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देश में 62 प्रतिशत मौत की वजह गैर संचारी रोग
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
जीएमएस रोड स्थित एक होटल में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल मेडिकल साइंस एकेडमी (इमसा) का सम्मेलन शनिवार को संपन्न हो गया। ‘गैर संचारी रोगों के निवारण एवं बचाव के क्षेत्र में चुनौतियां’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे चिकित्सकों ने शोध प्रस्तुत किए गए। बताया कि भारत में 62 प्रतिशत मौत की वजह गैर संचारी रोग है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी दिल्ली और हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विवि की ओर से आयोजित सम्मेलन में डॉ. भोला नाथ ने बताया कि दुनिया में 72 प्रतिशत मौत का कारण गैर संचारी रोग तथा नौ प्रतिशत मौत की वजह संचारी रोग है। भारत में यह आंकड़ा क्रमश: 62 व 27 प्रतिशत है। एक शोध में बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया में उच्च रक्तचाप, असंतुलित आहार एवं वायु प्रदूषण गैर संचारी रोगों के मुख्य कारण है। इसमे सबसे अधिक मौतें, हृदय रोग से संबंधित बीमारियों के कारण होती है। इसके बाद श्वांस रोग, कैंसर एवं डायबिटीज का स्थान आता है। इन रोगों से 15-69 आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते है। प्रो. रविंद्र कुमार गुप्ता ने बच्चों में बढ़ते मोटापा, डायबिटीज, मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल से गैर संचारी रोगों के होने की संभावनाओं से संबंधित शोध प्रस्तुत किया। सीमा डेंटल कॉलेज ऋषिकेश की डॉ. ज्योत्सना सेठ ने बताया कि गैर संचारी रोगों के निवारण में ओरल हेल्थ की भूमिका की जानकारी दी। एम्स जोधपुर की डॉ. नीति रस्तोगी ने कहा कि सामाजिक भागीदारी और शिक्षा के जरिये गैर संचारी रोगों के बारे में जागरुकता फैलाई जा सकती है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के डॉ. शिव कुमार यादव, डॉ. नवनीत जैन एवं डॉ. रुचि ने भी विचार रखे। सम्मेलन का समापन राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की डॉ. अनुपमा आर्या ने किया। इस दौरान अध्यक्ष इमसा डॉ. के. जगदीशन, डॉ. आरके ठुकराल, डॉ. हेमचंद्र पांडेय, डॉ. संजय गौड़, डॉ. आशुतोष सयाना, डॉ. सुरेखा किशोर आदि मौजूद रहे।
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जीएमएस रोड स्थित एक होटल में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल मेडिकल साइंस एकेडमी (इमसा) का सम्मेलन शनिवार को संपन्न हो गया। ‘गैर संचारी रोगों के निवारण एवं बचाव के क्षेत्र में चुनौतियां’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे चिकित्सकों ने शोध प्रस्तुत किए गए। बताया कि भारत में 62 प्रतिशत मौत की वजह गैर संचारी रोग है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी दिल्ली और हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विवि की ओर से आयोजित सम्मेलन में डॉ. भोला नाथ ने बताया कि दुनिया में 72 प्रतिशत मौत का कारण गैर संचारी रोग तथा नौ प्रतिशत मौत की वजह संचारी रोग है। भारत में यह आंकड़ा क्रमश: 62 व 27 प्रतिशत है। एक शोध में बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया में उच्च रक्तचाप, असंतुलित आहार एवं वायु प्रदूषण गैर संचारी रोगों के मुख्य कारण है। इसमे सबसे अधिक मौतें, हृदय रोग से संबंधित बीमारियों के कारण होती है। इसके बाद श्वांस रोग, कैंसर एवं डायबिटीज का स्थान आता है। इन रोगों से 15-69 आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते है। प्रो. रविंद्र कुमार गुप्ता ने बच्चों में बढ़ते मोटापा, डायबिटीज, मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल से गैर संचारी रोगों के होने की संभावनाओं से संबंधित शोध प्रस्तुत किया। सीमा डेंटल कॉलेज ऋषिकेश की डॉ. ज्योत्सना सेठ ने बताया कि गैर संचारी रोगों के निवारण में ओरल हेल्थ की भूमिका की जानकारी दी। एम्स जोधपुर की डॉ. नीति रस्तोगी ने कहा कि सामाजिक भागीदारी और शिक्षा के जरिये गैर संचारी रोगों के बारे में जागरुकता फैलाई जा सकती है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के डॉ. शिव कुमार यादव, डॉ. नवनीत जैन एवं डॉ. रुचि ने भी विचार रखे। सम्मेलन का समापन राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की डॉ. अनुपमा आर्या ने किया। इस दौरान अध्यक्ष इमसा डॉ. के. जगदीशन, डॉ. आरके ठुकराल, डॉ. हेमचंद्र पांडेय, डॉ. संजय गौड़, डॉ. आशुतोष सयाना, डॉ. सुरेखा किशोर आदि मौजूद रहे।
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