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पौधे रोपकर करें प्रकृति का शृंगार
Updated Fri, 20 Jul 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
धाद संस्था ने चशायर होम और निशक्तजन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र मेें विशेष बच्चों के साथ पौधे लगाकर हरेला पर्व मनाया। इस दौरान धाद संस्था के सदस्यों ने बच्चों से पौधे रोपकर प्रकृति का शृृंगार करने का आह्वान किया। अमर उजाला इस आयोजन का मीडिया पार्टनर है।
मोहिनी रोड स्थित चशायर होम और जीएमएस रोड स्थित निशक्तजन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र में बृहस्पतिवार को धाद ने बच्चों को पौधे भेंटकर हरेला कार्यक्रम की शुरुआत की। युवा धाद के अपूर्व आनंद, अनुव्रत नवानी, शिमोना रावत और प्रमोद पांडेय ने बच्चों को पौधे भेंट किए। शिमोना रावत ने कहा कि हरेला केवल पौधा लगाने का नहीं बल्कि दुनिया को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने का भी अभियान है। वास्तव में हरेला प्रकृति के संरक्षण और प्रेम का प्रतीक पर्व है। ऐसे में हम सभी को पर्यावरण बचाने के साथ ही समाज में प्रेम और स्नेह का वातावरण बनाने के लिए आगे आना होगा। चशायर होम के नीरज और ममता गुप्ता ने कहा कि विशेष बच्चों को हरेला जैसे महत्वपूर्ण आयोजन से जोड़कर धाद ने नई पहल की है।
इससे बच्चों में नए उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होगा। पौधों की रक्षा का संकल्प लेने से बच्चे भावनात्मक रूप से भी जुड़ेंगे। धाद के नीरज ने समाज के अन्य वर्ग के लोगों से भी विशेष बच्चों को अपनी गतिविधियों में शामिल करने की अपील की। निशक्तजन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र की भारती पांडे ने बताया कि विशेष बच्चे भी बाहर जाकर खेलना और दुनिया देखना चाहते हैं। वह हर सामाजिक और मनोरंजन की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर दिलचस्पी भी लेते हैं। इन बच्चों ने बीते वर्षों के दौरान राजधानी समेत आसपास के क्षेत्रों में 500 से अधिक पौधे लगाए हैं। कार्यक्रम में हर्षमणि व्यास, तन्मय ममगाईं, शोभा रतूड़ी, रीता भंडारी, विजय जुयाल, नीरज आदि मौजूद रहे।
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पौधे लगाकर लिया उनकी रक्षा का संकल्प
देहरादून। वरदान संस्था ने हरेला महोत्सव के तहत बृहस्पतिवार को मोहकमपुर क्षेत्र में पौधे लगाकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। अध्यक्ष विनोद रावत ने क्षेत्रवासियों से कार्यक्रम में प्रतिभाग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि हरेला महोत्सव के इतर अलग-अलग क्षेत्रों में पर्यावरण और लोक संस्कृति के उत्थान से जुड़ी गतिविधियां आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को हरेला से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश की बोली-भाषा को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया जा रहा है। कार्यकारी सचिव मनोज चन्दोला ने बताया कि वरदान संस्था ने गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की वर्णमाला की किताब ‘आखर ज्ञान’ तैयार की है, जो सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में दो वर्षों से पढ़ाई भी जा रही है। वर्णमाला का कैलेंडर भी तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी बोली-भाषा से जोड़ने में यह किताब फायदेमंद साबित होगी। पौधरोपण करने वालों में अरुण सती, मनीष पोखरियाल, प्रशांत पोखरियाल, साक्षी, लक्ष्मी चमोली, मंजू सती, मनोहर, संदीप, विजय आदि शामिल रहे।
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आप भी बनाएं हरेला क्लब
एक महीने के हरेला महोत्सव के अंतर्गत धाद की ओर से हरेला क्लब का गठन किया गया है। इसके अलावा कोई भी स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्था, कॉलोनी अपने यहां हरेला क्लब का गठन कर सकता है। इसमें 14 से 25 वर्ष के कम से कम 25 छात्र-छात्राओं को शामिल किया जा सकता है। प्रत्येक सदस्य को हर माह 10 रुपये का योगदान भी देना होगा। यह राशि धाद की ओर से बनाए जाने वाले हरेला अंबेसडर को दी जाएगी, जो नियमित तौर पर पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेंगे। धाद की ओर से क्लब को प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। हरेल क्लब और महोत्सव से जुड़ने के लिए मोबाइल नंबर 9412050315, 9897868450 और 9675730046 पर संपर्क किया जा सकता है।
