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गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच की संख्या बढ़ाने पर विचार
Updated Fri, 19 Oct 2018 02:09 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय महिला के गर्भधारण से लेकर प्रसव पूर्व तक होने वाली चिकित्सकीय जांच की संख्या चार से बढ़ाकर दोगुना करने पर विचार विमर्श कर रहा है। योजना को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के एनएचएच राज्य परियोजना निदेशकों से रिपोर्ट तलब करने के साथ ही दिल्ली में दो दिवसीय बैठक भी बुलाई है। इसमें तमाम पहलुओें पर विचार विमर्श किया जाएगा।
अपर सचिव स्वास्थ्य व राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य परियोजना निदेशक युगल किशोर पंत ने बताया कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती को गर्भधारण की तिथि से लेकर प्रसव पूर्व तक चार बार निशुल्क जांच की सुविधा दी जाती है। इसे एंटी नेटल चेकअप यानी एएनसी कहा जाता है। एएनसी के दौरान महिला की गहन चिकित्सकीय जांच की जाती है। लेकिन, अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एएनसी की संख्या बढ़ाना चाहता है, जिसके लिए सभी राज्यों से प्रस्ताव भी मांगा गया है।
अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सरोज नैथानी का कहना है कि एएनसी को लेकर पहले स्थिति ठीक नहीं थी। ज्यादातर महिलाओं को एएनसी के बारे में जानकारी ही नहीं थी। लेकिन, अब महिलाएं जागरूक हुई हैं और स्थिति में काफी सुधार हुआ है। यदि एएनसी की संख्या बढ़ायी जाती है, तो इससे मातृ शिशु मृत्यु दर में सुधार होगा।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय महिला के गर्भधारण से लेकर प्रसव पूर्व तक होने वाली चिकित्सकीय जांच की संख्या चार से बढ़ाकर दोगुना करने पर विचार विमर्श कर रहा है। योजना को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के एनएचएच राज्य परियोजना निदेशकों से रिपोर्ट तलब करने के साथ ही दिल्ली में दो दिवसीय बैठक भी बुलाई है। इसमें तमाम पहलुओें पर विचार विमर्श किया जाएगा।
अपर सचिव स्वास्थ्य व राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य परियोजना निदेशक युगल किशोर पंत ने बताया कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती को गर्भधारण की तिथि से लेकर प्रसव पूर्व तक चार बार निशुल्क जांच की सुविधा दी जाती है। इसे एंटी नेटल चेकअप यानी एएनसी कहा जाता है। एएनसी के दौरान महिला की गहन चिकित्सकीय जांच की जाती है। लेकिन, अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एएनसी की संख्या बढ़ाना चाहता है, जिसके लिए सभी राज्यों से प्रस्ताव भी मांगा गया है।
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अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सरोज नैथानी का कहना है कि एएनसी को लेकर पहले स्थिति ठीक नहीं थी। ज्यादातर महिलाओं को एएनसी के बारे में जानकारी ही नहीं थी। लेकिन, अब महिलाएं जागरूक हुई हैं और स्थिति में काफी सुधार हुआ है। यदि एएनसी की संख्या बढ़ायी जाती है, तो इससे मातृ शिशु मृत्यु दर में सुधार होगा।
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