की गई। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि निविदा दाता की निविदा पूर्ण नहीं थी तो उसे निविदा में शामिल नहीं करना चाहिए था। साथ ही फर्म से गुणवत्ता प्रमाण-पत्र लिया जाना चाहिए था। रिपोर्ट में कहा गया है कि रुद्रप्रयाग के किसान देहरादून से टैंक खरीदें यह भी विभागीय अधिकारियों के निर्देश के बगैर संभव नहीं था। मामले में 14 मार्च 2015, 17 अप्रैल 2015 और 28 अक्तूबर 2017 को गुणवत्ता प्रमाण-पत्र के लिए फर्म को लिखा गया, लेकिन विभाग को इसका जवाब तक नहीं मिला। इस प्रकरण में 14 किसानों से कृषक अंश मिले बगैर ही उन्हें सब्सिडी का भुगतान किया गया। वहीं, जांच में भुगतान की गई धनराशि के बिल-बाउचर भी नहीं मिले।
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‘जो फर्म है नहीं, उससे खरीद लिए वाटर टैंक’
कृषि निदेशक गौरी शंकर ने मामले में 14 नवंबर 2017 को मुख्य कृषि अधिकारी, रुद्रप्रयाग को पत्र लिखकर कहा है कि फर्म की ओर से आपूर्ति वाटर टैंकों के बिलों पर गुणवत्ता का प्रमाण-पत्र अंकित नहीं किया गया है। संबंधित फर्म को इस संबंध में कई बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन उसकी ओर से पत्र प्राप्त नहीं किए जा रहे हैं। उसका टिन नंबर भी सही प्रतीत नहीं होता है। ऐसा लगता है कि यह फर्म अस्तित्व में ही नहीं है। लिहाजा इस संबंध में 13 बिंदुओं पर सूचना उपलब्ध कराई जाए।

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यह मुझसे पहले का मामला है बीच में मेरा स्वास्थ्य भी ठीक नहीं था, मुझ इस प्रकरण की कोई खास जानकारी नहीं है।
-आरपीएस रावत, मुख्य कृषि अधिकारी रुद्रप्रयाग

ऑडिट में कुछ आया है तो उसका निस्तारण कर दिया गया होगा, यह अधिकारियों की आपसी रंजिश का मामला है, एक अधिकारी दूसरे के खिलाफ कार्रवाई चाहता है अब दूसरा भी इसी तरह की कार्रवाई करेगा।-गौरीशंकर, कृषि निदेशक
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