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आरटीओ में गोलमाल, जांच शुरू
Updated Sun, 21 Jan 2018 02:25 AM IST
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ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून।
आरटीओ में तैनात एक बाबू पर गाड़ियों की फिटनेस पेनाल्टी शुल्क में हेराफेरी कर लाखों रुपये का गोलमाल करने की बात सामने आई है। शनिवार को आरटीओ कार्यालय में मामले में जांच शुरू होने की चर्चाएं रहीं। सूत्रों का कहना है कि बाबू पूर्व में भी विवादों में रहा है।
सूत्रों के मुताबिक आरटीओ में कार्यरत एक बाबू पर आरोप है कि 110 गाड़ियों की पेनाल्टी फिटनेस में गड़बड़ी कर विभाग को लाखों का चूना लगाया है। यह हेराफेरी गाड़ी संचालकों से साठगांठ कर की गई है। मामला कई माह पुराना बताया गया है। बताया जा रहा है कि मामले में एक शिकायत पर परिवहन मंत्री ने भी जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में चली गई। अब फिर से मामले में एक व्यक्ति ने शिकायत की। आरटीओ सूत्रों के मुताबिक विभाग के एक अधिकारी ने मामले में जांच शुरू कर दी है। मामले में पत्रावलियों की उन्होंने जांच भी शुरू कर दी है। इस गोलमाल की चर्चाएं पिछले कई दिनों से कर्मचारियों के बीच दबी जुबान से हो रही थी। लेकिन शनिवार को चर्चा हर अनुभाग में कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों के कानों तक पहुंची। इस संबंध में आरटीओ सुधांशु गर्ग से जानकारी लेने को संपर्क किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। एआरटीओ अरविंद पांडे का भी फोन बंद मिला।
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आरटीओ में तैनात एक बाबू पर गाड़ियों की फिटनेस पेनाल्टी शुल्क में हेराफेरी कर लाखों रुपये का गोलमाल करने की बात सामने आई है। शनिवार को आरटीओ कार्यालय में मामले में जांच शुरू होने की चर्चाएं रहीं। सूत्रों का कहना है कि बाबू पूर्व में भी विवादों में रहा है।
सूत्रों के मुताबिक आरटीओ में कार्यरत एक बाबू पर आरोप है कि 110 गाड़ियों की पेनाल्टी फिटनेस में गड़बड़ी कर विभाग को लाखों का चूना लगाया है। यह हेराफेरी गाड़ी संचालकों से साठगांठ कर की गई है। मामला कई माह पुराना बताया गया है। बताया जा रहा है कि मामले में एक शिकायत पर परिवहन मंत्री ने भी जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में चली गई। अब फिर से मामले में एक व्यक्ति ने शिकायत की। आरटीओ सूत्रों के मुताबिक विभाग के एक अधिकारी ने मामले में जांच शुरू कर दी है। मामले में पत्रावलियों की उन्होंने जांच भी शुरू कर दी है। इस गोलमाल की चर्चाएं पिछले कई दिनों से कर्मचारियों के बीच दबी जुबान से हो रही थी। लेकिन शनिवार को चर्चा हर अनुभाग में कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों के कानों तक पहुंची। इस संबंध में आरटीओ सुधांशु गर्ग से जानकारी लेने को संपर्क किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। एआरटीओ अरविंद पांडे का भी फोन बंद मिला।
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