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धाद संस्था ने चशायर होम और निशक्तजन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र मेें विशेष बच्चों के साथ पौधे लगाकर हरेला पर्व मनाया। इस दौरान धाद संस्था के सदस्यों ने बच्चों से पौधे रोपकर प्रकृति का शृृंगार करने का आह्वान किया। अमर उजाला इस आयोजन का मीडिया पार्टनर है।
मोहिनी रोड स्थित चशायर होम और जीएमएस रोड स्थित निशक्तजन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र में बृहस्पतिवार को धाद ने बच्चों को पौधे भेंटकर हरेला कार्यक्रम की शुरुआत की। युवा धाद के अपूर्व आनंद, अनुव्रत नवानी, शिमोना रावत और प्रमोद पांडेय ने बच्चों को पौधे भेंट किए। शिमोना रावत ने कहा कि हरेला केवल पौधा लगाने का नहीं बल्कि दुनिया को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने का भी अभियान है। वास्तव में हरेला प्रकृति के संरक्षण और प्रेम का प्रतीक पर्व है। ऐसे में हम सभी को पर्यावरण बचाने के साथ ही समाज में प्रेम और स्नेह का वातावरण बनाने के लिए आगे आना होगा। चशायर होम के नीरज और ममता गुप्ता ने कहा कि विशेष बच्चों को हरेला जैसे महत्वपूर्ण आयोजन से जोड़कर धाद ने नई पहल की है।
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इससे बच्चों में नए उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होगा। पौधों की रक्षा का संकल्प लेने से बच्चे भावनात्मक रूप से भी जुड़ेंगे। धाद के नीरज ने समाज के अन्य वर्ग के लोगों से भी विशेष बच्चों को अपनी गतिविधियों में शामिल करने की अपील की। निशक्तजन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र की भारती पांडे ने बताया कि विशेष बच्चे भी बाहर जाकर खेलना और दुनिया देखना चाहते हैं। वह हर सामाजिक और मनोरंजन की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर दिलचस्पी भी लेते हैं। इन बच्चों ने बीते वर्षों के दौरान राजधानी समेत आसपास के क्षेत्रों में 500 से अधिक पौधे लगाए हैं। कार्यक्रम में हर्षमणि व्यास, तन्मय ममगाईं, शोभा रतूड़ी, रीता भंडारी, विजय जुयाल, नीरज आदि मौजूद रहे।
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पौधे लगाकर लिया उनकी रक्षा का संकल्प
देहरादून। वरदान संस्था ने हरेला महोत्सव के तहत बृहस्पतिवार को मोहकमपुर क्षेत्र में पौधे लगाकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। अध्यक्ष विनोद रावत ने क्षेत्रवासियों से कार्यक्रम में प्रतिभाग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि हरेला महोत्सव के इतर अलग-अलग क्षेत्रों में पर्यावरण और लोक संस्कृति के उत्थान से जुड़ी गतिविधियां आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को हरेला से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश की बोली-भाषा को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया जा रहा है। कार्यकारी सचिव मनोज चन्दोला ने बताया कि वरदान संस्था ने गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की वर्णमाला की किताब ‘आखर ज्ञान’ तैयार की है, जो सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में दो वर्षों से पढ़ाई भी जा रही है। वर्णमाला का कैलेंडर भी तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी बोली-भाषा से जोड़ने में यह किताब फायदेमंद साबित होगी। पौधरोपण करने वालों में अरुण सती, मनीष पोखरियाल, प्रशांत पोखरियाल, साक्षी, लक्ष्मी चमोली, मंजू सती, मनोहर, संदीप, विजय आदि शामिल रहे।
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आप भी बनाएं हरेला क्लब
एक महीने के हरेला महोत्सव के अंतर्गत धाद की ओर से हरेला क्लब का गठन किया गया है। इसके अलावा कोई भी स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्था, कॉलोनी अपने यहां हरेला क्लब का गठन कर सकता है। इसमें 14 से 25 वर्ष के कम से कम 25 छात्र-छात्राओं को शामिल किया जा सकता है। प्रत्येक सदस्य को हर माह 10 रुपये का योगदान भी देना होगा। यह राशि धाद की ओर से बनाए जाने वाले हरेला अंबेसडर को दी जाएगी, जो नियमित तौर पर पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेंगे। धाद की ओर से क्लब को प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। हरेल क्लब और महोत्सव से जुड़ने के लिए मोबाइल नंबर 9412050315, 9897868450 और 9675730046 पर संपर्क किया जा सकता है।