{"_id":"5be89093bdec2269b7317426","slug":"11541968019-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज्य में सभी क्लीनिक व अस्पतालों का पंजीकरण होगा अनिवार्य, आईएमए ने तैयार किया नया मसौदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राज्य में सभी क्लीनिक व अस्पतालों का पंजीकरण होगा अनिवार्य, आईएमए ने तैयार किया नया मसौदा
Updated Mon, 12 Nov 2018 01:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। केंद्र सरकार की ओर से लागू क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की तर्ज पर राज्य में ‘उत्तराखंड नर्सिंग होम एक्ट’ लागू करने को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने नया मसौदा तैयार कर लिया है। इसके तहत सभी क्लीनिकों और निजी अस्पतालों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। आईएमए पदाधिकारियों ने मसौदे को सचिव स्वास्थ्य को सौंप दिया है। अब शासन स्तर पर इसका परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद इसे लागू करने पर विचार विमर्श किया जाएगा।
आईएमए उत्तराखंड के संयुक्त सचिव एवं सीईए कमेटी के चेयरमैन डॉ. अजय खन्ना ने बताया कि डॉक्टरों से चर्चा के बाद मसौदा तैयार कर लिया गया है। इसके तहत राज्य में सभी क्लीनिक व अस्पतालों को न सिर्फ नियमानुसार पंजीकरण कराना होगा, बल्कि अस्पतालों में मरीजों के लिए व्यवस्थाएं भी करनी होंगी। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत मरीजों के रिकॉर्ड की भी विस्तृत जानकारी रखनी होगी। अस्पताल चाहे दो बेड को हो या 100 बेड का सभी को पंजीकरण कराना होगा। ज्ञात हो कि पहले आईएमए पदाधिकारियों ने मांग उठाई थी कि 50 से कम क्षमता वाले अस्पतालों को पंजीकरण से छूट दी जाए। इसे स्वास्थ्य सचिव ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब जो मसौदा तैयार किया है उसमें सभी छोटे बड़े अस्पतालों को पंजीकरण की अनिवार्यता लागू की है। आईएमए संयुक्त सचिव डॉ. अजय खन्ना के मुताबिक फिलहाल उत्तराखंड नर्सिंग होम एक्ट के नए मसौदे को सचिव स्वास्थ्य नीतेश कुमार झा को सौंप दिया है। अब शासन स्तर पर विशेषज्ञों की कमेटी मसौदे का अपने तरीके से परीक्षण करेगी। इसी माह के तीसरे हफ्ते में सचिव की अध्यक्षता में आईएमए पदाधिकारियों व डॉक्टरों की बैठक होगी जिसमें अन्य पहलुओं पर चर्चा करने के बाद मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संयुक्त सचिव डॉ. अजय खन्ना ने बताया कि कि फिलहाल उत्तराखंड नर्सिंग होम एक्ट का जो मसौदा तैयार किया है यदि उसे लागू किया जाता है तो भविष्य में राज्य के भीतर बिना वैध डिग्री के क्लीनिक व अस्पताल संचालित करने वाले डॉक्टर इलाज नहीं कर पाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
देहरादून। केंद्र सरकार की ओर से लागू क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की तर्ज पर राज्य में ‘उत्तराखंड नर्सिंग होम एक्ट’ लागू करने को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने नया मसौदा तैयार कर लिया है। इसके तहत सभी क्लीनिकों और निजी अस्पतालों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। आईएमए पदाधिकारियों ने मसौदे को सचिव स्वास्थ्य को सौंप दिया है। अब शासन स्तर पर इसका परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद इसे लागू करने पर विचार विमर्श किया जाएगा।
आईएमए उत्तराखंड के संयुक्त सचिव एवं सीईए कमेटी के चेयरमैन डॉ. अजय खन्ना ने बताया कि डॉक्टरों से चर्चा के बाद मसौदा तैयार कर लिया गया है। इसके तहत राज्य में सभी क्लीनिक व अस्पतालों को न सिर्फ नियमानुसार पंजीकरण कराना होगा, बल्कि अस्पतालों में मरीजों के लिए व्यवस्थाएं भी करनी होंगी। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत मरीजों के रिकॉर्ड की भी विस्तृत जानकारी रखनी होगी। अस्पताल चाहे दो बेड को हो या 100 बेड का सभी को पंजीकरण कराना होगा। ज्ञात हो कि पहले आईएमए पदाधिकारियों ने मांग उठाई थी कि 50 से कम क्षमता वाले अस्पतालों को पंजीकरण से छूट दी जाए। इसे स्वास्थ्य सचिव ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब जो मसौदा तैयार किया है उसमें सभी छोटे बड़े अस्पतालों को पंजीकरण की अनिवार्यता लागू की है। आईएमए संयुक्त सचिव डॉ. अजय खन्ना के मुताबिक फिलहाल उत्तराखंड नर्सिंग होम एक्ट के नए मसौदे को सचिव स्वास्थ्य नीतेश कुमार झा को सौंप दिया है। अब शासन स्तर पर विशेषज्ञों की कमेटी मसौदे का अपने तरीके से परीक्षण करेगी। इसी माह के तीसरे हफ्ते में सचिव की अध्यक्षता में आईएमए पदाधिकारियों व डॉक्टरों की बैठक होगी जिसमें अन्य पहलुओं पर चर्चा करने के बाद मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
विज्ञापन
संयुक्त सचिव डॉ. अजय खन्ना ने बताया कि कि फिलहाल उत्तराखंड नर्सिंग होम एक्ट का जो मसौदा तैयार किया है यदि उसे लागू किया जाता है तो भविष्य में राज्य के भीतर बिना वैध डिग्री के क्लीनिक व अस्पताल संचालित करने वाले डॉक्टर इलाज नहीं कर पाएंगे।
विज्ञापन